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​जियो के अकेले मालिक नहीं हैं मुकेश अंबानी… कंपनी में गूगल, फेसबुक समेत इन कंपनियों का भी लगा है पैसा!

रिलायंस जियो के आईपीओ का रास्ता साफ हो चुका है. भारतीय शेयर बाजार के इतिहास का सबसे बड़ा आईपीओ जल्द ही दस्तक देने वाला है. ये आईपीओ करीब 37,700 करोड़ रुपये का होगा. इसे लेकर निवेशकों के बीच काफी उत्साह देखा जा रहा है. ब्लूमबर्ग की हालिया रिपोर्ट के मुताबिक जियो प्लेटफॉर्म्स के इस आईपीओ का प्राइस बैंड 1,065 रुपये से लेकर 1,119 रुपये प्रति शेयर के बीच तय किया जा सकता है.

​जियो के अकेले मालिक नहीं हैं मुकेश अंबानी… कंपनी में गूगल, फेसबुक समेत इन कंपनियों का भी लगा है पैसा!

लेकिन इस मेगा इश्यू से जुड़ी सबसे दिलचस्प बात कुछ अलग ही है. ज्यादातर लोगों को लगता है कि जियो पर पूरी तरह से मुकेश अंबानी की कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज का हक है. ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रोस्पेक्टस यानी डीआरएचपी के आंकड़े कुछ और ही कहानी बयां करते हैं. दस्तावेजों के मुताबिक रिलायंस जियो प्लेटफॉर्म्स की 100 फीसदी हिस्सेदार नहीं है. इसमें कई दिग्गज ग्लोबल कंपनियों का पैसा लगा हुआ है.

रिलायंस के पास नहीं है पूरा मालिकाना हक

जियो प्लेटफॉर्म्स को रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड का हिस्सा माना जाता है. ये सच है कि कंपनी की सबसे बड़ी हिस्सेदारी रिलायंस के ही पास है. लेकिन ये हिस्सेदारी 100 फीसदी नहीं है. ताजा आंकड़ों के मुताबिक जियो प्लेटफॉर्म्स में रिलायंस इंडस्ट्रीज की कुल हिस्सेदारी 66.43 प्रतिशत है.

बाकी का हिस्सा विदेशी निवेशकों, टेक कंपनियों, सॉवरेन वेल्थ फंड्स के पास है. कंपनी के कुल 105 शेयरधारक हैं. इन शेयरधारकों में दुनिया की कुछ सबसे बड़ी टेक कंपनियां शामिल हैं. मेटा प्लेटफॉर्म्स से लेकर दिग्गज सर्च इंजन गूगल तक ने जियो में भारी भरकम निवेश किया हुआ है. इन कंपनियों ने जियो के डिजिटल विजन पर भरोसा जताते हुए अपने पैसे लगाए हैं. मुकेश अंबानी ने रिलायंस जियो को सिर्फ एक टेलीकॉम कंपनी नहीं बल्कि एक बड़ी डिजिटल सर्विस प्रोवाइडर कंपनी बना दिया है. इसी वजह से दुनिया भर के ग्लोबल निवेशक इसमें अपनी दिलचस्पी दिखा रहे हैं.

इन दिग्गज कंपनियों ने किया है भारी निवेश

जियो के टॉप 10 शेयरधारकों की लिस्ट काफी लंबी है. इसमें एक प्रतिशत से ज्यादा हिस्सेदारी रखने वाली कंपनियों के नाम शामिल हैं. रिलायंस इंडस्ट्रीज के बाद दूसरी सबसे बड़ी हिस्सेदारी मेटा से जुड़ी कंपनी जादू होल्डिंग्स एलएलसी की है. जादू होल्डिंग्स के पास जियो की 9.98 फीसदी हिस्सेदारी है. इसके ठीक बाद टेक दिग्गज गूगल का नाम आता है. गूगल इंटरनेशनल एलएलसी ने जियो प्लेटफॉर्म्स में 7.73 फीसदी की मजबूत हिस्सेदारी ले रखी है.

