Ramesh Powar: क्रिकेट सिर्फ मैदान पर चौकेछक्के लगाने या विकेट लेने का खेल नहीं है। इसके पीछे सालों की मेहनत, संघर्ष, अनुभव और ऐसे कई फैसले होते हैं, जो किसी खिलाड़ी के करियर की दिशा बदल देते हैं। कभी खुद भारतीय टीम के लिए खेलने का सपना देखने वाले रमेश पोवार अब उन खिलाड़ियों के चयन में अहम भूमिका निभाएंगे, जो तिरंगे के लिए मैदान पर उतरने का सपना देखते हैं।

भारतीय क्रिकेट में उनके सफर ने एक नया मोड़ लिया है। पूर्व भारतीय ऑफ स्पिनर रमेश पोवार को पुरुष क्रिकेट टीम की चयन समिति में शामिल किया गया है। यह जिम्मेदारी उनके लिए क्रिकेट से जुड़े अनुभव को एक नई दिशा देने का अवसर है। अब उनका काम सिर्फ खेल को समझना नहीं, बल्कि उन प्रतिभाओं को पहचानने में योगदान देना भी होगा, जो आने वाले समय में भारतीय क्रिकेट की पहचान बन सकती हैं।
मुंबई से शुरू हुआ Ramesh Powar का क्रिकेट का सफर
मुंबई ने भारतीय क्रिकेट को कई बड़े खिलाड़ी दिए हैं। इसी क्रिकेट संस्कृति से निकले रमेश पोवार ने भी अपने खेल से पहचान बनाई। ऑफ स्पिन गेंदबाज के रूप में उन्होंने भारतीय टीम का प्रतिनिधित्व किया और अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में अपनी जगह बनाई।
पोवार ने भारत के लिए दो टेस्ट और 31 वनडे मुकाबले खेले। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में हर खिलाड़ी का सफर अलग होता है। किसी को लंबे समय तक देश के लिए खेलने का मौका मिलता है, तो किसी का करियर सीमित रह जाता है। लेकिन क्रिकेट से जुड़ाव सिर्फ मैदान पर खेलने तक सीमित नहीं होता। कई बार खेल का असली अनुभव तब सामने आता है, जब खिलाड़ी अपनी सीखी हुई बातों को अगली पीढ़ी तक पहुंचाता है।
रमेश पोवार के करियर में भी यही बदलाव देखने को मिला। खिलाड़ी के रूप में हासिल किए गए अनुभव ने उन्हें कोचिंग की दुनिया में आगे बढ़ने का अवसर दिया।
महिला टीम के साथ बतौर कोच काम कर चुके हैं रमेश पवार
क्रिकेट में कोच की भूमिका केवल तकनीक सिखाने तक सीमित नहीं होती। उसे खिलाड़ियों का आत्मविश्वास समझना होता है, उनकी कमजोरियों पर काम करना होता है और मुश्किल समय में उनका हौसला भी बढ़ाना होता है।
रमेश पोवार भारतीय महिला क्रिकेट टीम के मुख्य कोच रह चुके हैं। इसके अलावा उन्होंने मुंबई और गुजरात की टीमों के साथ भी काम किया। बीसीसीआई के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में गेंदबाजी कोच के रूप में उनका अनुभव उनके क्रिकेट सफर का एक और महत्वपूर्ण हिस्सा रहा।
महिला टीम के साथ उनके कार्यकाल में भारत ने एशिया कप का खिताब जीता और 2022 के राष्ट्रमंडल खेलों में रजत पदक हासिल किया।
कोच के तौर पर काम करने से रमेश पोवार ने खिलाड़ियों की प्रतिभा को करीब से देखने और टीम की जरूरतों को समझने का अवसर मिला। यही अनुभव अब चयन समिति में उनके काम आ सकता है।
अब खिलाड़ियों के सपनों से जुड़ा होगा उनका फैसला
किसी भी क्रिकेटर के लिए भारतीय टीम की जर्सी पहनना सिर्फ एक उपलब्धि नहीं, बल्कि वर्षों की मेहनत और परिवार के सपनों का परिणाम होता है। छोटे शहरों में अभ्यास करने वाले युवा हों या घरेलू क्रिकेट में लगातार अच्छा प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ी, हर किसी की नजर इस मौके पर रहती है कि कब उसे देश के लिए खेलने का अवसर मिलेगा।
चयनकर्ताओं की भूमिका इसी मोड़ पर सबसे महत्वपूर्ण हो जाती है। उन्हें खिलाड़ियों के प्रदर्शन के साथ उनकी निरंतरता, टीम की जरूरतों और भविष्य की योजनाओं को भी ध्यान में रखना पड़ता है।
बीसीसीआई की क्रिकेट सलाहकार समिति ने चयन प्रक्रिया के बाद रमेश पोवार के नाम की सर्वसम्मति से सिफारिश की। पुरुष चयन समिति की अध्यक्षता प्रज्ञान ओझा करेंगे। समिति में शिव सुंदर दास, आरपी सिंह, अजय रात्रा और रमेश पोवार भी शामिल हैं।
नई जिम्मेदारी, नई उम्मीदें
रमेश पोवार के लिए यह भूमिका उनके लंबे क्रिकेट सफर का एक नया अध्याय है। मैदान पर खेलने से लेकर खिलाड़ियों को प्रशिक्षित करने और अब चयन प्रक्रिया का हिस्सा बनने तक, उनका अनुभव कई अलगअलग पड़ावों से गुजरा है।
हालांकि, चयनकर्ता के रूप में उनकी असली परीक्षा आने वाले फैसलों में होगी। प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को पहचानना, अनुभवी और युवा खिलाड़ियों के बीच संतुलन बनाना और भारतीय टीम की भविष्य की जरूरतों को समझना उनके सामने अहम चुनौतियां होंगी।
आखिरकार, चयन समिति का हर फैसला किसी खिलाड़ी के लिए उम्मीद का दरवाजा खोल सकता है, तो किसी दूसरे खिलाड़ी को अपने सपने के लिए थोड़ा और इंतजार भी करना पड़ सकता है।
अब क्रिकेट प्रशंसकों की नजर इस बात पर रहेगी कि रमेश पोवार अपने अनुभव का इस्तेमाल किस तरह करते हैं। उनके लिए यह केवल एक पद नहीं, बल्कि भारतीय क्रिकेट की अगली पीढ़ी को आकार देने की जिम्मेदारी भी है।



