Nifty IT Index: मंगलवार की सुबह भारतीय शेयर बाजार के लिए एक नई ऊर्जा लेकर आई. बाजार खुलते ही निवेशकों की नजरें पूरी तरह से आईटी सेक्टर पर टिक गईं. टीसीएस, इन्फोसिस, विप्रो और एचसीएल टेक जैसी दिग्गज कंपनियों के शेयरों में खरीदारी की ऐसी होड़ मची कि देखते ही देखते ये स्टॉक 5 फीसदी तक उछल गए. इस चौतरफा खरीदारी का सीधा असर निफ्टी आईटी इंडेक्स पर दिखाई दिया, जो 3 फीसदी की मजबूत बढ़त के साथ कारोबार करता नजर आया. शेयर बाजार में निवेश करने वालों के लिए आज का दिन पूरी तरह से आईटी सेक्टर के नाम रहा.

ये तेजी कोई अचानक नहीं आई है. इसके पीछे कई ठोस कारण और बेहतरीन आंकड़े मौजूद हैं. पिछले कुछ हफ्तों से बाजार में जो उतारचढ़ाव का दौर चल रहा था, उसे आईटी कंपनियों के दूसरी तिमाही के नतीजों ने थाम लिया है. निवेशकों को जिस बात का बेसब्री से इंतजार था, वो इन कंपनियों की बैलेंस शीट में साफ नजर आ रहा है.
HCL टेक के मुनाफे ने बाजार को चौंकाया
आज की इस शानदार तेजी में सबसे बड़ा हीरो एचसीएल टेक बनकर उभरा है. सेंसेक्स की 30 प्रमुख कंपनियों की लिस्ट में एचसीएल टेक के शेयर ने निवेशकों को सबसे ज्यादा मुनाफा दिया है. कंपनी ने वित्त वर्ष 2027 की जुलाईसितंबर तिमाही के लिए अपने जो नतीजे जारी किए हैं, उन्होंने बाजार के सारे अनुमानों को पीछे छोड़ दिया है. कंपनी का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट सालाना आधार पर 21.18 फीसदी की शानदार उछाल के साथ 5,132 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है.
आखिर इस शानदार मुनाफे के पीछे का राज क्या है. असल में कंपनी को अपने एडवांस्ड एआई ऑपरेशन्स से काफी फायदा मिल रहा है. एआई की बढ़ती मांग ने कंपनी के मार्जिन को काफी हद तक सुधारा है. इसके साथ ही कम टैक्स भुगतान का फायदा भी सीधे कंपनी के खाते में गया है, जिससे मुनाफा और ज्यादा बढ़ गया. अगर हम रेवेन्यू की बात करें, तो रुपये के लिहाज से एचसीएल टेक का रेवेन्यू तिमाहीदरतिमाही आधार पर 3 फीसदी और सालाना आधार पर 11.51 फीसदी बढ़कर 35,620 करोड़ रुपये हो गया है. वहीं डॉलर के टर्म में कंपनी का रेवेन्यू 3.72 अरब डॉलर रहा है, जो पिछले साल के मुकाबले 2.2 फीसदी ज्यादा है.
मजबूत डॉलर से आईटी कंपनियों को बंपर फायदा
आईटी शेयरों में आई इस बंपर तेजी की दूसरी सबसे बड़ी वजह अमेरिकी डॉलर की लगातार बढ़ती मजबूती है. इस वक्त डॉलर इंडेक्स 102.6 के स्तर के आसपास कारोबार कर रहा है. ये इसका पिछले 18 महीनों का सबसे उच्चतम स्तर है. डॉलर इंडेक्स मुख्य रूप से छह प्रमुख वैश्विक करेंसियों की बास्केट के मुकाबले डॉलर की ताकत को मापता है. डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये में आई गिरावट ने आईटी सेक्टर को एक नया बूस्ट दिया है.
ये बात समझना बहुत आसान है कि डॉलर के महंगा होने से आईटी कंपनियों को फायदा क्यों होता है. दरअसल, भारत की ज्यादातर आईटी कंपनियां अपनी सेवाएं अमेरिका और यूरोप के देशों में देती हैं. इनकी कमाई का एक बहुत बड़ा हिस्सा सीधे अमेरिकी डॉलर में आता है. जब डॉलर के मुकाबले रुपया कमजोर होता है, तो इन कंपनियों को अपनी डॉलर की कमाई को रुपये में बदलने पर ज्यादा रकम मिलती है. इससे उनकी कुल कमाई में अपने आप भारी इजाफा हो जाता है. डॉलर की यही मजबूती आज बाजार में आईटी शेयरों को दौड़ा रही है.
डील बुकिंग में नया रिकॉर्ड
एचसीएल टेक ने सिर्फ मुनाफे में ही नहीं, बल्कि नए प्रोजेक्ट्स हासिल करने में भी बाजार को हैरान किया है. दूसरी तिमाही में कंपनी की कुल डील बुकिंग 3.3 अरब डॉलर रही है. सालाना आधार पर अगर इसे देखें तो इसमें 27 फीसदी का बड़ा उछाल दर्ज किया गया है. इस बेहतरीन प्रदर्शन के कारण कंपनी की पहली छमाही की डील बुकिंग अपने अब तक के रिकॉर्ड हाई पर पहुंच गई है. नई डील्स मिलने का मतलब है कि कंपनी के पास भविष्य के लिए भी काम की कोई कमी नहीं है.
इन शानदार नतीजों से उत्साहित होकर एचसीएल टेक ने वित्त वर्ष 2027 के लिए अपनी रेवेन्यू ग्रोथ का अनुमान भी बढ़ा दिया है. पहले कंपनी ने कॉन्स्टेंट करेंसी के आधार पर 1 से 4 फीसदी ग्रोथ का अनुमान जताया था. अब प्रबंधन ने इसे बढ़ाकर 2.5 से 4 फीसदी कर दिया है. ग्रोथ गाइडेंस में की गई ये बढ़ोतरी निवेशकों के बीच एक बहुत ही साफ और सकारात्मक संदेश दे रही है कि कंपनी आने वाले समय में भी अच्छी ग्रोथ हासिल करने के लिए पूरी तरह तैयार है.
मिडकैप आईटी शेयरों में भी दिखी रौनक
बड़े शेयरों की इस आंधी का सीधा असर छोटी और मंझोली आईटी कंपनियों पर भी पड़ा. बाजार में सिर्फ दिग्गज ही नहीं बल्कि मिडकैप शेयर भी हरे निशान में कारोबार करते दिखे. एम्फैसिस , एलटीआईएम , कोफोर्ज , परसिस्टेंट सिस्टम्स और ओरेकल फाइनेंशियल सर्विसेज सॉफ्टवेयर जैसे मिडकैप शेयरों में भी एक फीसदी से ज्यादा की अच्छी खासी तेजी दर्ज की गई.
टीसीएस ने अपने नतीजों से बाजार में जो सकारात्मक माहौल बनाना शुरू किया था, उसे एचसीएल टेक के शानदार प्रदर्शन ने एक नई ऊंचाई दे दी. इसके अलावा ग्लोबल मार्केट में एआई ट्रेड में आई हालिया सुस्ती ने भी निवेशकों का ध्यान वापस भारत की पारंपरिक और मजबूत आईटी कंपनियों की तरफ खींच लिया है. बाजार के जानकारों का भी यही मानना है कि जब तक इन कंपनियों की डील पाइपलाइन मजबूत रहेगी और डॉलर का सपोर्ट इन्हें मिलता रहेगा, तब तक आईटी सेक्टर शेयर बाजार को इसी तरह से सहारा देता रहेगा.



