
लंदन: ब्रिटेन में 18 वर्षीय छात्र हेनरी नोवाक की हत्या के मामले में दोषी ठहराए गए युवक की मां किरण कौर को भारत वापस भेजा जा सकता है। भारतीय मूल की किरण को अपने बेटे के अपराध के बाद हथियार छिपाने और जांच से जुड़े साक्ष्य मिटाने में मदद करने के मामले में तीन साल की जेल की सजा सुनाई गई थी। अब ब्रिटेन सरकार की विदेशी अपराधियों को उनके देश वापस भेजने की नीति के तहत उनकी रिहाई और निर्वासन पर विचार किया जा रहा है।
मामले में एक अहम कानूनी मोड़ यह है कि किरण कौर और उनके बेटे, दोनों ने अपनी सजा के खिलाफ अपील की है। ऐसे में उनकी आगे की कानूनी स्थिति अदालत में होने वाली सुनवाई और संबंधित अधिकारियों के फैसलों पर निर्भर करेगी।
बेटे की हत्या के बाद मां पर अपराध छिपाने का आरोप
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, यह घटना 3 दिसंबर 2025 को ब्रिटेन के साउथेम्प्टन में हुई थी। भारतीय मूल के ब्रिटिश सिख युवक ने 18 वर्षीय हेनरी नोवाक की चाकू मारकर हत्या कर दी थी। इस मामले में युवक को दोषी ठहराया गया और वह उम्रकैद की सजा काट रहा है।
जांच में सामने आए आरोपों के मुताबिक, युवक की मां किरण कौर ने हत्या के बाद अपराध से जुड़े हथियार को छिपाने में मदद की थी। बताया गया कि वह चाकू को अपने घर ले गई थीं। इसी भूमिका के लिए उन्हें भी कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ा और जुलाई 2026 में तीन साल की जेल की सजा सुनाई गई।
जेल से जल्दी रिहाई और भारत वापसी की संभावना
ब्रिटेन में जेलों पर बढ़ते दबाव को कम करने के लिए बनाई गई सरकारी योजनाओं के संदर्भ में किरण कौर की संभावित समयपूर्व रिहाई और भारत वापसी का मामला सामने आया है। हालांकि, उपलब्ध रिपोर्ट के आधार पर यह कहना सही नहीं होगा कि उनकी रिहाई या निर्वासन की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है।
ब्रिटेन के गृह मंत्रालय ने विदेशी नागरिकों के अपराधों से जुड़े मामलों पर सामान्य रुख स्पष्ट करते हुए कहा है कि विदेशी अपराधियों को कानूनी रूप से संभव होने पर उनके देश वापस भेजने की कोशिश की जाती है। मंत्रालय ने हेनरी नोवाक के परिवार और दोस्तों के प्रति संवेदना भी व्यक्त की।
विदेशी अपराधियों को वापस भेजने का क्या है नियम?
ब्रिटेन में आम तौर पर 12 महीने या उससे अधिक की जेल की सजा पाने वाले विदेशी नागरिकों को निर्वासन के लिए विचाराधीन रखा जा सकता है। हालांकि, हर मामले में परिस्थितियां अलग होती हैं और कुछ कानूनी अपवाद भी लागू हो सकते हैं। निर्वासन के फैसले को चुनौती देने के लिए अपील का रास्ता भी उपलब्ध हो सकता है।
इसलिए किरण कौर की संभावित भारत वापसी केवल सजा की अवधि पर निर्भर नहीं करेगी। उनकी अपील, संबंधित कानूनी प्रावधानों और गृह मंत्रालय की प्रक्रिया का भी इसमें महत्व होगा।
मां और बेटे ने सजा के खिलाफ दायर की अपील
रिपोर्ट के मुताबिक, किरण कौर ने अपनी तीन साल की सजा के खिलाफ अपील की है। इस मामले में ब्रिटेन की कोर्ट ऑफ अपील में 5 नवंबर को सुनवाई निर्धारित होने की जानकारी दी गई है।
उनके बेटे ने भी उम्रकैद की सजा को चुनौती दी है और उसे अपील करने की अनुमति मिल चुकी है। उसकी अपील पर भी उसी तारीख को सुनवाई होने की बात रिपोर्ट में कही गई है।
अब दोनों की अपीलों पर अदालत का रुख और किरण कौर के निर्वासन से जुड़ी सरकारी प्रक्रिया आगे की स्थिति स्पष्ट करेगी। फिलहाल, भारत वापसी की संभावना को अंतिम निर्णय के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
सत्यम रिपोर्ट का अस्वीकरण: यह समाचार उपलब्ध मीडिया रिपोर्टों पर आधारित है। संभावित रिहाई और भारत वापसी से संबंधित प्रक्रिया अभी कानूनी निर्णयों के अधीन हो सकती है। मामले की अंतिम स्थिति संबंधित अदालतों और ब्रिटेन के अधिकारियों के निर्णयों से स्पष्ट होगी।



