कहते हैं कि अगर हौसले बुलंद हों और मंजिल पाने का जुनून हो, तो उम्र भी रास्ते की बाधा नहीं बन सकती. उत्तर प्रदेश के मऊ जिले के मधुबन तहसील क्षेत्र स्थित खोजीपुर उन्दुरा गांव के दीनानाथ यादव ने इसे सच कर दिखाया है. 54 वर्ष की उम्र में उनका चयन वर्ष 2022 की टीजीटी संस्कृत परीक्षा में हुआ है. उन्हें बलिया जिले के उच्चतर माध्यमिक विद्यालय जवहि दियर में संस्कृत शिक्षक के पद पर तैनाती मिली है. उनकी इस उपलब्धि से परिवार, गांव और पूर्व छात्रों में खुशी का माहौल है.

दीनानाथ यादव के लिए सरकारी शिक्षक बनने का सफर आसान नहीं रहा. वर्ष 1997 से उन्होंने इस दिशा में प्रयास शुरू किए. इस दौरान कई उतारचढ़ाव आए, लेकिन उन्होंने अपने लक्ष्य से मुंह नहीं मोड़ा. सफलता मिलने में लंबा समय लगा, फिर भी उन्होंने मेहनत और तैयारी जारी रखी. करीब ढाई दशक के लंबे इंतजार के बाद उनकी मेहनत रंग लाई. 54 साल की उम्र में सरकारी शिक्षक बनने का सपना पूरा होना उनके लिए किसी बड़ी उपलब्धि से कम नहीं है. उनकी कहानी उन युवाओं और अभ्यर्थियों के लिए प्रेरणा है, जो लगातार प्रयास करने के बावजूद सफलता न मिलने पर निराश हो जाते हैं.
18 वर्षों तक निजी विद्यालय में पढ़ाया
दीनानाथ यादव ने वर्ष 1992 में सर्वोदय डिग्री कॉलेज से स्नातक की पढ़ाई पूरी की थी. इसके बाद वर्ष 1997 में बीएड की डिग्री हासिल की और शिक्षण कार्य से जुड़ गए. उन्होंने अपने ज्ञान और अनुभव के बल पर विद्यार्थियों को पढ़ाना शुरू किया. वह मधुबन के पांती रोड स्थित बीपीएस पब्लिक इंटर कॉलेज में करीब 18 वर्षों तक संस्कृत अध्यापक के रूप में सेवाएं देते रहे. निजी विद्यालय में शिक्षण कार्य की जिम्मेदारी निभाने के साथसाथ उन्होंने सरकारी शिक्षक बनने की तैयारी भी जारी रखी. परिवार और नौकरी की जिम्मेदारियों के बीच लक्ष्य पर टिके रहना उनके संघर्ष का अहम हिस्सा रहा.
गांव में खुशी की लहर
टीजीटी संस्कृत परीक्षा में चयन और बलिया के विद्यालय में तैनाती मिलने के बाद दीनानाथ यादव के परिवार और गांव में खुशी का माहौल है. उनके पूर्व छात्र भी इस उपलब्धि से उत्साहित हैं. वर्षों तक विद्यार्थियों को शिक्षा देने वाले दीनानाथ अब सरकारी विद्यालय में संस्कृत शिक्षक के रूप में अपनी सेवाएं देंगे.



