
सहारनपुर: उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में गाय के गोबर का इस्तेमाल कर एक अनोखी पहल की जा रही है। यहां नगर निगम द्वारा संचालित कान्हा उपवन गौशाला में गोबर से सीड बॉल यानी बीज की गोलियां तैयार की जा रही हैं। इनकी मदद से लोग खाली जमीन पर फूलों और सब्जियों के पौधे उगाने की कोशिश कर सकते हैं। खास बात यह है कि एक सीड बॉल की कीमत महज 10 रुपये रखी गई है।
550 गोवंशों को मिल रहा संरक्षण
सहारनपुर के सावलपुर नवादा गांव में स्थित कान्हा उपवन गौशाला में करीब 550 निराश्रित गोवंशों को संरक्षण दिया जा रहा है। गौशाला को आत्मनिर्भर बनाने के लिए गोबर और गोमूत्र से अलग-अलग उपयोगी उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं। इसी प्रयास के तहत अब सीड बॉल बनाने का काम भी शुरू किया गया है।
इस गौशाला का निरीक्षण उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी कर चुके हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने यहां तैयार किए जा रहे उत्पादों की सराहना की थी।
गोबर के साथ मिलाए जाते हैं फूलों और सब्जियों के बीज
गौशाला में तैयार होने वाली सीड बॉल में गाय के गोबर के साथ अलग-अलग पौधों के बीज मिलाए जाते हैं। इनमें गेंदे जैसे फूलों के अलावा हरी मिर्च, लौकी, तोरई, भिंडी और बैंगन जैसी सब्जियों के बीज शामिल हैं। रिपोर्ट में इलायची और लौंग के बीजों का भी जिक्र किया गया है।
इन गोलियों को ऐसी जगह मिट्टी में डाला जा सकता है, जहां पौधों को उगने के लिए पर्याप्त नमी और अनुकूल वातावरण मिलने की संभावना हो। गोबर मिट्टी में जैविक पदार्थ पहुंचाने में भी मदद कर सकता है।
हालांकि, सीड बॉल डालने के बाद हर जगह पौधे उगना जरूरी नहीं है। बीजों की गुणवत्ता, मिट्टी, मौसम, पानी और देखभाल जैसे कारकों का भी पौधों के विकास पर असर पड़ता है।
रोजाना तैयार हो रही हैं 100 से 150 सीड बॉल
गौशाला के केयरटेकर श्रवण कुमार के मुताबिक, यहां हर दिन लगभग 100 से 150 सीड बॉल तैयार की जा रही हैं। इनकी कीमत 10 रुपये प्रति बॉल रखी गई है। इन्हें ऑफलाइन बिक्री के साथ-साथ अमेजन जैसे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए भी ग्राहकों तक पहुंचाया जा रहा है।
रिपोर्ट के अनुसार, सहारनपुर के अलावा उत्तर प्रदेश के अन्य इलाकों और हरियाणा, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, दिल्ली, मध्य प्रदेश तथा बिहार जैसे राज्यों से भी इनकी मांग आ रही है।
गोबर के इस्तेमाल से हरियाली बढ़ाने की कोशिश
आमतौर पर गाय के गोबर का इस्तेमाल खाद और दूसरे पारंपरिक उत्पाद बनाने में किया जाता है। अब इसे सीड बॉल के रूप में उपयोग करके फूलों और सब्जियों के पौधे उगाने का एक और विकल्प तैयार किया जा रहा है।
इस पहल से गौशाला में उपलब्ध संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल करने और अतिरिक्त उत्पाद तैयार करने की कोशिश हो रही है। वहीं, लोगों को भी अपने आसपास हरियाली बढ़ाने का एक सरल विकल्प मिल सकता है।
डिस्क्लेमर: यह खबर उपलब्ध मीडिया रिपोर्ट के आधार पर तैयार की गई है। उत्पाद की उपलब्धता, कीमत और बिक्री से जुड़ी जानकारी समय के साथ बदल सकती है।



