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कैंसर से जुड़े खतरनाक माइक्रोब्स पर असर दिखाने वाली खास च्युइंग गम, रिसर्च में HPV का स्तर 93% तक घटा; जानें वैज्ञानिकों ने क्या पाया.

कैंसर से जुड़े खतरनाक माइक्रोब्स पर असर दिखाने वाली खास च्युइंग गम, रिसर्च में HPV का स्तर 93% तक घटा; जानें वैज्ञानिकों ने क्या पाया.

मुंह और गले के कैंसर की रोकथाम और इलाज के क्षेत्र में वैज्ञानिक लगातार नए तरीकों पर काम कर रहे हैं। इसी दिशा में अमेरिका की यूनिवर्सिटी ऑफ पेंसिल्वेनिया के शोधकर्ताओं ने एक खास बायोइंजीनियर्ड च्युइंग गम पर अध्ययन किया है। शुरुआती शोध में इस गम से जुड़े तत्वों ने मुंह के नमूनों में कुछ कैंसर-संबंधी संक्रमणों और बैक्टीरिया के स्तर को कम करने की क्षमता दिखाई। हालांकि, इसे कैंसर का इलाज या बीमारी से बचाव का प्रमाणित तरीका मानना अभी सही नहीं होगा।

यह शोध इसलिए चर्चा में है क्योंकि सामान्य च्युइंग गम की तरह इस्तेमाल किए जाने वाले उत्पाद के जरिए मुंह में मौजूद कुछ खास सूक्ष्मजीवों को निशाना बनाने की संभावना पर काम किया जा रहा है। लेकिन इस तकनीक की प्रभावशीलता और सुरक्षा को समझने के लिए अभी और अध्ययन जरूरी हैं।

क्या है यह खास बायोइंजीनियर्ड च्युइंग गम?

शोधकर्ताओं ने लैब में तैयार की गई एक खास गम पर काम किया, जो लैबलैब बीन्स (Lablab beans) से जुड़े प्रोटीन FRIL का इस्तेमाल करती है। इस प्रोटीन में कुछ वायरस से जुड़ने और उन्हें निष्क्रिय करने की क्षमता का अध्ययन किया गया है।

शोध का उद्देश्य मुंह में मौजूद ऐसे सूक्ष्मजीवों को कम करना है, जिनका संबंध सिर और गर्दन के कुछ कैंसर या उनके परिणामों से पाया गया है। वैज्ञानिक यह भी देख रहे हैं कि क्या इस तरीके से मुंह में मौजूद उपयोगी बैक्टीरिया को अपेक्षाकृत सुरक्षित रखा जा सकता है।

रिसर्च में किन तीन माइक्रोब्स पर ध्यान दिया गया?

अध्ययन में तीन प्रमुख सूक्ष्मजीवों पर ध्यान दिया गया:

  • ह्यूमन पैपिलोमावायरस (HPV): HPV के कुछ प्रकार गले के ऊपरी हिस्से के कैंसर, खासकर ऑरोफैरिंक्स के कैंसर, से जुड़े हैं। हालांकि, HPV संक्रमण होने का मतलब यह नहीं है कि व्यक्ति को कैंसर हो ही जाएगा।
  • Porphyromonas gingivalis (Pg): यह बैक्टीरिया मसूड़ों की बीमारी से जुड़ा है। कुछ शोधों में इसका संबंध मुंह और दूसरे कैंसरों से भी देखा गया है, लेकिन संबंध पाए जाने से अपने आप यह साबित नहीं होता कि बैक्टीरिया सीधे कैंसर पैदा करता है।
  • Fusobacterium nucleatum (Fn): यह बैक्टीरिया मुंह में पाया जा सकता है और मसूड़ों की बीमारी से जुड़ा है। इसके कुछ कैंसरों के साथ संबंध पर भी वैज्ञानिक अध्ययन कर रहे हैं।

इन सूक्ष्मजीवों पर शोध का उद्देश्य कैंसर से जुड़े जोखिमों और संक्रमण की भूमिका को बेहतर समझना है।

अध्ययन में HPV का स्तर कितना कम हुआ?

शोध में बताए गए परिणामों के अनुसार, बीन गम से प्राप्त तत्वों के इस्तेमाल के बाद लार के नमूनों में HPV का स्तर लगभग 93 प्रतिशत तक और माउथ-रिंस नमूनों में करीब 80 प्रतिशत तक कम पाया गया।

इसके अलावा, शोधकर्ताओं ने प्रोटेग्रिन नामक एक एंटीमाइक्रोबियल पेप्टाइड के साथ Pg और Fn बैक्टीरिया पर प्रभाव का भी अध्ययन किया। प्रयोगों में इन बैक्टीरिया के स्तर में उल्लेखनीय कमी देखी गई।

यहां एक अहम बात समझना जरूरी है: नमूनों में किसी वायरस या बैक्टीरिया का स्तर कम होना, शरीर में कैंसर का खत्म हो जाना या भविष्य में कैंसर न होने की गारंटी नहीं है। ये परिणाम शुरुआती शोध के संकेत हैं, जिन्हें वास्तविक मरीजों में आगे जांचने की जरूरत है।

क्या यह च्युइंग गम मुंह के अच्छे बैक्टीरिया को सुरक्षित रखती है?

