
शिमला: पहाड़ी इलाकों में खेती करना आसान नहीं होता। खासकर सेब की फसल तैयार होने के बाद उसे बगीचे से सड़क तक पहुंचाना किसानों के लिए बड़ी चुनौती बन जाता है। ऐसे में हिमाचल प्रदेश के शिमला में एक किसान ने इस परेशानी का अनोखा समाधान निकाला है। किसान ने अपने सेब के बगीचे में मोनोरेल सिस्टम लगवाया है, जिससे सेब की ढुलाई आसान हो सकेगी।
चीन से मंगवाए इंजन और ट्रैक
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, किसान ने इस मोनोरेल सिस्टम को तैयार करने के लिए चीन से इंजन और ट्रैक मंगवाए। इस पूरे सिस्टम को लगाने में करीब 4.20 लाख रुपये खर्च हुए हैं। पहाड़ी बगीचे में तैयार किया गया यह इंतजाम सेब को एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाने में मदद करता है।
पारंपरिक तरीके से पहाड़ी ढलानों पर सेब की पेटियां ढोने में मजदूरों को काफी मेहनत करनी पड़ती है। रास्ता ऊबड़-खाबड़ होने के कारण फसल को नीचे तक पहुंचाना भी मुश्किल हो सकता है। मोनोरेल सिस्टम से इस काम को आसान बनाने की कोशिश की गई है।
एक बार में 500 किलो तक सेब ढोने की क्षमता
रिपोर्ट के अनुसार, यह मोनोरेल एक बार में करीब 500 किलोग्राम तक सेब ले जा सकती है। इससे फसल की ढुलाई में लगने वाली मेहनत कम करने और काम को अधिक सुविधाजनक बनाने में मदद मिल सकती है।
पहाड़ी क्षेत्रों में बागवानी किसानों की आजीविका का अहम हिस्सा है। ऐसे इलाकों में ढुलाई की बेहतर व्यवस्था होने से किसानों का समय और शारीरिक श्रम बच सकता है। हालांकि, इससे वास्तविक बचत कितनी होगी और सिस्टम को चलाने में कितना अतिरिक्त खर्च आएगा, इसकी विस्तृत जानकारी उपलब्ध रिपोर्ट में नहीं दी गई है।
पहाड़ी खेती में तकनीक का इस्तेमाल
यह पहल दिखाती है कि खेती में नई तकनीक का इस्तेमाल केवल बड़े खेतों तक सीमित नहीं है। जरूरत के हिसाब से छोटे और पहाड़ी बगीचों में भी तकनीकी साधनों को अपनाया जा सकता है। अगर ऐसी व्यवस्था किसानों के लिए किफायती और उपयोगी साबित होती है, तो मुश्किल रास्तों पर फसल पहुंचाने की समस्या कम करने में मदद मिल सकती है।
डिस्क्लेमर: यह खबर उपलब्ध मीडिया रिपोर्ट के आधार पर तैयार की गई है। मोनोरेल की लागत, क्षमता और अन्य तकनीकी विवरणों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं की गई है।



