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​मोटापा, शराब, हाई BP और AI का गलत इस्तेमाल…आने वाली इंसानी नस्लों पर मंडरा रहे ये 17 खतरे

परमाणु युद्ध, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और जैविक हथियार समेत 17 ऐसे खतरे हैं जो इंसानों के खात्मे का कारण बन सकते हैं. मेडिकल जर्नल ‘द लैंसेट’ की एक रिपोर्ट में खुलासा किया गया है. रिपोर्ट को “द लैंसेट कमीशन ऑन 21st सेंचुरी ग्लोबल थ्रेट्स टू हेल्थ” नाम दिया गया है. लैंसेट कमीशन ने अगले 74 सालों में इंसानी सेहत के लिए 17 बड़े खतरों की सूची बनाई है.

​मोटापा, शराब, हाई BP और AI का गलत इस्तेमाल…आने वाली इंसानी नस्लों पर मंडरा रहे ये 17 खतरे

इसके लिए विशेषज्ञों ने मौजूदा रुझानों के आधार पर हिसाब लगाया कि हर खतरे की वजह से बीमारी, विकलांगता या समय से पहले मौत के कारण कितने स्वस्थ जीवनवर्ष खो सकते हैं.

कौनकौन से खतरे?

लैंसेट रिपोर्ट के अनुसार, AI का दुर्भावनापूर्ण इस्तेमाल, जिसमें AI की मदद से बनाए गए जैविक हथियार भी शामिल हैं, और परमाणु युद्ध के बाद पैदा होने वाला “न्यूक्लियर फैमिन” यानी परमाणु अकाल, अगले 75 साल में मानव विलुप्ति का जोखिम रखते हैं.

परमाणु युद्ध की स्थिति में वायुमंडल के ऊपरी हिस्से में इतने कण पहुंच सकते हैं कि सूरज की रोशनी रुक जाए और फसलें बर्बाद होकर भारी अकाल पड़े. रिपोर्ट के साथ छपे लैंसेट के एक हिस्से में चेतावनी दी गई कि अगर ये खतरे हकीकत बने, तो नुकसान का पैमाना इंसानियत के लिए “प्रलय” जैसा होगा.

परमाणु युद्ध के बाद की स्थिति को भी खतरा बताया गया है.

अन्य15 बड़े खतरे

जिन खतरों से सबसे ज्यादा नुकसान हो सकता है, उन्हें बड़े विनाशकारी खतरे की कैटेगरी में रखा गया है. इस श्रेणी में ये खतरे शामिल हैं वायु प्रदूषण, एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस , बच्चों में कुपोषण, जलवायु संकट, पारंपरिक युद्ध, अमीर देशों की ओर से विदेशी सहायता में कटौती, शराब का ज्यादा सेवन,हाई ब्लड प्रेशर, आय की असमानता, कम शिक्षा, प्राकृतिक रूप से फैलने वाली महामारियां, मोटापा, खराब मानसिक सेहत, धूम्रपान और बढ़ती उम्र से जुड़ी बीमारी.सूची में जगह पाने की दो शर्तें थीं.खतरे से बड़ी संख्या में स्वस्थ जीवनवर्षों का नुकसान और उसका कोई संभावित समाधान भी होना चाहिए.

वायु प्रदूषण की वजह से खुदकुशी के विचार आने का खतरा

अमीर और गरीब इलाकों में अलग तस्वीर

रिपोर्ट बताती है कि अमीर क्षेत्रों में मोटापा और खराब मानसिक सेहत जैसी गैरसंचारी बीमारियां सबसे बड़ा खतरा हैं. वहीं, कम आय वाले क्षेत्रों में स्वास्थ्य को सबसे ज्यादा नुकसान कम शिक्षा जैसे कारणों से हो रहा है.

रिपोर्ट के मॉडल के मुताबिक, अगर ग्लोबल वार्मिंग को करीब 1.8 डिग्री सेल्सियस पर रोक लिया जाए, बजाय इसके कि तापमान 4.4 डिग्री तक पहुंचे, तो 1.89 अरब स्वस्थ जीवनवर्षों का नुकसान टाला जा सकता है. अमेरिका और ब्रिटेन समेत कई बड़े दानदाता देशों ने पिछले एक साल में सहायता खर्च में बड़ी कटौती का ऐलान किया है.

मोटापे की समस्या.

डराना मकसद नहीं

कमीशन के सदस्य और यूसीएल में प्रोफेसर इब्राहिम अबुबकर ने कहा कि उनका मकसद लोगों को डराना नहीं है. उनके मुताबिक, नीतिनिर्माताओं को यह बताना है कि कौनसे खतरे सामने हैं और अगर वे कदम उठाएं तो कितना फर्क पड़ सकता है.

लैंसेट कमीशन से जुड़े और इंस्टीट्यूट फॉर हेल्थ मेट्रिक्स एंड इवैल्युएशन के निदेशक प्रो. क्रिस्टोफर मरे ने कहा कि आज के नेताओं के फैसले अगली पीढ़ी की सेहत तय करेंगे. उन्होंने बताया कि तीन साल पहले जब काम शुरू हुआ, तब माना गया था कि तीन ही बड़े खतरे हैं संघर्ष, जलवायु और महामारी, लेकिन खतरों की संख्या इससे कहीं ज्यादा निकली. उनके मुताबिक, सरकारों को पहले से अनुमान, रोकथाम और तैयारी के लिए पैसा और स्टाफ तय करना चाहिए.

लैंसेट की पोस्ट

What will shape the health of the next generation?

A new Lancet Commission outlines 17 interlinked catastrophic threats to health and human survival between 2025 and 2100: https://t.co/gBkjZTB4dM #21stCenturyThreatsToHealth @IHME_UW @UNFPA https://t.co/vXCdIRpcc9

— The Lancet October 11, 2026

आगे क्या?

लैंसेट कमीशन हर साल इन 17 खतरों का फिर से आकलन करेगा और नए आंकड़े व उभरते खतरे जोड़ेगा. लेखकों ने नेताओं से अपील की है कि संकट बनने से पहले ही इन जोखिमों पर काम हो, जिसमें तकनीकी नवाचार में निवेश और स्वास्थ्य प्रणालियों को मजबूत करना शामिल है.

रिपोर्ट का सबसे अहम संदेश यही है कि हर खतरे के लिए कार्रवाई का एक व्यावहारिक रास्ता मौजूद है, बशर्ते उस पर समय रहते अमल हो.

contact.satyareport@gmail.com

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