
राजकोट: गुजरात में नवरात्रि के दौरान आयोजित अहीर गरबा महोत्सव अपनी भव्यता और पारंपरिक अंदाज को लेकर चर्चा में है। इस आयोजन में 15 हजार से ज्यादा महिलाएं पारंपरिक परिधानों और सोने के आभूषणों से सजकर सामूहिक रास-गरबा करने पहुंचीं। दावा किया जा रहा है कि महिलाओं द्वारा पहने गए सोने के गहनों का कुल वजन करीब 900 किलोग्राम और अनुमानित कीमत 1300 करोड़ रुपये से अधिक है। हजारों महिलाओं की एक साथ मौजूदगी और पारंपरिक आभूषणों की चमक ने इस आयोजन को खास बना दिया।
15 हजार महिलाओं ने एक साथ किया पारंपरिक रास-गरबा
गुजरात के राजकोट में आहिर सेना की ओर से अहीर गरबा महोत्सव का आयोजन किया गया। इस महोत्सव में अहीर समाज के लोग लगातार नौ दिनों तक पारंपरिक तरीके से गरबा कर रहे हैं। नवरात्रि के सातवें दिन आयोजन में खास रौनक देखने को मिली, जब बड़ी संख्या में महिलाएं पारंपरिक वेशभूषा पहनकर गरबा मैदान पहुंचीं।
महिलाओं ने सोने के हार, कंगन और दूसरे पारंपरिक आभूषण पहनकर सामूहिक रास-गरबा किया। हजारों महिलाओं का एक साथ पारंपरिक नृत्य करना और उनकी वेशभूषा इस उत्सव का प्रमुख आकर्षण बनी। इस दौरान अहीर समाज की सांस्कृतिक विरासत और परंपराओं की झलक भी देखने को मिली।
900 किलो सोने के आभूषणों की कीमत 1300 करोड़ रुपये से ज्यादा बताई गई
इस महोत्सव की सबसे चर्चित बात महिलाओं के सोने के आभूषण रहे। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, करीब 900 किलोग्राम सोने के गहनों की अनुमानित कीमत 1300 करोड़ रुपये से अधिक बताई जा रही है।
पारंपरिक गहने अहीर समाज की सांस्कृतिक पहचान और विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा माने जाते हैं। महिलाओं ने पारंपरिक कपड़ों के साथ इन आभूषणों को पहनकर अपनी संस्कृति को प्रदर्शित किया। सामूहिक गरबा के दौरान गहनों की चमक और पारंपरिक नृत्य की शैली ने उत्सव को अलग पहचान दी।
हालांकि, आभूषणों के कुल वजन और उनकी अनुमानित कीमत के आंकड़ों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध जानकारी से नहीं होती है।
द्वारकाधीश की महाआरती से भक्तिमय हुआ माहौल
अहीर गरबा महोत्सव में भगवान श्री द्वारकाधीश की महाआरती भी आकर्षण का केंद्र रही। पारंपरिक रास-गरबा के साथ महाआरती ने पूरे माहौल को भक्तिमय बना दिया। लोगों ने धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक परंपराओं के संगम के बीच नवरात्रि का उत्सव मनाया।
इस आयोजन का उद्देश्य समाज की पारंपरिक संस्कृति और विरासत को अगली पीढ़ी तक पहुंचाना भी है। राजकोट का यह महोत्सव दर्शाता है कि गुजरात में नवरात्रि केवल नृत्य और उत्सव तक सीमित नहीं है, बल्कि यह धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक पहचान और सामाजिक एकता का भी प्रतीक है।
डिस्क्लेमर: यह खबर उपलब्ध रिपोर्टों में दी गई जानकारी के आधार पर तैयार की गई है। गहनों के वजन और अनुमानित कीमत से संबंधित आंकड़ों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं की गई है।


