
मेरठ: चर्चित नीला ड्रम हत्याकांड में फांसी की सजा पा चुकी मुस्कान से कवयित्री अनामिका जैन अंबर ने जेल में मुलाकात की। मुलाकात के बाद उन्होंने कहा कि मुस्कान को उसके अपराध की सजा जरूर मिलनी चाहिए, लेकिन उसकी दोनों बच्चियों के भविष्य को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए। उन्होंने फांसी की सजा पर रोक लगाने की मांग करते हुए अदालत में अपील करने की बात कही है।
रिपोर्ट के मुताबिक, जैन मुनि आचार्य सौरभ सागर महाराज के जन्मदिन के अवसर पर जेल प्रशासन की अनुमति से अनामिका जैन अंबर और सौरभ जैन सुमन कैदियों को फल बांटने पहुंचे थे। इसी दौरान उन्होंने मुस्कान से भी मुलाकात की।
जेल से बाहर आने के बाद अनामिका ने कहा कि मुस्कान ने गंभीर अपराध किया है और उन्होंने मुलाकात के दौरान उसे इस बात का एहसास भी कराया। हालांकि, उनका कहना था कि मुस्कान की दोनों बच्चियों का इस अपराध में कोई दोष नहीं है। उन्होंने मुलाकात के दौरान मुस्कान की आंखों में पश्चाताप और अपनी बच्चियों से बिछड़ने का डर दिखाई देने की बात कही।
मुस्कान की फांसी टालने की मांग क्यों कर रही हैं अनामिका?
अनामिका जैन अंबर ने स्पष्ट किया कि उनकी सहानुभूति मुस्कान के अपराध को लेकर नहीं, बल्कि उसकी बच्चियों के भविष्य को लेकर है। उनका कहना है कि बच्चियों की परवरिश और भविष्य को देखते हुए मुस्कान की फांसी की सजा पर विचार किया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि वह दोनों बच्चियों की आर्थिक मदद करने के लिए तैयार हैं।
उनके साथ जेल पहुंचे सौरभ जैन सुमन ने भी बच्चियों की शिक्षा और भविष्य की जिम्मेदारी उठाने की इच्छा जताई। उन्होंने कहा कि बच्चियों की पढ़ाई-लिखाई और विवाह तक का खर्च उठाने के लिए वह तैयार हैं। दोनों ने अदालत से अपील करने की बात कही है कि बच्चियों के अपने पैरों पर खड़े होने तक मुस्कान की फांसी की सजा स्थगित रखी जाए।
क्या है नीला ड्रम हत्याकांड?
मेरठ में सामने आए इस हत्याकांड में मुस्कान और उसके प्रेमी साहिल पर उसके पति सौरभ राजपूत की हत्या करने का आरोप था। पुलिस के अनुसार, हत्या के बाद शव को टुकड़ों में काटकर नीले ड्रम में रखा गया था और उसे सीमेंट से ढक दिया गया था। बाद में मामले का खुलासा हुआ और दोनों आरोपियों को गिरफ्तार किया गया।
मामले की सुनवाई के बाद अदालत ने हत्या को गंभीर और जघन्य अपराध मानते हुए मुस्कान और साहिल को मृत्युदंड की सजा सुनाई थी। अनामिका जैन अंबर और सौरभ जैन सुमन की मांग अब मुस्कान की बच्चियों के भविष्य को आधार बनाकर सजा पर पुनर्विचार कराने की है। हालांकि, सजा में किसी भी तरह का बदलाव अदालत के फैसले पर निर्भर करेगा।
सत्या रिपोर्ट डिस्क्लेमर: यह खबर उपलब्ध मीडिया रिपोर्टों के आधार पर तैयार की गई है। मामले से जुड़े दावों और मुलाकात के दौरान कही गई बातों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं की गई है। सजा से संबंधित आगे की कानूनी कार्रवाई और निर्णय अदालत के अधिकार क्षेत्र में हैं।



