Gold Price Forecast: दुनिया भर के बड़े निवेशक और इस इंडस्ट्री के दिग्गज मान रहे हैं कि आने वाले 24 महीनों के भीतर सोने की कीमतें एक नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच सकती हैं. फाइनेंशियल टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक दुनिया के केंद्रीय बैंकों ने सोने की खरीदारी बढ़ा दी है. इसके साथ ही सरकारी कर्ज को लेकर बढ़ती चिंता, देशों के बीच तनाव और अमेरिकी डॉलर के दबदबे से जुड़े सवालों की वजह से इस कीमती धातु की मांग को लगातार सहारा मिल रहा है. सोने में बड़ी तेजी का ये अनुमान ऐसे वक्त में आया है जब हाल ही में इसके दाम थोड़े गिरे हैं. बुधवार को सोना 2 प्रतिशत टूटकर 4,075 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस पर आ गया. ये गिरावट इस उम्मीद के बीच आई कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व एक बार फिर ब्याज दरें बढ़ा सकता है. हालांकि अगले दिन गुरूवार को अंतरराष्ट्रीय बाजार और वायदा बाजार में थोडी रिकवरी देखी गई.

इससे पहले जनवरी में सोना 5,500 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस से ज्यादा के रिकॉर्ड स्तर तक उछल गया था, जिसके बाद इसमें गिरावट आई. उस गिरावट के बावजूद सोने के दाम ऐतिहासिक रूप से काफी ऊंचे स्तर पर बने हुए हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, फंड मैनेजर्स को उम्मीद है कि सोने में फिर से तेजी आएगी, क्योंकि आर्थिक और वित्तीय बाजार की बढ़ती अनिश्चितता के बीच निवेशक सुरक्षित निवेश का सहारा ढूंढ रहे हैं.
अमीर परिवार क्यों बेच रहे हैं सरकारी बॉन्ड
माइनिंग कंपनी एलाइड गोल्ड के चेयरमैन व चीफ एग्जीक्यूटिव पीटर मैरोन ने न्यूज आउटलेट को बताया कि निवेशकों को इस बात पर विचार करना चाहिए कि क्या दुनिया भर के बाजार किसी बड़ी वित्तीय रुकावट की तरफ बढ़ रहे हैं. पीटर मैरोन ने कहा कि जैसेजैसे आर्थिक अनिश्चितता तेज हो रही है, अमीर परिवारों का निवेश संभालने वाले फैमिली ऑफिस तेजी से सोने की तरफ रुख कर रहे हैं. इनमें से कुछ निवेशक सोने के लिए सरकारी बॉन्ड में अपना निवेश कम कर रहे हैं.
इसी तरह सोना उत्पादक कंपनी एंडेवर माइनिंग के चीफ एग्जीक्यूटिव इयान कॉकरिल ने भी कागजी करेंसी को लेकर चिंता, आर्थिक अस्थिरता और केंद्रीय बैंकों द्वारा अपने खजाने की वैल्यू बचाने की कोशिशों को सोने के दाम को सहारा देने वाला कारण बताया. कॉकरिल ने सुझाव दिया कि सोने की अगली संभावित तेजी से पहले 4,000 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस का भाव सबसे निचले स्तर यानी प्राइस फ्लोर के करीब हो सकता है. हालांकि उन्होंने ये सावधानी भी जताई कि ये स्तर पक्का टिकेगा ही, ऐसा निश्चित नहीं है.
कागज के नोटों से ज्यादा सोने पर क्यों है भरोसा
ट्रॉय एसेट मैनेजमेंट की फंड मैनेजर शार्लोट योंग ने बुधवार को फाइनेंशियल टाइम्स के प्रेशियस मेटल्स सिम्पोजियम में बताया कि सोना 12 से 18 महीनों के अंदर नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच सकता है. योंग सोने को सरकारों की बिगड़ती वित्तीय हालत, खासकर अमेरिका के बढ़ते कर्ज के खिलाफ एक बचाव के रूप में देखती हैं. उन्होंने इस संभावना की तरफ भी इशारा किया कि भविष्य में किसी मंदी के दौरान केंद्रीय बैंक पैसे की सप्लाई बढ़ा सकते हैं, जिससे करेंसी पर लोगों का भरोसा कमजोर हो सकता है. उन्होंने कहा कि कागजी करेंसी के उलट सोने को पैसे की सप्लाई बढ़ाकर नहीं बनाया जा सकता. यही बात अपनी दौलत को सुरक्षित रखने की तलाश कर रहे निवेशकों के लिए सोने को आकर्षक बनाती है.
अमेरिकी डॉलर से दूरी बना रहे हैं कई देश
एऑन इन्वेस्टमेंट्स में यूरोप, मिडिल ईस्ट व अफ्रीका के डेलीगेटेड चीफ इन्वेस्टमेंट ऑफिसर पॉल कार्न को भी उम्मीद है कि सोना दो साल के भीतर नए शिखर पर पहुंच जाएगा. पॉल कार्न ने अमेरिका की नीतियों और डॉलर को एक भूराजनीतिक हथियार के तौर पर इस्तेमाल किए जाने को ऐसे कारण बताया, जो दूसरे देशों को अमेरिकी करेंसी का विकल्प खोजने के लिए प्रेरित कर सकते हैं. उन्होंने कहा कि अगर सरकारें और वित्तीय संस्थान डॉलर पर निर्भर रहने के लिए कम तैयार होते हैं, तो इससे सोने को फायदा हो सकता है.
बड़े बैंकों के साथ चीन ने भी भरा अपना खजाना
केंद्रीय बैंक सोने की मांग का एक अहम जरिया बने हुए हैं, जहां उभरते बाजारों के संस्थान अपने रिजर्व को अमेरिकी डॉलर से अलग रखकर उसमें विविधता लाना चाहते हैं. वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के शुरुआती आंकड़ों के अनुसार सितंबर में केंद्रीय बैंकों की सोने की खरीदारी नवंबर 2024 के बाद के सबसे ऊंचे मासिक स्तर पर पहुंच गई. इसमें अब तक करीब 63 टन की खरीदारी दिख रही है. ये आंकड़े केंद्रीय बैंक और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के डेटा का इस्तेमाल करके तैयार किए गए हैं.
चीन ने भी हाल के महीनों में अपने सोने के भंडार में इजाफा करना जारी रखा है. फाइनेंशियल टाइम्स द्वारा दिए गए वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के आंकड़ों के मुताबिक पीपुल्स बैंक ऑफ चाइना का सोने का भंडार लगभग 2,410 टन है, जो उसके कुल रिजर्व के करीब 9 प्रतिशत के बराबर है.