इसके अलावा मध्य पूर्व के देशों के सॉवरेन वेल्थ फंड्स ने भी भारत की इस डिजिटल क्रांति में पैसा लगाया है. सऊदी अरब के द पब्लिक इन्वेस्टमेंट फंड के पास जियो की 2.31 फीसदी हिस्सेदारी है. इसी तरह ओमीक्रॉन एशिया होल्डिंग्स ने भी 2.31 फीसदी शेयर अपने पास रखे हैं. विस्टा इक्विटी पार्टनर्स से जुड़ी कंपनी VEPF VII AIV I लिमिटेड की भी जियो में 2.31 फीसदी हिस्सेदारी है.

लिस्ट यहीं खत्म नहीं होती. सिल्वर लेक से जुड़ी कंपनी एसएलपी रेडवुड होल्डिंग्स के पास 1.88 प्रतिशत शेयर हैं. मुबाडाला इन्वेस्टमेंट कंपनी की सब्सिडियरी एमआईसी रेडवुड के पास 1.85 फीसदी हिस्सेदारी मौजूद है. जनरल अटलांटिक सिंगापुर के पास 1.34 प्रतिशत हिस्सेदारी है. वहीं अबू धाबी इन्वेस्टमेंट अथॉरिटी की कंपनी प्लैटिनम जैस्मीन ए 2018 ट्रस्ट ने भी 1.16 फीसदी हिस्सेदारी ले रखी है. ये सारे आंकड़े बताते हैं कि जियो को किस स्तर का ग्लोबल सपोर्ट मिला हुआ है.

बिना ओएफएस के आएगा ये मेगा इश्यू

इस आईपीओ का साइज अपने आप में एक बड़ा रिकॉर्ड है. कंपनी बाजार से 3.8 बिलियन से 4 बिलियन डॉलर जुटाने की तैयारी में है. 37,700 करोड़ रुपये का ये आंकड़ा भारतीय शेयर बाजार के लिए बहुत बड़ा है. इससे पहले भी कई बड़े आईपीओ आए हैं लेकिन जियो का ये इश्यू सारे रिकॉर्ड तोड़ने के लिए तैयार दिख रहा है. इस मेगा इश्यू के तहत 27 करोड़ नए इक्विटी शेयर जारी किए जाएंगे. ये शेयर इश्यू के बाद की इक्विटी का करीब 2.9 फीसदी हिस्सा होंगे. इस आईपीओ की सबसे खास बात ये है कि इसमें कोई भी ऑफर फॉर सेल नहीं होगा.

ओएफएस का मतलब होता है कि कंपनी के मौजूदा निवेशक अपने शेयर बेचकर बाहर निकल रहे हैं. लेकिन जियो के मामले में ऐसा बिल्कुल नहीं हो रहा है. कोई भी मौजूदा निवेशक अपनी हिस्सेदारी नहीं बेच रहा है. ये दिखाता है कि पुराने निवेशकों को कंपनी के भविष्य पर पूरा भरोसा है. कंपनी जो भी पैसा बाजार से जुटाएगी उसका इस्तेमाल नए शेयरों के जरिए होगा. 1,065 से 1,119 रुपये के प्राइस बैंड को देखते हुए रिटेल निवेशकों को इसमें निवेश करने के लिए अपनी खास रणनीति बनानी होगी.

शेयर बाजार में कब होगी जियो की लिस्टिंग

निवेशकों के मन में सबसे बड़ा सवाल यही है कि वे कब से इस आईपीओ में पैसा लगा सकेंगे. सामने आई जानकारी के मुताबिक कंपनी ने विदेशी निवेशकों के लिए रोडशो पूरे कर लिए हैं. 12 अक्टूबर 2026 से शुरू होने वाले हफ्ते में कंपनी मार्केट रेगुलेटर सेबी के पास अपने फाइनल पेपर जमा कर सकती है. एंकर निवेशकों के लिए ये इश्यू 19 अक्टूबर 2026 को खुल सकता है. आम निवेशकों के लिए सब्सक्रिप्शन की तारीख 21 अक्टूबर से 23 अक्टूबर 2026 तक रखी जा सकती है.

Disclaimer: ये आर्टिकल सिर्फ जानकारी के लिए है और इसे किसी भी तरह से इंवेस्टमेंट सलाह के रूप में नहीं माना जाना चाहिए. TV9 भारतवर्ष अपने पाठकों और दर्शकों को पैसों से जुड़ा कोई भी फैसला लेने से पहले अपने वित्तीय सलाहकारों से सलाह लेने का सुझाव देता है.

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