HealthIndiaTrending

क्या घोंघे से मसाज कराने: पर सच में निखरती है त्वचा और कम होता है तनाव? जानिए स्किन रिपेयर, हैप्पी हार्मोन और इससे जुड़े जोखिमों की सच्चाई

क्या घोंघे से मसाज कराने: पर सच में निखरती है त्वचा और कम होता है तनाव? जानिए स्किन रिपेयर, हैप्पी हार्मोन और इससे जुड़े जोखिमों की सच्चाई

ग्लोइंग और जवां त्वचा पाने के लिए दुनियाभर में कई तरह के ब्यूटी ट्रेंड अपनाए जाते हैं। कोरियन स्किन केयर से जुड़े ट्रेंड्स के बीच इन दिनों स्नेल मसाज यानी घोंघे से त्वचा की मसाज को लेकर भी दिलचस्पी देखी जा रही है। इस प्रक्रिया में जीवित घोंघे को चेहरे पर चलने दिया जाता है, जिससे निकलने वाला म्यूकस त्वचा पर फैल जाता है। इसे त्वचा को नमी देने और मुलायम बनाने वाला माना जाता है।

इस ट्रेंड को लेकर कुछ दावे ऐसे भी किए जाते हैं कि घोंघे का हल्का स्पर्श तनाव कम कर सकता है, शरीर में ऑक्सीटोसिन जैसे हार्मोन के स्तर को बढ़ा सकता है और त्वचा के टिश्यू की मरम्मत में मदद कर सकता है। लेकिन इन सभी दावों के लिए वैज्ञानिक प्रमाण एक जैसे मजबूत नहीं हैं। स्नेल म्यूकिन युक्त स्किन केयर प्रोडक्ट्स पर कुछ शुरुआती शोध जरूर हुए हैं, लेकिन जीवित घोंघे से मसाज कराने के फायदे और सुरक्षा को लेकर पर्याप्त उच्च गुणवत्ता वाले अध्ययन उपलब्ध नहीं हैं।

क्या है स्नेल मसाज और यह कैसे की जाती है?

स्नेल मसाज एक ऐसी ब्यूटी प्रक्रिया है, जिसमें प्रशिक्षित व्यक्ति त्वचा पर कुछ समय के लिए जीवित घोंघे को चलने देता है। इस दौरान घोंघे से निकलने वाला चिपचिपा पदार्थ, जिसे म्यूकस या म्यूकिन कहा जाता है, त्वचा पर लग जाता है।

इस प्रक्रिया का उद्देश्य त्वचा को नम और मुलायम बनाना बताया जाता है। हालांकि, जीवित घोंघे से मसाज कराना और स्नेल म्यूकिन से बना कॉस्मेटिक उत्पाद इस्तेमाल करना दो अलग-अलग चीजें हैं। किसी क्रीम या सीरम में मौजूद शुद्ध और प्रोसेस किए गए स्नेल सेक्रेशन के संभावित लाभों को सीधे जीवित घोंघे से मसाज के लाभों का प्रमाण नहीं माना जा सकता।

स्नेल म्यूकिन में कौन-से तत्व पाए जाते हैं?

स्नेल सेक्रेशन फिल्ट्रेट (Snail Secretion Filtrate) का इस्तेमाल कुछ स्किन केयर उत्पादों में किया जाता है। इसकी संरचना घोंघे की प्रजाति और उत्पाद को तैयार करने की प्रक्रिया के अनुसार अलग हो सकती है। इसमें विभिन्न प्रकार के म्यूसिन, प्रोटीन और दूसरे जैविक घटक पाए जा सकते हैं।

कुछ उत्पादों में त्वचा की देखभाल से जुड़े ऐसे घटक होते हैं, जो नमी बनाए रखने में मदद कर सकते हैं। हालांकि, किसी घटक की मौजूदगी अपने आप यह साबित नहीं करती कि वह त्वचा की हर समस्या को ठीक कर सकता है।

स्नेल म्यूकिन से जुड़े संभावित फायदे इस प्रकार बताए जाते हैं:

