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डॉक्टर ने कहा- आपके ड्राइवर की सर्जरी सफल रही… मालिक बोला- ‘वह ड्राइवर नहीं, 15 साल से मेरा साथी है’, इलाज का खर्च भी उठाया..

डॉक्टर ने कहा- आपके ड्राइवर की सर्जरी सफल रही… मालिक बोला- ‘वह ड्राइवर नहीं, 15 साल से मेरा साथी है’, इलाज का खर्च भी उठाया..

अक्सर लोग अपने ड्राइवर, घरेलू मदद या कर्मचारियों को सिर्फ स्टाफ मानते हैं. लेकिन मुंबई के एक कारोबारी ने यह सोच बदलने वाली मिसाल पेश की. जब उनके 15 साल पुराने ड्राइवर को हार्ट बायपास सर्जरी की जरूरत पड़ी, तो उन्होंने बिना एक पल सोचे इलाज का पूरा खर्च उठा लिया. इतना ही नहीं, जब डॉक्टर ने उन्हें धन्यवाद कहा, तो उनका जवाब हर किसी के दिल को छू गया. उन्होंने कहा- ‘वह मेरा ड्राइवर नहीं, मेरा सहयोगी है.’

डॉक्टर ने सरकारी अस्पताल जाने की दी थी सलाह
मुंबई के हार्ट सर्जन डॉ. प्रशांत मिश्रा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर इस घटना को साझा किया. उन्होंने बताया कि एक ड्राइवर को हार्ट बायपास सर्जरी की जरूरत थी. प्राइवेट अस्पताल में इस ऑपरेशन का खर्च करीब 4.25 लाख रुपए था. परिवार की आर्थिक स्थिति देखते हुए डॉक्टर ने सलाह दी कि वे सरकारी अस्पताल में इलाज कराएं, जहां खर्च कम होगा. लेकिन मरीज के बेटे ने साफ कहा कि इलाज इसी अस्पताल में होगा. अगले दिन डॉक्टर को पता चला कि मरीज के मालिक ने आरटीजीएस के जरिए पूरी रकम सीधे अस्पताल के खाते में भेज दी.

ऑपरेशन के बाद डॉक्टर ने किया फोन
सर्जरी सफल होने के बाद डॉ. मिश्रा ने मरीज के मालिक को फोन कर इसकी जानकारी दी. उन्होंने कहा, ‘आपके सहयोग के लिए धन्यवाद, श्री शुक्ला की सर्जरी सफल रही.’  इस पर सामने से जवाब आया,’धन्यवाद डॉक्टर, आपने मेरे सहयोगी का इतना अच्छा ख्याल रखा.’ डॉक्टर को यह सुनकर हैरानी हुई. उन्होंने पूछा, ‘क्या वह आपके ड्राइवर नहीं हैं?’

हम दोनों काम करते हैं, बस जिम्मेदारियां अलग हैं
मालिक का जवाब डॉक्टर के लिए जिंदगी का बड़ा सबक बन गया. उन्होंने कहा, ‘वह पिछले 15 साल से मेरे साथ हैं. मैं उन्हें सिर्फ ड्राइवर नहीं मानता. मैं भी काम करता हूं और वह भी काम करते हैं. हमारी जिम्मेदारियां अलग हैं, लेकिन हम एक ही टीम का हिस्सा हैं. इसलिए वह मेरे सहयोगी हैं.’ डॉक्टर ने कहा कि यह बात उनके दिल को छू गई और उन्हें एहसास हुआ कि किसी भी कर्मचारी का सम्मान उसके पद से नहीं, बल्कि उसके योगदान से होना चाहिए.

डॉ. मिश्रा ने अपनी पोस्ट के आकिर में लिखा कि हमें अपने घरेलू सहायकों, ड्राइवरों और अन्य कर्मचारियों को सिर्फ नौकर नहीं समझना चाहिए. ये वही लोग हैं, जो हमारी रोजमर्रा की जिंदगी को आसान बनाते हैं. इसलिए उन्हें भी बराबर सम्मान और गरिमा मिलनी चाहिए.

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