
मोहाली, पंजाब: बेटे को विदेश भेजने की उम्मीद एक परिवार को इतनी महंगी पड़ेगी, इसका अंदाजा शायद उन्हें नहीं था। साइबर ठगों ने कनाडा में रहने वाला रिश्तेदार बनकर फोन किया और पहले परिवार का भरोसा जीता। फिर बैंक खाते में 10 लाख रुपये आने का फर्जी मैसेज भेजकर उन्हें विश्वास दिलाया कि मदद के लिए रकम भेजी जा रही है। इसके बाद वीजा लगवाने के नाम पर दो लाख रुपये ट्रांसफर करवा लिए। जब ठगों ने और रकम मांगी, तब परिवार को शक हुआ कि उनके साथ धोखाधड़ी हुई है।
विदेशी नंबर से आया फोन, रिश्तेदार बनकर की बात
मामला मोहाली के बनूड़ क्षेत्र के गांव मनौली सूरत का है। शिकायत के मुताबिक, 68 वर्षीय बुजुर्ग के परिवार को 24 अगस्त को एक विदेशी नंबर से फोन आया। फोन करने वाले ने अपना नाम अमन बताया और दावा किया कि वह कनाडा में रहता है। उसने परिवार के बेटे को विदेश भेजने में मदद करने की बात कही।
कथित रिश्तेदार ने यह भी कहा कि वह 6 सितंबर को भारत आएगा और परिवार की महिला सदस्य के बैंक खाते में 10 लाख रुपये भेजेगा। उसकी बातों पर भरोसा करते हुए परिवार ने महिला के एसबीआई खाते की जानकारी साझा कर दी।
कुछ समय बाद खाते में 10 लाख रुपये आने का संदेश मिला। इससे परिवार को लगा कि फोन करने वाला सचमुच मदद कर रहा है। लेकिन यही भरोसा ठगी के जाल का हिस्सा था।
बैंक कर्मचारी बनकर भी किया संपर्क
रिपोर्ट के अनुसार, इसके बाद एक अन्य व्यक्ति ने फोन कर खुद को बैंक कर्मचारी बताया। उसने कहा कि खाते में आई रकम अगले दिन निकाली जा सकेगी। इस बातचीत से परिवार का संदेह दूर करने की कोशिश की गई।
इसके बाद कथित रिश्तेदार ने वीजा बनवाने के नाम पर दो लाख रुपये मांगे और एक बैंक खाते की जानकारी भेज दी। बेटे को लगा कि विदेश जाने की प्रक्रिया के लिए यह रकम जरूरी है। शिकायत के मुताबिक, उसने अपने पिता के यूनियन बैंक खाते से चेक के माध्यम से दो लाख रुपये ट्रांसफर कर दिए।
एक लाख रुपये और मांगे तो खुलने लगा शक
दो लाख रुपये मिलने के बाद भी ठगों का लालच खत्म नहीं हुआ। उसी शाम कथित रिश्तेदार ने एक लाख रुपये और मांगे। लगातार रकम मांगे जाने पर परिवार को संदेह हुआ और उन्हें एहसास हुआ कि वे साइबर ठगी का शिकार हो सकते हैं।
परिवार ने मामले की शिकायत पुलिस से की। शुरुआती जांच के बाद साइबर क्राइम थाना पुलिस ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया।
फोन नंबर और बैंक खातों की जांच में जुटी पुलिस
पुलिस के अनुसार, 7 अक्टूबर को भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4) और 61(2) के साथ सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 66 के तहत केस दर्ज किया गया। जांच में संबंधित फोन नंबरों, बैंक खातों और पैसों के लेनदेन की पड़ताल की जा रही है।
यह घटना बताती है कि साइबर ठग अब केवल अनजान लोगों को ही नहीं, बल्कि रिश्तेदार बनकर परिवारों का भरोसा जीतने की कोशिश भी कर रहे हैं। किसी विदेशी नंबर से रिश्तेदार होने का दावा करने वाले व्यक्ति को बिना पुष्टि के पैसे भेजना जोखिम भरा हो सकता है। बैंक खाते में रकम आने का संदेश मिलने पर भी वास्तविक बैलेंस और लेनदेन की पुष्टि बैंक के आधिकारिक माध्यम से करनी चाहिए।
डिस्क्लेमर: यह खबर उपलब्ध रिपोर्ट और शिकायत में बताए गए विवरण पर आधारित है। मामले में आरोपियों की पहचान और धोखाधड़ी से जुड़ी पूरी सच्चाई पुलिस जांच के बाद स्पष्ट होगी।



