रिलायंस इंडस्ट्रीज की इकाई जियो प्लेटफॉर्म्स के प्रबंध निदेशक आकाश अंबानी ने मंगलवार को कहा कि कंपनी वृद्धि के लिए दूरसंचार से आगे अपनी प्रौद्योगिकी, कृत्रिम मेधा और क्लाउड क्षेत्र पर ध्यान दे रही है. उन्होंने कहा कि जियो सिर्फ दूरसंचार इकाई नहीं बल्कि एक प्रौद्योगिकी कंपनी है. देश के अब तक के सबसे बड़े आरंभिक सार्वजनिक निर्गम के खुदरा निवेशकों के लिए खुलने से पहले अंबानी ने पीटीआईभाषा को दिये साक्षात्कार में कहा, जियो के लिए दूरसंचार और प्रौद्योगिकी में से किसी एक को चुनने का सवाल नहीं है, क्योंकि हमारा नेटवर्क ही हमारी टेक्नोलॉजी है. उन्होंने कहा कि कंपनी ने अपना 5जी कोर नेटवर्क, क्लाउड आधारित रेडियो नेटवर्क और सॉफ्टवेयर मंच खुद विकसित किया है. जियो का यह नेटवर्क 53.33 करोड़ ग्राहकों को सेवाएं देता है. अंबानी ने कहा कि कनेक्टिविटी इस मंच पर हमारा पहला उत्पाद था. डिजिटल सेवाएं, एआई और क्लाउड वे चीजें हैं जिन्हें हम अब इसके साथ क्रमिक रूप से जोड़ रहे हैं.

देश का सबसे बड़ा आईपीओ
जियो प्लेटफॉर्म्स का लक्ष्य आईपीओ के जरिए 30,200 करोड़ रुपए से अधिक जुटाना है, जिससे कंपनी का वैलयूएशन लगभग 108 अरब अमेरिकी डॉलर आंका गया है. यह निर्गम ऐसे समय आ रहा है, जब निवेशक यह देख रहे हैं कि देश की सबसे बड़ी टेलीकॉम कंपनी अपने विशाल कस्टमर बेस का लाभ उठाकर डिजिटल सेवाओं, उद्यम प्रौद्योगिकी और आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस से अधिक मुनाफा देने वाला राजस्व कितना बढ़ा सकती है. इसका कारण यह है कि अब केवल ग्राहकों की संख्या बढ़ने से कारोबार के विस्तार को पहले जितनी गति नहीं मिल रही है. कंपनी ने उपग्रह कनेक्टिविटी और अगली पीढ़ी की 6जी तकनीक को भी भविष्य के वृद्धि क्षेत्रों के रूप में चिन्हित किया है.
जियो की हिस्सेदारी 67.56 प्रतिशत थी
अंबानी ने कहा कि जियो के वृद्धि अवसर मोबाइल सर्विसेज से लेकर होम ब्रॉडबैंड और एंटरप्राइज डिजिटल सॉल्यूशंस तक फैले हुए हैं. देश में आज भी करीब 26 करोड़ भारतीय 2जी सेवाओं का उपयोग करते हैं, जबकि फिक्स्ड ब्रॉडबैंड देश के केवल लगभग 21 प्रतिशत घरों तक पहुंच पाया है. उन्होंने कहा कि वित्त वर्ष 202526 में भारत की शुद्ध फिक्स्डब्रॉडबैंड वृद्धि में जियो की हिस्सेदारी 67.56 प्रतिशत थी, जबकि देश के 7.9 करोड़ से अधिक सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों में डिजिटलसेवाओं को अपनाने वाले अभी भी तीन प्रतिशत से कम हैं. अंबानी ने कहा कि हमारा टारगेट कस्टमर्स की संख्या बढ़ाने, उनके साथ जुड़ाव मजबूत करने और प्रत्येक ग्राहक को अधिक सेवाएं देने पर है…. जियो का प्रत्येक ग्राहक पहले से ही औसतन हर महीने 43.7 जीबी डेटा इस्तेमाल करता है. शुल्क दरें एक बड़ी कहानी का सिर्फ एक हिस्सा हैं.
