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सरकार का नया प्लान, सब्सिडी के सहारे दोबारा शुरू होंगी सी-प्लेन उड़ानें

सरकार का नया प्लान, सब्सिडी के सहारे दोबारा शुरू होंगी सी-प्लेन उड़ानें

भारत में सी-प्लेन सेवा की शुरुआत 2010 में हुई थी, जब पवन हंस हेलीकॉप्टर्स ने मुंबई के जुहू एयरड्रोम से पहला सी-प्लेन उड़ाया था. उस समय इसे हवाई क्षेत्र में बड़ी क्रांति की तरह पेश किया गया. अंडमान-निकोबार में जल हंस नाम से सेवाएं भी शुरू हुईं. लेकिन शुरुआती उत्साह ज्यादा समय तक नहीं टिक सका. कई परियोजनाएं शुरू हुईं, पर आर्थिक और परिचालन चुनौतियों के कारण बंद हो गईं. कोच्चि में निजी पहल पर शुरू हुआ एक सी-प्लेन प्रोजेक्ट भी कुछ सालों में ठप पड़ गया.

सरकार का नया दांव: सब्सिडी और प्रोत्साहन

अब केंद्र सरकार ने एक बार फिर इस सेक्टर को बढ़ावा देने का फैसला किया है. हालिया बजट में वित्त मंत्री ने सी-प्लेन सेवाओं के लिए वायबिलिटी गैप फंडिंग (VGF) की घोषणा की है. इसका मकसद उन परियोजनाओं को आर्थिक मदद देना है जो सामाजिक और रणनीतिक रूप से जरूरी हैं, लेकिन अपने दम पर मुनाफा नहीं कमा पातीं. इसके साथ ही मेक इन इंडिया के तहत घरेलू निर्माण को भी प्रोत्साहन देने की बात कही गई है.

लक्षद्वीप से नई उड़ान की तैयारी

स्काईहॉप एविएशन नाम की कंपनी जल्द ही कोच्चि से लक्षद्वीप के पांच द्वीपों अगत्ती, कवरत्ती, कल्पेनी, किल्टन और कदमत के लिए 19 सीटों वाले ट्विन ऑटर विमान से सेवा शुरू करने जा रही है. कंपनी का दावा है कि आने वाले वर्षों में भारत सी-प्लेन का बड़ा बाजार बन सकता है.

पर्यटन और कनेक्टिविटी को मिल सकता है बढ़ावा

विशेषज्ञों का मानना है कि 11,000 किलोमीटर लंबी तटरेखा और कई द्वीपों के कारण भारत सी-प्लेन के लिए उपयुक्त देश है. इससे लंबी फेरी यात्राएं छोटी उड़ानों में बदल सकती हैं. पर्यटन, मेडिकल इमरजेंसी और आपदा राहत जैसे क्षेत्रों में भी यह सेवा उपयोगी साबित हो सकती है.

हालांकि प्रशिक्षित पायलटों की कमी, सुरक्षा मानक और बुनियादी ढांचे का विकास अभी भी बड़ी चुनौती हैं. अब देखना होगा कि इस बार सी-प्लेन की कोशिशें कितनी सफल रहती हैं.

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