आईडीबीआई बैंक के शेयर में बुधवार को करीब नौ प्रतिशत की तेजी आई. इससे कंपनी के बाजार पूंजीकरण में 8,086 करोड़ रुपये से अधिक का इजाफा हुआ. इस दौरान घरेलू शेयर बाजार में कुल मिलाकर गिरावट का रुख रहा. बाजार बंद होने के बाद बुधवार को बताया गया कि केंद्रीय मंत्रिमंडल ने आईडीबीआई बैंक में 60.72 प्रतिशत हिस्सेदारी फेयरफैक्स फाइनेंशियल होल्डिंग्स को 52,878 करोड़ रुपये में बेचने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है. एयर इंडिया की बिक्री के बाद यह देश का सबसे बड़ा रणनीतिक विनिवेश है. इस सौदे से सरकारी नियंत्रण वाले बैंकों के निजीकरण की प्रक्रिया को भी नयी दिशा मिलने की संभावना है. वैसे आईडीबीआई बैंक के शेयरों में जबरदस्त तेजी देखने को मिली है.

रॉकेट हुए शेयर, वैल्यूएशन बढ़ी
बीएसई पर आईडीबीआई बैंक का शेयर 9.07 प्रतिशत उछलकर 90.44 रुपये पर रहा. कारोबार के दौरान यह 12.90 प्रतिशत चढ़कर 93.62 रुपये तक पहुंच गया था. एनएसई पर बैंक का शेयर 8.98 प्रतिशत की बढ़त के साथ 90.39 रुपये पर बंद हुआ. बैंक का बाजार पूंजीकरण 8,085.82 करोड़ रुपये बढ़कर 97,244.73 करोड़ रुपये हो गया. इस बीच, बीएसई का 30 शेयरों वाला मानक सूचकांक सेंसेक्स 251.89 अंक यानी 0.34 प्रतिशत गिरकर 72,781.89 अंक पर बंद हुआ. वहीं, एनएसई का 50 शेयरों वाला मानक सूचकांक निफ्टी 99.25 अंक यानी 0.44 प्रतिशत टूटकर 22,622.70 अंक पर बंद हुआ.
इस कंपनी के साथ होगी डील
कनाडा की फेयरफैक्स फाइनेंशियल होल्डिंग्स करीब 53,000 करोड़ रुपए में आईडीबीआई बैंक में 60.72 प्रतिशत हिस्सेदारी का अधिग्रहण करेगी. यह किसी भारतीय बैंक में अबतक का सबसे बड़ा विदेशी निवेश होगा. साथ ही यह देश में बहुप्रतीक्षित बैंक क्षेत्र के निजीकरण की प्रक्रिया में एक महत्वपूर्ण पड़ाव है. मंत्रिमंडल की आर्थिक मामलों की समिति ने फेयरफैक्स की अनुषंगी कंपनी मेसर्स 10955230 कनाडा इंक को रणनीतिक खरीदार के रूप में मंजूरी दी. यह कंपनी सरकार की 30.48 प्रतिशत हिस्सेदारी करीब 26,620 करोड़ रुपये में और सार्वजनिक क्षेत्र की भारतीय जीवन बीमा निगम की 30.24 प्रतिशत हिस्सेदारी करीब 26,440 करोड़ रुपए में खरीदेगी. एक आधिकारिक बयान के अनुसार, कनाडा के उद्योगपति प्रेम वत्स के नेतृत्व वाली फेयरफैक्स प्रति शेयर 81 रुपये का भुगतान करेगी. यह दो स्वतंत्र मूल्यांकन एजेंसियों द्वारा निर्धारित 75.99 रुपये प्रति शेयर के उचित मूल्य से अधिक है.
2022 में शुरू हुआ था प्रोसेस
बैंक क्षेत्र का यह सबसे बड़ा सौदा आईडीबीआई बैंक के निजीकरण और वाणिज्यिक उद्यमों में सरकारी हिस्सेदारी घटाने के काफी समय से लंबित प्रयासों में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है. हिस्सेदारी बिक्री की प्रक्रिया 2022 में शुरू हुई थी. इस साल की शुरुआत में वित्तीय बोलियां आरक्षित मूल्य से कम रहने के बाद सरकार ने बिक्री प्रक्रिया रोक दी थी. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इस सौदे को एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताते हुए कहा कि सरकार ने बैंक को वित्तीय संकट से उबारने में मदद की और अल्पांश हिस्सेदारी बरकरार रखते हुए अब प्रस्तावित पुनर्गठन के माध्यम से उसकी वृद्धि के अगले चरण को गति दे रही है. वित्त मंत्री ने कहा कि इस कदम से भारत की बैंकिंग व्यवस्था मजबूत होगी और बैंक सेवाओं को वैश्विक मानकों के अनुरूप बनाने में मदद मिलेगी. यह इस बात की पुष्टि करता है कि भारत की वृद्धि गाथा मजबूत है, उसकी अर्थव्यवस्था में चुनौतियों से उबरने की क्षमता है और सुधारों के प्रति सरकार प्रतिबद्ध है.



