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गाय के गोबर से बन रहे दिवाली: के खूबसूरत दीपक, 5 महिलाओं को मिला रोजगार, ढाई लाख दीये बनाने का लक्ष्य.

गाय के गोबर से बन रहे दिवाली: के खूबसूरत दीपक, 5 महिलाओं को मिला रोजगार, ढाई लाख दीये बनाने का लक्ष्य.

कोटा: इस दिवाली घरों को रोशन करने के लिए मिट्टी के दीयों के साथ गाय के गोबर से बने दीपक भी लोगों को आकर्षित कर रहे हैं। राजस्थान के कोटा में डॉ. रूपा आनंद झा ने गोबर से दीपक और दूसरे उपयोगी उत्पाद तैयार करने की पहल शुरू की है। खास बात यह है कि इस काम के जरिए महिलाओं को रोजगार से जोड़ने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की कोशिश की जा रही है।

गोबर को बनाया रोजगार का जरिया

डॉ. रूपा आनंद झा को गोबर से उपयोगी उत्पाद बनाने की प्रेरणा जयपुर में आयोजित गो महाकुंभ की प्रदर्शनी से मिली। वहां उन्होंने देखा कि गाय के गोबर से कई तरह के धार्मिक और घरेलू उत्पाद तैयार किए जा सकते हैं।

इसी दौरान उनकी मुलाकात ओमप्रकाश जी से हुई, जिनसे उन्हें गोबर से उत्पाद बनाने की ट्रेनिंग मिली। इसके बाद उन्होंने गोबर से धूपबत्ती, कंडे, हवन सामग्री और दीपक तैयार करने का काम शुरू किया। अब दीपावली को देखते हुए उनका मुख्य ध्यान गोबर से बने दीपकों के उत्पादन पर है।

तीन डिजाइन में तैयार हो रहे हैं दीपक

फिलहाल यहां तीन तरह के दीपक बनाए जा रहे हैं। इनमें फैंसी डिजाइन, फूलों की आकृति वाले दीपक और लाइनिंग डिजाइन वाले दीपक शामिल हैं।

इन दीपकों को तैयार करने के लिए डॉ. रूपा ने खुद एक हैंडमेड मशीन विकसित की है। यह पूरी तरह ऑटोमेटिक नहीं है, इसलिए उत्पादन की गति सीमित रहती है। इसके बावजूद इस व्यवस्था से महिलाओं को काम मिल रहा है और स्थानीय स्तर पर एक नए रोजगार का अवसर तैयार हुआ है।

पांच महिलाएं कर रही हैं काम

इस पहल से फिलहाल करीब पांच महिलाएं जुड़ी हुई हैं। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, एक महिला प्रतिदिन लगभग 250 से 300 दीपक तैयार कर सकती है।

डॉ. रूपा का लक्ष्य इस दीपावली तक करीब दो से ढाई लाख गोबर के दीपक तैयार करने का है। इसके लिए उत्पादन बढ़ाने और भविष्य में अधिक महिलाओं को इस काम से जोड़ने की योजना है।

इस पहल को ‘नारी शक्ति’ ग्रुप और एक एनजीओ की ओर से भी सहयोग मिल रहा है। इससे इस काम को आगे बढ़ाने और लोगों तक इसकी जानकारी पहुंचाने में मदद मिल रही है।

स्थानीय और स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देने की अपील

डॉ. रूपा के मुताबिक, हाड़ौती क्षेत्र में गोबर से बने ऑर्गेनिक उत्पादों के बारे में अभी जागरूकता बढ़ाने की जरूरत है। बड़े शहरों में ऐसे उत्पादों को लेकर दिलचस्पी देखने को मिलती है, लेकिन स्थानीय स्तर पर इनके इस्तेमाल को और बढ़ावा दिया जा सकता है।

उनका उद्देश्य केवल दीपक बनाना नहीं, बल्कि लोगों को यह बताना भी है कि पारंपरिक संसाधनों का इस्तेमाल करके रोजगार के नए अवसर तैयार किए जा सकते हैं। वह लोगों से दिवाली पर स्थानीय और स्वदेशी उत्पाद अपनाने की अपील कर रही हैं।

गोबर से बने दीपक खरीदने से स्थानीय उत्पादों को प्रोत्साहन मिल सकता है और इनके निर्माण से जुड़ी महिलाओं की कमाई में भी मदद हो सकती है।

रोशनी के साथ आत्मनिर्भरता की उम्मीद

कोटा में शुरू हुई यह पहल दिखाती है कि पारंपरिक संसाधनों का इस्तेमाल करके छोटे स्तर पर भी रोजगार के अवसर बनाए जा सकते हैं। गोबर से तैयार किए जा रहे ये दीपक दिवाली की सजावट का विकल्प होने के साथ महिलाओं की मेहनत और आत्मनिर्भरता से भी जुड़े हैं।

अगर इस तरह के उत्पादों की मांग बढ़ती है, तो भविष्य में इस काम से और महिलाओं को जोड़ने की संभावनाएं बन सकती हैं।

डिस्क्लेमर: यह खबर उपलब्ध मीडिया रिपोर्ट के आधार पर तैयार की गई है। उत्पादन के लक्ष्य, रोजगार से जुड़े आंकड़ों और उत्पादों की उपलब्धता की स्वतंत्र पुष्टि नहीं की गई है।

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