
दिल्ली: सरकारी नौकरी दिलाने का झांसा देकर ठगी करने का एक मामला सामने आया है, जिसमें दिल्ली पुलिस के एक रिटायर्ड सब-इंस्पेक्टर को ही निशाना बनाया गया। आरोप है कि एक शख्स ने उनके बेटे और बेटी को कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) में अधिकारी बनवाने का भरोसा देकर उनसे 40 लाख रुपये ले लिए। आरोपी ने खुद को EPFO का वरिष्ठ अधिकारी बताया और भरोसा जीतने के लिए कथित तौर पर भारत सरकार लिखी कार का इस्तेमाल भी किया। शिकायत के आधार पर नरेला पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
जानकार के जरिए हुई थी आरोपी से मुलाकात
शिकायतकर्ता 67 वर्षीय गोविंद सिंह दिल्ली के सिंघोला गांव के निवासी हैं और दिल्ली पुलिस में सब-इंस्पेक्टर के पद से सेवानिवृत्त हुए हैं। उनके मुताबिक, वर्ष 2019 में एक परिचित ने उनकी मुलाकात ज्ञानेश बावेजा नाम के व्यक्ति से कराई थी।
आरोप है कि ज्ञानेश ने खुद को कर्मचारी भविष्य निधि संगठन में असिस्टेंट प्रोविडेंट फंड कमिश्नर बताया। वह अक्सर भारत सरकार लिखी कार से गोविंद सिंह से मिलने आता था। इससे उसकी बातों पर भरोसा करना आसान हो गया।
बेटे और बेटी की नौकरी के लिए मांगे 40 लाख रुपये
शिकायत के अनुसार, वर्ष 2020 में आरोपी ने बताया कि EPFO में असिस्टेंट सेक्शन ऑफिसर के पदों पर भर्ती हो रही है और वह चयन प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। उसने कथित तौर पर दोनों बच्चों को नौकरी दिलाने के लिए 20-20 लाख रुपये की मांग की।
गोविंद सिंह ने अपने बेटे और बेटी को सरकारी नौकरी दिलाने की उम्मीद में आरोपी को कुल 40 लाख रुपये दे दिए। परिवार को लगा कि भर्ती की प्रक्रिया पूरी होने के बाद दोनों बच्चों का भविष्य सुरक्षित हो जाएगा।
फर्जी चयन सूची और नियुक्ति पत्र देने का आरोप
पीड़ित के मुताबिक, आरोपी ने दोनों बच्चों से भर्ती के फॉर्म भरवाए। इसके बाद रिठाला मेट्रो स्टेशन के पास एक व्यक्ति को कार में भेजा गया, जहां कथित तौर पर दोनों बच्चों से ओएमआर शीट पर अंगूठे लगवाए गए।
कुछ समय बाद आरोपी ने एक चयन सूची दी, जिसमें दोनों बच्चों के नाम दर्ज थे। इसके अलावा उन्हें पहचान पत्र और नियुक्ति पत्र भी दिए गए। कथित तौर पर बच्चों को नौकरी जॉइन करने के लिए कहा गया।
लेकिन जब गोविंद सिंह अपने बेटे और बेटी को लेकर EPFO कार्यालय पहुंचे, तब उन्हें पता चला कि नौकरी दिलाने के नाम पर उनके साथ धोखाधड़ी हुई है।
पैसे वापस मांगने पर टालमटोल
ठगी का पता चलने के बाद गोविंद सिंह ने आरोपी से अपने पैसे वापस मांगे। शिकायत के अनुसार, आरोपी ने रकम लौटाने के बजाय बहाने बनाने शुरू कर दिए। इसके बाद पीड़ित ने नरेला थाने में शिकायत दर्ज कराई।
पुलिस ने शिकायत की जांच के बाद एफआईआर दर्ज कर मामले की पड़ताल शुरू कर दी है। आरोपी और उसके कथित गिरोह के खिलाफ क्राइम ब्रांच में भी शिकायत दिए जाने की जानकारी सामने आई है।
कई युवाओं को निशाना बनाने की आशंका
मामले से जुड़े पुलिस अधिकारियों के अनुसार, इस कथित गिरोह के शिकार अन्य युवक भी हो सकते हैं। यदि पीड़ितों की संख्या बढ़ती है, तो जांच आर्थिक अपराध शाखा को सौंपने पर विचार किया जा सकता है।
यह मामला सरकारी नौकरी पाने की चाह रखने वाले परिवारों के लिए चेतावनी है कि भर्ती में किसी अधिकारी या बिचौलिए के जरिए नौकरी दिलाने के दावे पर भरोसा करने से पहले संबंधित विभाग से उसकी पुष्टि जरूर करें। असली भर्ती प्रक्रिया और नियुक्ति की जानकारी हमेशा आधिकारिक माध्यम से जांचनी चाहिए।
सत्या रिपोर्ट डिस्क्लेमर: यह समाचार उपलब्ध मीडिया रिपोर्ट और शिकायत में लगाए गए आरोपों पर आधारित है। मामले की जांच जारी है और आरोपी के खिलाफ आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी।