  • त्वचा को नमी देना: कुछ स्नेल म्यूकिन उत्पाद त्वचा में नमी बनाए रखने में मदद कर सकते हैं।
  • त्वचा को मुलायम बनाना: मॉइस्चराइजिंग प्रभाव के कारण त्वचा अस्थायी रूप से अधिक स्मूद महसूस हो सकती है।
  • त्वचा की बाहरी परत को सहारा देना: कुछ कॉस्मेटिक फॉर्मूलेशन त्वचा की नमी बनाए रखने में मदद कर सकते हैं।
  • फाइन लाइन्स कम दिखाई देना: त्वचा में नमी बढ़ने से बारीक रेखाएं कुछ समय के लिए कम स्पष्ट दिख सकती हैं।

लेकिन इन प्रभावों का मतलब यह नहीं है कि स्नेल म्यूकिन निश्चित रूप से कोलेजन बढ़ाता है, गहरे निशान मिटाता है या त्वचा की क्षतिग्रस्त कोशिकाओं को तेजी से ठीक कर देता है।

क्या स्नेल मसाज से त्वचा के टिश्यू रिपेयर होते हैं?

त्वचा की मरम्मत एक जटिल जैविक प्रक्रिया है, जिसमें त्वचा की बाहरी परत, कोशिकाएं और कोलेजन जैसे संरचनात्मक प्रोटीन महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। स्नेल म्यूकिन में मौजूद कुछ घटकों को लेकर प्रयोगशाला और शुरुआती शोध में संभावित लाभों का अध्ययन किया गया है।

हालांकि, प्रयोगशाला में किसी घटक का उपयोगी दिखाई देना और वास्तविक लोगों की त्वचा पर उसका सुरक्षित एवं प्रभावी साबित होना अलग-अलग बातें हैं। अभी यह कहने के लिए पर्याप्त प्रमाण नहीं हैं कि जीवित घोंघे से मसाज कराने से त्वचा के टिश्यू की मरम्मत तेज होती है या घाव जल्दी भरते हैं।

अगर त्वचा पर घाव, संक्रमण, गंभीर मुंहासे या सूजन है, तो स्नेल मसाज को इलाज के विकल्प के रूप में इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। ऐसी स्थिति में त्वचा विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहतर है।

क्या घोंघे से मसाज कराने पर बढ़ते हैं हैप्पी हार्मोन?

ऑक्सीटोसिन को अक्सर ‘हैप्पी हार्मोन’ कहा जाता है, हालांकि शरीर में इसकी भूमिका इससे कहीं अधिक जटिल है। यह सामाजिक जुड़ाव और कुछ प्रकार की भावनात्मक प्रतिक्रियाओं से जुड़ा होता है। दूसरी ओर, कोर्टिसोल शरीर की तनाव प्रतिक्रिया में भूमिका निभाने वाला हार्मोन है।

हल्का स्पर्श, आरामदायक माहौल और कुछ प्रकार की मसाज लोगों को शांत महसूस कराने में मदद कर सकती हैं। लेकिन इससे यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि घोंघे की त्वचा पर होने वाली हलचल से ऑक्सीटोसिन निश्चित रूप से बढ़ता है या कोर्टिसोल घटता है।

विशेष रूप से स्नेल मसाज के दौरान हार्मोन में होने वाले बदलावों और तनाव कम करने के प्रभाव को साबित करने के लिए पर्याप्त विश्वसनीय वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं। इसलिए इसे तनाव या एंग्जायटी का प्रमाणित उपचार मानना सही नहीं होगा।

क्या स्नेल मसाज से झुर्रियां और मुंहासों के निशान कम हो सकते हैं?

