CrimeIndiaTrending

माली की नौकरी से अपराध की दुनिया; तक पहुंचा टिंकू कपाला, एनकाउंटर के बाद पिता ने शव लेने से क्यों किया था इनकार?

माली की नौकरी से अपराध की दुनिया; तक पहुंचा टिंकू कपाला, एनकाउंटर के बाद पिता ने शव लेने से क्यों किया था इनकार?

लखनऊ: एक पिता ने अपने बेटे के बेहतर भविष्य के लिए नौकरी का इंतजाम किया था, ताकि वह मेहनत करके परिवार का सहारा बन सके। लेकिन शराब और नशे की कथित लत ने उसकी जिंदगी को ऐसी दिशा में मोड़ दिया कि वह धीरे-धीरे अपराध की दुनिया में पहुंच गया। यह कहानी टिंकू कपाला उर्फ कमल किशोर की है, जिसका नाम पुलिस रिकॉर्ड में कई गंभीर मामलों से जुड़ा बताया गया। साल 2020 में पुलिस मुठभेड़ में उसकी मौत हुई, लेकिन इसके बाद जो हुआ, उसने लोगों का ध्यान खींचा। उसके पिता ने शुरुआत में बेटे का शव लेने से ही इनकार कर दिया था।

माली की नौकरी मिली, लेकिन विवादों में घिरने लगा टिंकू

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, टिंकू कपाला को वर्ष 1990 में जल संस्थान में माली की नौकरी मिली थी। नौकरी स्थायी होने के बाद परिवार को उम्मीद थी कि वह अपनी जिंदगी संभाल लेगा और घर की जिम्मेदारियां उठाएगा। मगर उसके पिता तिलकराम श्रीवास्तव के अनुसार, टिंकू को शराब पीने और विवाद करने की आदत पड़ गई थी।

एक बार वेतन लेने के दौरान उसका कार्यालय के एक कर्मचारी से झगड़ा हो गया और मारपीट की नौबत आ गई। पिता को जब इसकी जानकारी मिली तो उन्होंने मौके पर पहुंचकर मामला शांत कराया। इसी दौरान उन्हें बेटे की नशे की आदत के बारे में भी पता चला।

बताया जाता है कि इसके बाद टिंकू की मुश्किलें बढ़ती गईं। पुलिस का घर आना-जाना शुरू हो गया और वह धीरे-धीरे परिवार से दूर होने लगा। बाद में उसकी नौकरी भी छूट गई। बेटे की गतिविधियों से परेशान होकर पिता ने उससे दूरी बना ली।

शादी के बाद भी नहीं बदले हालात

परिवार को उम्मीद थी कि शादी के बाद टिंकू की जिंदगी में बदलाव आएगा। वर्ष 1997 में उसकी शादी पूनम से कराई गई, लेकिन पारिवारिक जीवन भी ठीक नहीं चल सका। रिपोर्ट्स के अनुसार, पति-पत्नी के बीच अक्सर विवाद होते थे और मारपीट की शिकायतें भी सामने आईं।

बच्चे के जन्म के समय भी टिंकू के अस्पताल नहीं पहुंचने की बात कही गई है। बाद में उसकी पत्नी उससे अलग हो गई और अपने बेटे के साथ रहने लगी। इस बीच टिंकू का नाम कथित तौर पर आपराधिक गतिविधियों में सामने आता रहा।

कई राज्यों में वारदातों से जुड़ा नाम

पुलिस रिकॉर्ड के हवाले से प्रकाशित रिपोर्टों में बताया गया कि टिंकू के खिलाफ हत्या, लूट, डकैती, हत्या के प्रयास और आर्म्स एक्ट सहित कई गंभीर धाराओं में मामले दर्ज थे। उसके खिलाफ करीब 27 मुकदमों का जिक्र किया गया है।

बताया जाता है कि उत्तर प्रदेश के अलावा गुजरात और महाराष्ट्र में भी लूट व डकैती की वारदातों में उसका नाम सामने आया था। वह अलग-अलग नामों से भी पहचाना जाता था। इनमें कमल किशोर, टिंकू, कपाला, हेमंत, संजय और मामा जैसे नाम शामिल बताए गए।

वर्ष 2019 में कृष्णानगर स्थित आरके ज्वैलर्स में डकैती के दौरान दो लोगों की हत्या के मामले में भी उसका नाम सामने आया था। रिपोर्ट के मुताबिक, उस पर एक लाख रुपये का इनाम घोषित किया गया था।

24 जुलाई 2020 को पुलिस मुठभेड़ में हुई मौत

लंबे समय तक पुलिस की गिरफ्त से बाहर रहने के बाद टिंकू कपाला 24 जुलाई 2020 की देर रात बाराबंकी जिले के सतरिख इलाके में विशेष कार्य बल (STF) की कार्रवाई के दौरान घिर गया। प्रकाशित रिपोर्टों के अनुसार, मुठभेड़ के दौरान फायरिंग हुई और जवाबी कार्रवाई में टिंकू को गोली लगी।

उसे उपचार के लिए अस्पताल ले जाया गया, जहां उसकी मौत हो गई। इस घटना के बाद पुलिस उसके शव को परिवार को सौंपने की प्रक्रिया के लिए घर पहुंची।

बेटे का शव लेने से पिता ने क्यों किया इनकार?

इस मामले का सबसे भावुक पहलू टिंकू के पिता का रुख था। रिपोर्ट के मुताबिक, तिलकराम श्रीवास्तव ने शुरुआत में बेटे का शव लेने से इनकार कर दिया। उनका कहना था कि बेटे की हरकतों से परिवार लंबे समय से परेशान था और वे पहले ही उससे अपना रिश्ता खत्म कर चुके थे।

बताया गया कि टिंकू की वजह से पुलिस को बार-बार घर आना पड़ता था और परिवार को भी परेशानियों का सामना करना पड़ता था। पिता अपने बेटे की जिंदगी और उसके फैसलों से इतने दुखी थे कि उन्होंने उसकी मौत के बाद भी उससे जुड़ाव जताने से इनकार कर दिया।

हालांकि, बाद में पुलिस उन्हें चौक थाने और फिर बाराबंकी ले गई। रिपोर्टों के अनुसार, इसके बाद शव परिवार को सौंपा गया और अंतिम संस्कार किया गया।

एक परिवार की उम्मीदों के टूटने की कहानी

टिंकू कपाला की कहानी सिर्फ एक कथित अपराधी के पुलिस मुठभेड़ में मारे जाने तक सीमित नहीं है। यह उस परिवार की कहानी भी है, जिसने बेटे के लिए नौकरी और बेहतर भविष्य की उम्मीद की थी, लेकिन समय के साथ रिश्तों में दूरी बढ़ती चली गई। नशे की आदत, पारिवारिक विवाद और गंभीर आपराधिक मामलों से जुड़े आरोपों ने उसके जीवन को किस मोड़ पर पहुंचा दिया, इसका अंदाजा पिता के उस फैसले से लगाया जा सकता है, जब उन्होंने शुरुआत में बेटे का शव लेने से भी इनकार कर दिया था।

डिस्क्लेमर: यह लेख उपलब्ध मीडिया रिपोर्टों में प्रकाशित जानकारी पर आधारित है। आपराधिक मामलों से जुड़े आरोपों और विवरणों को संबंधित रिपोर्टों के संदर्भ में प्रस्तुत किया गया है।

#TinkuKapala #LucknowCrime #CrimeStory #UttarPradeshNews #SatyaReport

contact.satyareport@gmail.com

Leave a Reply