BusinessIndia

​$15 बिलियन के मुकदमे पर बीओबी का करारा जवाब! बैंक बोला- ‘नहीं मिला कोई समन, कोर्ट में लड़ेंगे जंग’

बैंक ऑफ बड़ौदा ने बुधवार को कहा कि वह बॉम्बे हाई कोर्ट में NMC के फाउंडर BR शेट्टी द्वारा दायर मुकदमे का मजबूती से बचाव करेगा. शेट्टी ने ग्रुप की कंपनियों से जुड़े कथित धोखाधड़ी के मामले में 15 बिलियन डॉलर के हर्जाने की मांग की है. बयान में कहा गया है कि बैंक मुकदमे का मजबूती से बचाव करेगा और अपने हितों की रक्षा के लिए सभी जरूरी कदम उठाएगा. सरकारी बैंक ने कहा कि उसे अभी तक मुकदमे की सूचना नहीं मिली है और वह उन दावों पर कोई टिप्पणी नहीं कर सकता जिनकी अदालत में अभी तक जांच नहीं हुई है.

​ बिलियन के मुकदमे पर बीओबी का करारा जवाब! बैंक बोला- ‘नहीं मिला कोई समन, कोर्ट में लड़ेंगे जंग’

एक बयान में, बैंक ऑफ बड़ौदा ने कहा कि मीडिया रिपोर्टों में बताए गए मामले अबू धाबी ग्लोबल मार्केट कोर्ट में चल रही कार्यवाही का भी हिस्सा थे. वहां धोखाधड़ी, गलत तरीके से ट्रेडिंग और धोखाधड़ी वाली ट्रेडिंग के आरोपों से जुड़ी कार्यवाही में शेट्टी और NMC हेल्थकेयर के पूर्व CEO प्रशांत मंगहट के खिलाफ फैसला सुरक्षित रखा गया था. बैंक ने कहा कि NMC ग्रुप के जॉइंट एडमिनिस्ट्रेटर्स के साथ समझौते के बाद उसके खिलाफ ADGM की कार्यवाही बंद कर दी गई थी.

एक्शन में बैंक ऑफ बड़ौदा

बैंक ऑफ बड़ौदा ने कहा कि वह बकाया रकम की वसूली और उसे लागू कराने के लिए भारत और UAE में शेट्टी के खिलाफ अलग से कार्यवाही कर रहा है. बैंक ने कहा कि बैंक खुद डॉ. शेट्टी से लगभग 2,800 करोड़ रुपए की बकाया रकम की वसूली और उसे लागू कराने की कार्यवाही कर रहा है और उनके खिलाफ कई आदेश हासिल कर चुका है. बैंक ने यह भी कहा कि कर्नाटक हाई कोर्ट ने 2021 में शेट्टी को अपनी संपत्ति का लेनदेन करने या उसे किसी और को ट्रांसफर करने से रोक दिया था.

बयान के अनुसार, नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल के सामने बाद की कार्यवाही में, शेट्टी ने दावा किया था कि वह दिवालिया हो गए हैं और बैंक का बकाया चुकाने में असमर्थ हैं. बैंक ने आगे कहा कि शेट्टी ने पहले न्यूयॉर्क राज्य की सुप्रीम कोर्ट में भी उसके खिलाफ मुकदमा दायर किया था, जिसमें बॉम्बे हाई कोर्ट के मामले से जुड़े आरोपों जैसे ही आरोप लगाए गए थे. वह मुकदमा जुलाई 2024 में खारिज कर दिया गया था.

लगाए बड़ेबड़े आरोप

बॉम्बे हाई कोर्ट में दायर अपने मुकदमे में, शेट्टी ने सीधे नुकसान, परिणामी नुकसान और कथित तौर पर प्रतिष्ठा को हुए नुकसान के लिए 55 बिलियन डॉलर के हर्जाने की मांग की है, जिससे कुल दावा 15 बिलियन डॉलर या लगभग 1.44 लाख करोड़ रुपए हो जाता है. शिकायत में आरोप लगाया गया है कि बैंक और उसके कुछ अधिकारियों ने NMC ग्रुप की कंपनियों से जुड़े फंड को दूसरी जगह भेजने में मदद की. इसमें बैंक के उस भरोसे को भी चुनौती दी गई है जो उसने पर्सनल गारंटी और दूसरे ऐसे डॉक्यूमेंट्स पर जताया है, जिन पर शेट्टी का दावा है कि जाली साइन हैं. कोर्ट में ये आरोप अभी साबित नहीं हुए हैं.

शेट्टी ने और क्या की शिकायत?

शिकायत में बैंक ऑफ बड़ौदा और NMC ग्रुप की कंपनियों के जॉइंट एडमिनिस्ट्रेटर्स के बीच हुए सेटलमेंट का भी जिक्र है. शेट्टी की फाइलिंग के मुताबिक, बैंक ने जुलाई 2026 में बताए गए एक सेटलमेंट के तहत लगभग 600 मिलियन डॉलर देने पर सहमति जताई थी, जिसमें उसने अपनी कोई जिम्मेदारी स्वीकार नहीं की थी. शेट्टी का तर्क है कि वह इस सेटलमेंट का हिस्सा नहीं थे और इससे उनके अलग दावों पर कोई असर नहीं पड़ता.

शेट्टी ने बैंकिंग रिकॉर्ड्स का खुलासा करने, इलेक्ट्रॉनिक सबूतों को सुरक्षित रखने और भारत में कुछ एसेट्स से जुड़े अंतरिम उपायों की भी मांग की है. ये मांगें वादी ने की हैं और इन्हें कोर्ट द्वारा दिए गए आदेश नहीं माना जाना चाहिए. बैंक ऑफ बड़ौदा ने कहा है कि वह अपनी कानूनी रणनीति पर काम करना जारी रखेगा और अपने हितों की रक्षा के लिए सभी जरूरी कदम उठाएगा.

contact.satyareport@gmail.com

Leave a Reply