स्नेल म्यूकिन वाले कुछ उत्पादों को एंटी-एजिंग और त्वचा की नमी से जुड़े फायदों के लिए बेचा जाता है। त्वचा में पर्याप्त नमी होने पर उसकी सतह अधिक मुलायम दिख सकती है, जिससे बारीक रेखाएं कुछ कम नजर आ सकती हैं।

लेकिन गहरी झुर्रियों, पुराने मुंहासों के गड्ढों, गहरे दाग-धब्बों या त्वचा की गंभीर क्षति को ठीक करने के लिए स्नेल मसाज की प्रभावशीलता स्थापित नहीं हुई है। ऐसे परिणामों के लिए त्वचा की समस्या के अनुसार अलग उपचार की जरूरत हो सकती है।

त्वचा की देखभाल के लिए नियमित मॉइस्चराइजर, रोजाना ब्रॉड-स्पेक्ट्रम सनस्क्रीन और त्वचा के प्रकार के अनुसार चुने गए उत्पाद अधिक व्यावहारिक विकल्प हैं।

स्नेल मसाज के क्या जोखिम हो सकते हैं?

जीवित घोंघे को सीधे चेहरे पर चलने देने में कुछ जोखिम हो सकते हैं, खासकर जब घोंघे की प्रजाति, उसकी देखभाल और स्वच्छता की स्थिति स्पष्ट न हो।

1. एलर्जी और त्वचा में जलन: घोंघे के म्यूकस या इस्तेमाल किए जाने वाले उत्पाद के किसी घटक से कुछ लोगों को खुजली, लालिमा, जलन या एलर्जी हो सकती है।

2. संक्रमण का जोखिम: जीवित घोंघे और उनके आसपास की सतहों पर मौजूद सूक्ष्मजीव त्वचा के संपर्क में आ सकते हैं। जोखिम का स्तर परिस्थितियों पर निर्भर करता है, लेकिन केवल किसी स्पा या क्लीनिक में प्रक्रिया कराने से संक्रमण का खतरा पूरी तरह समाप्त नहीं हो जाता।

3. संवेदनशील या क्षतिग्रस्त त्वचा पर परेशानी: जिन लोगों की त्वचा पर घाव, सक्रिय संक्रमण, सूजन या एक्जिमा जैसी समस्या है, उनके लिए ऐसी प्रक्रिया अधिक जोखिमपूर्ण हो सकती है।

4. परिणामों को लेकर अनिश्चितता: हर व्यक्ति की त्वचा अलग होती है और जीवित घोंघे से मसाज कराने के लाभों तथा दीर्घकालिक सुरक्षा के बारे में पर्याप्त प्रमाण नहीं हैं।

विशेष रूप से बगीचे या खुले वातावरण में मिलने वाले घोंघों को चेहरे पर इस्तेमाल करने से बचना चाहिए। उनमें परजीवी या अन्य रोग पैदा करने वाले जीव हो सकते हैं। साफ-सफाई का ध्यान रखने पर भी जीवित घोंघे के इस्तेमाल को पूरी तरह जोखिम-मुक्त नहीं माना जा सकता।

क्या स्नेल म्यूकिन वाली क्रीम इस्तेमाल करना बेहतर विकल्प है?

यदि आप इस ट्रेंड के कारण स्नेल म्यूकिन आजमाना चाहते हैं, तो जीवित घोंघे से मसाज कराने के बजाय किसी विश्वसनीय निर्माता का कॉस्मेटिक उत्पाद चुनना तुलनात्मक रूप से अधिक व्यावहारिक हो सकता है। फिर भी उत्पाद की गुणवत्ता, उसके दूसरे घटकों और आपकी त्वचा की संवेदनशीलता का ध्यान रखना जरूरी है।

उत्पाद इस्तेमाल करने से पहले उसकी सामग्री पढ़ें और सीमित हिस्से पर पैच टेस्ट करें। ध्यान रहे कि पैच टेस्ट से हर तरह की एलर्जी या प्रतिक्रिया का पता नहीं चलता। जलन, खुजली या लालिमा होने पर इस्तेमाल बंद कर दें।

अगर आपकी त्वचा बहुत संवेदनशील है, आपको पहले से एलर्जी की समस्या है या त्वचा पर कोई

contact.satyareport@gmail.com

Leave a Reply