
जालंधर, पंजाब: शहर के चौराहों पर भीख मांगने वाले लोगों से कथित तौर पर रोजाना पैसे वसूलने का मामला सामने आया है। एक सोशल मीडिया पोस्ट में दावा किया गया है कि कुछ लोग चौराहों पर जगह दिलाने के बदले भीख मांगने वालों से प्रतिदिन एक हजार रुपये तक लेते हैं। पोस्ट में एक ऐसे व्यक्ति का जिक्र है, जो महिलाओं के कपड़े पहनकर पैसे मांगता है और जिसने कथित तौर पर कपूरथला चौक पर चार लोगों के समूह के बारे में जानकारी दी। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और न ही कथित वसूली करने वालों की पहचान सामने आई है।
कपूरथला चौक को लेकर क्या किया गया दावा?
सामने आई जानकारी के मुताबिक, एक युवक ने कपूरथला चौक पर भेष बदलकर पैसे मांग रहे व्यक्ति से बातचीत की। उस व्यक्ति के साथ व्हीलचेयर पर बैठा एक अन्य व्यक्ति भी मौजूद था। बातचीत के दौरान उसने कथित तौर पर बताया कि चौक पर चार लोग पैसे मांगते हैं। इनमें से दो एक तरफ और बाकी दो दूसरी तरफ खड़े रहते हैं।
दावा है कि इन लोगों को वहां पैसे मांगने के लिए रोजाना एक-एक हजार रुपये देने पड़ते हैं। कथित तौर पर पहले यह रकम 500 रुपये प्रतिदिन थी, जिसे बाद में बढ़ाकर एक हजार रुपये कर दिया गया।
यदि यह दावा सही साबित होता है, तो चार लोगों से एक ही चौराहे पर रोजाना कुल चार हजार रुपये वसूले जाने की बात सामने आती है। हालांकि, फिलहाल इस रकम के लेन-देन या इसके पीछे किसी संगठित गिरोह की भूमिका की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
शहर के चौराहों के बंटवारे का भी दावा
उक्त व्यक्ति ने कथित बातचीत में बताया कि शहर के अलग-अलग हिस्सों और चौराहों को बांटा गया है तथा हर जगह से मिलने वाली रकम अलग-अलग लोगों तक पहुंचती है। इससे यह सवाल उठ रहा है कि क्या भीख मांगने के स्थानों पर किसी तरह का अवैध नियंत्रण कायम किया गया है।
हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि पैसे मांगने वाले लोग अपनी मर्जी से ऐसा कर रहे हैं या किसी दबाव में उनसे पैसे लिए जा रहे हैं। यह भी सामने नहीं आया है कि कथित तौर पर रकम वसूलने वाले लोग कौन हैं और उनका नेटवर्क कितना बड़ा है।
इसलिए इन दावों को फिलहाल जांच का विषय माना जाना चाहिए। केवल सोशल मीडिया पर सामने आई जानकारी के आधार पर किसी व्यक्ति या समूह को दोषी ठहराना उचित नहीं होगा।
पहचान पत्र अपने पास रखने का भी आरोप
मामले से जुड़ी कुछ जानकारी में यह दावा भी किया गया है कि चौराहों पर पैसे मांगने वाले कुछ लोगों के पहचान पत्र कथित तौर पर रकम वसूलने वालों के पास हो सकते हैं। हालांकि, इस दावे की भी पुष्टि नहीं हुई है। यह संभव है कि कुछ लोगों के पास पहचान पत्र हों ही नहीं।
शहर में चौराहों पर भीख मांगने के अलावा वाहनों के शीशे साफ करके पैसे मांगने वाले लोगों की मौजूदगी भी चर्चा का विषय बनी हुई है। ऐसे में संबंधित अधिकारियों के लिए यह पता लगाना जरूरी होगा कि कहीं किसी व्यक्ति की मजबूरी का फायदा तो नहीं उठाया जा रहा है।
पहले भी चौराहों से लोगों को हटाने की हुई थी कोशिश
रिपोर्ट के अनुसार, जालंधर में स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत पहले चौराहों, धार्मिक स्थलों और शॉपिंग मॉल के बाहर से भिक्षावृत्ति को नियंत्रित करने के प्रयास किए गए थे। लेकिन इन प्रयासों को लगातार जारी नहीं रखा जा सका।
अब शहर के कई चौराहों पर तीन से चार लोगों के पैसे मांगने की बात कही जा रही है। ऐसे में कथित अवैध वसूली के दावों ने प्रशासन की भूमिका पर सवाल खड़े किए हैं।
पुलिस जांच से सामने आ सकती है सच्चाई
इस पूरे मामले में सबसे अहम सवाल यह है कि क्या वास्तव में चौराहों पर पैसे मांगने के बदले नियमित रूप से रकम वसूली जा रही है। यदि ऐसा है, तो इसके पीछे कौन लोग हैं और क्या किसी को धमकाकर या मजबूर करके पैसे लिए जा रहे हैं, इसकी जांच जरूरी है।
पुलिस और प्रशासन की ओर से संबंधित लोगों की पहचान, उनके बयानों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही स्थिति स्पष्ट हो सकती है। जांच के बाद यह भी पता चल सकेगा कि मामला संगठित वसूली का है या सोशल मीडिया पर किए गए दावों में कुछ तथ्य गलत हैं।
सत्या रिपोर्ट डिस्क्लेमर: यह खबर उपलब्ध रिपोर्ट और सोशल मीडिया पर किए गए दावों के आधार पर तैयार की गई है। कथित वसूली, पहचान पत्र अपने पास रखने और संगठित नेटवर्क से जुड़े आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। जांच के निष्कर्ष सामने आने तक इन्हें प्रमाणित तथ्य नहीं माना जाना चाहिए।