शोधकर्ताओं की दिलचस्पी ऐसे तरीके विकसित करने में है, जो हानिकारक माने जाने वाले खास सूक्ष्मजीवों को निशाना बनाएं और मुंह के सामान्य माइक्रोबायोम पर कम असर डालें। शुरुआती प्रयोगों में कुछ उपयोगी सूक्ष्मजीवों को सुरक्षित रखने की संभावना दिखाई गई।

हालांकि, यह निष्कर्ष निकालने के लिए पर्याप्त प्रमाण नहीं हैं कि यह गम हर व्यक्ति के मुंह में सभी अच्छे बैक्टीरिया को सुरक्षित रखेगी। इसके लिए अधिक विस्तृत और स्वतंत्र क्लिनिकल अध्ययनों की जरूरत होगी।

सिर और गर्दन के कैंसर के लिए यह शोध क्यों महत्वपूर्ण है?

सिर और गर्दन के कैंसर में मुंह, गले और आसपास के कुछ हिस्सों में होने वाले कैंसर शामिल हैं। इन बीमारियों का उपचार कैंसर के प्रकार और उसकी अवस्था के अनुसार सर्जरी, रेडिएशन, दवाओं या अन्य तरीकों से किया जा सकता है।

HPV संक्रमण कुछ प्रकार के गले के कैंसर का महत्वपूर्ण जोखिम कारक है। वहीं, Pg और Fn जैसे बैक्टीरिया की भूमिका को लेकर वैज्ञानिक अभी अध्ययन कर रहे हैं। यदि भविष्य में इस तरह की तकनीक सुरक्षित और प्रभावी साबित होती है, तो इसे मौजूदा चिकित्सा के साथ सहायक उपाय के रूप में परखने की संभावना हो सकती है।

फिलहाल इस गम को कैंसर का प्रमाणित इलाज या कैंसर रोकने का स्थापित उपाय नहीं माना जाना चाहिए। इसकी प्रभावशीलता, सही खुराक, लंबे समय की सुरक्षा और वास्तविक मरीजों पर असर की पुष्टि के लिए आगे के क्लिनिकल परीक्षण आवश्यक हैं।

मुंह के कैंसर से बचाव के लिए अभी क्या करें?

किसी नई तकनीक के उपलब्ध होने का इंतजार करने के बजाय मुंह की सेहत और कैंसर के ज्ञात जोखिमों पर ध्यान देना जरूरी है।

  • तंबाकू, गुटखा, खैनी और सुपारी से दूर रहें।
  • शराब का सेवन न करें या इससे बचें, क्योंकि यह मुंह और गले के कैंसर का जोखिम बढ़ा सकती है।
  • नियमित रूप से दांतों और मसूड़ों की सफाई करें और जरूरत के अनुसार दंत चिकित्सक से जांच कराएं।
  • पात्रता और चिकित्सकीय सलाह के अनुसार HPV टीकाकरण पर विचार करें।
  • मुंह में लंबे समय तक रहने वाला घाव, सफेद या लाल धब्बा, गांठ, निगलने में परेशानी या आवाज में लगातार बदलाव हो, तो डॉक्टर या दंत विशेषज्ञ से जांच कराएं।

निष्कर्ष: बायोइंजीनियर्ड च्युइंग गम पर हुआ शोध कैंसर से जुड़े कुछ वायरस और बैक्टीरिया को निशाना बनाने की एक संभावित नई दिशा दिखाता है। शुरुआती प्रयोगों में HPV के स्तर में कमी देखी गई, लेकिन यह साबित नहीं हुआ है कि इस गम से कैंसर ठीक हो सकता है या इसे रोका जा सकता है। इसे फिलहाल शोध के शुरुआती नतीजों के रूप में ही देखना चाहिए।

डिस्क्लेमर: यह लेख सामान्य स्वास्थ्य जागरूकता के लिए है, व्यक्तिगत चिकित्सकीय सलाह का विकल्प नहीं। शोध में मिले शुरुआती परिणामों को प्रमाणित उपचार न समझें। मुंह या गले से जुड़ी किसी समस्या के लिए योग्य डॉक्टर से सलाह लें और निर्धारित कैंसर उपचार को किसी अप्रमाणित उत्पाद से न बदलें।

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