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बेटे की चाहत में की दूसरी शादी, दोनों पत्नियों के बीच पति का बंटवारा; पंचायत ने तय किए हफ्ते के दिन

बेटे की चाहत में की दूसरी शादी, दोनों पत्नियों के बीच पति का बंटवारा; पंचायत ने तय किए हफ्ते के दिन

रामपुर: उत्तर प्रदेश के रामपुर में एक परिवार का विवाद पंचायत तक पहुंच गया, जहां पति के समय और खर्च को लेकर दोनों पत्नियों के बीच समझौता कराया गया। पंचायत में तय हुआ कि पति सप्ताह के तीन दिन पहली पत्नी के साथ और तीन दिन दूसरी पत्नी के साथ बिताएगा। बचा हुआ एक दिन वह अपनी इच्छा के अनुसार गुजार सकेगा। इसके साथ ही पहली पत्नी के घरेलू खर्च और निजी जरूरतों को लेकर भी कुछ शर्तें रखी गईं।

मामले की शुरुआत एक ऐसे वैवाहिक रिश्ते से हुई, जिसमें समय के साथ परिवार और जिम्मेदारियां बढ़ती गईं, लेकिन पति-पत्नी के बीच विवाद भी गहराता चला गया। जानकारी के मुताबिक, युवक की पहली शादी उत्तराखंड की एक युवती से हुई थी। दोनों की दो बेटियां थीं। बताया गया कि बेटे की चाहत में युवक ने पहली पत्नी की सहमति के बिना दूसरी शादी कर ली।

दूसरी शादी के बाद भी परिवार में बेटे का जन्म नहीं हुआ। दूसरी पत्नी से भी दो बेटियां हुईं। इस तरह युवक के परिवार में चार बेटियां हो गईं, लेकिन दोनों पत्नियों के बीच पति के साथ रहने और घर के खर्च को लेकर विवाद बना रहा।

खर्च न मिलने पर पहली पत्नी ने की शिकायत

पहली पत्नी का आरोप था कि पति उसे पर्याप्त खर्च नहीं दे रहा था और दूसरी पत्नी के साथ अधिक समय बिताने लगा था। आर्थिक परेशानियों और पारिवारिक उपेक्षा से नाराज होकर वह पुलिस चौकी पहुंची और अपनी शिकायत दर्ज कराई।

मामले की जानकारी दोनों पक्षों के परिजनों और गांव के लोगों तक पहुंची। विवाद को आगे बढ़ने से रोकने के लिए पंचायत बुलाई गई, जिसमें परिवार के सदस्यों और गांव के गणमान्य लोगों ने बैठकर समाधान निकालने की कोशिश की।

पंचायत ने तय किया पति का समय और खर्च

काफी चर्चा के बाद पंचायत में समझौते का रास्ता निकाला गया। तय हुआ कि पति सप्ताह के तीन दिन पहली पत्नी के साथ और अगले तीन दिन दूसरी पत्नी के साथ रहेगा। सातवां दिन वह अपनी मर्जी से बिता सकेगा।

इसके अलावा पहली पत्नी के घर हर महीने राशन पहुंचाने और उसके व्यक्तिगत खर्च के लिए हर सप्ताह 500 रुपये देने की बात भी समझौते में शामिल बताई गई। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, दोनों पक्षों ने इन शर्तों पर सहमति जताई और विवाद को आपसी स्तर पर सुलझाने का फैसला किया।

पारिवारिक विवाद ने खड़े किए सवाल

इस मामले ने पति की जिम्मेदारियों, दूसरी शादी और दोनों परिवारों के आर्थिक अधिकारों को लेकर चर्चा शुरू कर दी। हालांकि, पंचायत में हुआ समझौता अपने आप में कानूनी अधिकारों या वैवाहिक दायित्वों का अंतिम निर्धारण नहीं माना जा सकता। ऐसे मामलों में लागू कानून और संबंधित पक्षों के अधिकारों का महत्व बना रहता है।

सत्या रिपोर्ट डिस्क्लेमर: यह खबर उपलब्ध समाचार जानकारी के आधार पर तैयार की गई है। पंचायत के फैसले और समझौते से जुड़े विवरणों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं की गई है।

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