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मैसूरु में 10 साल की बच्ची से दुष्कर्म और हत्या के दोषी को मौत की सजा, परिवार को 13.50 लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश

मैसूरु में 10 साल की बच्ची से दुष्कर्म और हत्या के दोषी को मौत की सजा, परिवार को 13.50 लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश

मैसूरु: कर्नाटक के मैसूरु में 10 वर्षीय बच्ची के साथ दुष्कर्म और हत्या के मामले में विशेष पॉक्सो अदालत ने 31 वर्षीय दोषी कार्तिक को मौत की सजा सुनाई है। अदालत ने उस पर एक लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया। इसके साथ ही जिला विधिक सेवा प्राधिकरण को पीड़िता के परिवार को 13.50 लाख रुपये का मुआवजा दिलाना सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है।

यह मामला वर्ष 2025 में दशहरा उत्सव के दौरान हुई घटना से जुड़ा है। बच्ची अपने माता-पिता के साथ उत्तर कर्नाटक से मैसूरु आई थी। परिवार वहां गुब्बारे बेचकर अपनी आजीविका चला रहा था और इत्तिगेगुड इलाके में नागस्वामी मंदिर के पास एक खाली भूखंड पर बनी अस्थायी झोपड़ी में रह रहा था।

नाले में मिला था बच्ची का शव

मामले के अनुसार, दशहरा उत्सव समाप्त होने के बाद बच्ची के माता-पिता अपने गांव लौटने की तैयारी कर रहे थे। इसी दौरान 9 अक्टूबर 2025 की सुबह उनकी झोपड़ी के पास स्थित नाले में बच्ची का शव मिला। इसके बाद माता-पिता की शिकायत पर नजरबाद थाने में मामला दर्ज किया गया और पुलिस ने जांच शुरू की।

सीसीटीवी और फॉरेंसिक साक्ष्यों से हुई जांच

पुलिस ने जांच के दौरान सीसीटीवी फुटेज की मदद से सिद्धलिंगपुरा निवासी कार्तिक की गतिविधियों का पता लगाया और उसे गिरफ्तार कर लिया। पुलिस के अनुसार, घटनास्थल का निरीक्षण कराने के बाद वापस लाए जाते समय आरोपी ने कथित तौर पर भागने की कोशिश की थी। उसे पकड़ने के लिए पुलिस ने मैसूरु के मेटागल्ली इलाके के पास उसके दाहिने पैर में गोली मारी थी।

जांच पूरी होने के बाद पुलिस ने अदालत में आरोपपत्र दाखिल किया। मामले की सुनवाई के दौरान मैसूर मेडिकल कॉलेज एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट के फॉरेंसिक मेडिसिन विभाग की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट, डीएनए जांच, बेंगलुरु स्थित राज्य फॉरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला की रिपोर्ट और डिजिटल साक्ष्यों को महत्वपूर्ण आधार बनाया गया।

पहले दोषी करार, फिर सुनाई गई सजा

उपलब्ध रिपोर्ट के मुताबिक, अदालत ने बृहस्पतिवार को कार्तिक को दोषी ठहराया था। इसके बाद शनिवार को विशेष पॉक्सो अदालत के न्यायाधीश आनंद पी. होगाडे ने उसे मौत की सजा सुनाई और एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया। अदालत ने पीड़िता के परिवार को 13.50 लाख रुपये मुआवजा दिलाने के लिए भी आवश्यक कदम उठाने का निर्देश दिया।

इस मामले ने बच्चियों की सुरक्षा और उनके खिलाफ होने वाले गंभीर अपराधों पर एक बार फिर ध्यान खींचा है। ऐसे मामलों में निष्पक्ष जांच, साक्ष्यों के आधार पर न्यायिक प्रक्रिया और पीड़ित परिवार को सहायता मिलना महत्वपूर्ण है।

डिस्क्लेमर: यह खबर उपलब्ध मीडिया रिपोर्ट में दी गई जानकारी पर आधारित है। कानूनी कार्रवाई और घटना से जुड़े विवरणों की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक हो सकती है।

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