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​मकान के अंदर दो खुफिया लैब…. गुपचुप तरीके से दो शातिर बनाते थे ड्रग्स, NCB ने किया भंडाफोड़

Greater Noida News: ग्रेटर नोएडा में नशीले पदार्थों के अवैध कारोबार के खिलाफ NCB ने अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है. गुप्त खुफिया जानकारी के आधार पर छापेमारी करते हुए केंद्रीय एजेंसी ने दो अंडरग्राउंड सिंथेटिक ड्रग्स लैबोरेट्रीज का पर्दाफाश किया है. मौके से करीब 45 करोड़ रुपये मूल्य की उच्च गुणवत्ता वाली सिंथेटिक ड्रग्स, भारी मात्रा में केमिकल और ड्रग्स बनाने के आधुनिक उपकरण बरामद किए गए हैं. इस मामले में एक विदेशी नागरिक समेत दो मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है. इस बड़ी सफलता पर गृह मंत्री अमित शाह ने एनसीबी की पीठ थपथपाई है, वहीं स्थानीय पुलिस की खुफिया कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं.

​मकान के अंदर दो खुफिया लैब…. गुपचुप तरीके से दो शातिर बनाते थे ड्रग्स, NCB ने किया भंडाफोड़

इस सफल ऑपरेशन के बाद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर एनसीबी टीम की सराहना की. गृह मंत्री ने बताया कि यह कार्रवाई पूरी तरह से गुप्त खुफिया इनपुट के आधार पर की गई है. उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘नशा मुक्त भारत’ के संकल्प को दोहराते हुए कहा कि केंद्र सरकार देश में नशे के पूरे नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए प्रतिबद्ध है. गृह मंत्री ने स्पष्ट किया कि सरकार का लक्ष्य दिसंबर 2029 से पहले देश में फैले सभी ड्रग कार्टेल और नशीले पदार्थों के सिंडिकेट को पूरी तरह समाप्त करना है.

स्थानीय पुलिस की निगरानी व्यवस्था पर उठे संगीन सवाल

एक रिहायशी मकान के अंदर चल रही दोदो गुप्त ड्रग्स लैब के पकड़े जाने से स्थानीय इंटेलिजेंस और पुलिस की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं. इतने बड़े पैमाने पर केमिकल और नशीले पदार्थों के निर्माण की गतिविधियां चल रही थीं, लेकिन स्थानीय थाना पुलिस को इसकी भनक तक नहीं लगी. सूत्रों के मुताबिक, यह लैब एक मकान में चल रही थी. अब स्थानीय पुलिस मकान मालिक और वहां रहने वाले लोगों से पूछताछ कर रही है. साल 2024 और 2025 में भी ग्रेटर नोएडा में बड़े स्तर पर ड्रग नेटवर्क पकड़े गए थे, लेकिन 2026 में फिर से गुप्त लैब मिलना निगरानी व्यवस्था की ढिलाई को दर्शाता है.

पूरे सिंडिकेट तक पहुंचना जांच एजेंसियों के लिए बड़ी चुनौती

केवल लैब संचालकों की गिरफ्तारी से इस नेटवर्क का अंत नहीं होगा, बल्कि इसके मूल तक पहुंचना जरूरी है. जांच एजेंसियों के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती यह पता लगाना है कि ड्रग्स बनाने के लिए केमिकल कहां से आ रहे थे और तैयार माल की सप्लाई कहांकहां की जा रही थी. गिरफ्तार विदेशी नागरिक से पूछताछ के जरिए अंतरराष्ट्रीय ड्रग्स सिंडिकेट और स्थानीय मददगारों की कड़ियां जोड़ी जा रही हैं.

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