टेक कारोबार का विस्तार
उन्होंने कहा कि नेट डेटईबीआईटीडीए अनुपात वित्त वर्ष 202526 में 0.36 गुना रहा जबकि 202324 में यह 0.88 गुना था. इस पेशकश से 5जी, ब्रॉडबैंड, एआई, क्लाउड और एंटरप्राइज सेवाओं में निवेश के लिए अधिक वित्तीय गुंजाइश मिलेगी. जियो स्थानीय परिचालकों के साथ साझेदारी के माध्यम से भारत से बाहर भी अपने प्रौद्योगिकी कारोबार का विस्तार करना चाह रही है. अंबानी ने कहा कि कंपनी दूरदराज के क्षेत्रों को जोड़ने के लिए स्वदेशी उपग्रह समूह और भूआधारित केंद्रों का नेटवर्क विकसित करने की संभावनाओं पर विचार कर रही है. इसके साथ ही, कंपनी वैश्विक उपग्रह सेवा प्रदाताओं के साथ साझेदारी की संभावनाएं भी तलाश रही है.
कंपनी की दीर्घकालिक योजना में अपनी क्लाउड आधारित संरचना के साथ 6जी तकनीक को इस तरह विकसित करना शामिल है, जिससे पूरे नेटवर्क को नए सिरे से तैयार करने के बजाय मुख्य रूप से सॉफ्टवेयर में बदलाव करके इसे अपनाया जा सके.
7,220 पेटेंट आवेदन दाखिल किए
जियो अपनी तकनीकी क्षमताओं के दम पर अन्य कंपनियों से अलग पहचान बनाने पर जोर दे रही है. कंपनी ने अब तक 7,220 पेटेंट आवेदन दाखिल किए हैं. इसके अलावा, वर्ष 2025 में विश्व बौद्धिक संपदा संगठन की पेटेंट सहयोग संधि संबंधी वैश्विक रैंकिंग में वह शीर्ष 20 कंपनियों में शामिल रही. उन्होंने कहा कि जियो के फुलटाइम वर्कफोर्स का लगभग 45 प्रतिशत हिस्सा, यानी 12,477 कर्मचारी, डिजिटल प्रोडक्ट्स और टेक डेवलपमेंट विकास में काम करते हैं. जियो आईपीओ में व्यापक भागीदारी को भी बढ़ावा देना चाह रही है. इस निर्गम में रिलायंस इंडस्ट्रीज के पात्र शेयरधारकों के लिए 2,500 करोड़ रुपये तक और पात्र कर्मचारियों के लिए 500 करोड़ रुपये तक के आरक्षण शामिल हैं, जबकि शुद्ध पेशकश का कम से कम 35 प्रतिशत हिस्सा खुदरा व्यक्तिगत निवेशकों के लिए उपलब्ध है.
गूगल का एआई प्रो प्लान
उन्होंने कहा कि मेरे दादा धीरूभाई अंबानी वह व्यक्ति थे जिन्होंने भारत में इक्विटी संस्कृति की शुरुआत की थी और इस पेशकश का मकसद उन परिवारों को सीधे भाग लेने की अनुमति देना है जो पीढ़ियों से रिलायंस से जुड़े रहे हैं. गूगल और मेटा सहित जियो के वैश्विक प्रौद्योगिकी निवेशकों की भी इसके विस्तार के अगले चरण में भूमिका निभाने की उम्मीद है. अंबानी ने कहा कि जियो उपयोगकर्ताओं को 18 महीनों के लिए बिना किसी अतिरिक्त लागत के गूगल का एआई प्रो प्लान दिया जा रहा है, जबकि रिलायंस इंटेलिजेंस और मेटा से जुड़े एक संयुक्त उद्यम रिलायंस एंटरप्राइज इंटेलिजेंस की योजना भारत में व्यवसायों को उद्यम एआई उत्पाद वितरित करने की है. यह सार्वजनिक निर्गम 21 अक्टूबर को खुलेगा और 23 अक्टूबर को बंद होगा. इसके तहत नए शेयर जारी कर करीब 30,213 करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य है. इसमें मौजूदा शेयरधारकों की ओर से शेयरों की बिक्री का कोई हिस्सा नहीं है. कंपनी ने इश्यू के लिए कीमत दायरा 1,065 से 1,119 रुपए प्रति शेयर तय किया है. कीमत के उच्च स्तर पर जियो का मूल्यांकन करीब 108 अरब डॉलर बैठता है.



