
मुंबई: फिल्मों में अपनी पहचान बनाने का सपना लेकर मुंबई आईं अभिनेत्री मीनाक्षी थापा को क्या पता था कि फिल्मी दुनिया में बनी जान-पहचान ही उनकी जिंदगी का अंत कर देगी। साल 2012 में सामने आए इस हत्याकांड ने मनोरंजन जगत को झकझोर दिया था। मामले में फिरौती की साजिश, परिचितों पर शक और पुलिस जांच के दौरान सामने आए सुरागों ने कई सवाल खड़े किए। करीब छह साल चली कानूनी प्रक्रिया के बाद अदालत ने इस मामले में दो आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाई।
फिल्म के सेट पर हुई थी आरोपियों से मुलाकात
मीनाक्षी थापा मूल रूप से देहरादून की रहने वाली थीं। अभिनय की दुनिया में करियर बनाने के लिए वह मुंबई पहुंची थीं। उन्होंने फिल्म ‘404’ में काम किया था और मधुर भंडारकर की फिल्म ‘हीरोइन’ में भी नजर आई थीं।
इसी दौरान उनकी मुलाकात अमित जायसवाल और प्रीति सुरीन से हुई। दोनों भी फिल्म इंडस्ट्री में जूनियर कलाकार के तौर पर काम कर रहे थे। जांच के मुताबिक, आरोपियों को लगता था कि मीनाक्षी का परिवार आर्थिक रूप से संपन्न है। इसी धारणा के आधार पर उन्होंने कथित तौर पर उसे अगवा कर परिवार से फिरौती मांगने की योजना बनाई।
नौकरी का झांसा देकर मुंबई से ले गए
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, 13 मार्च 2012 को अमित और प्रीति ने मीनाक्षी को काम दिलाने के बहाने उत्तर प्रदेश चलने के लिए राजी किया। इसके बाद तीनों मुंबई से ट्रेन के जरिए इलाहाबाद पहुंचे। आरोप है कि वहां मीनाक्षी को प्रीति के घर ले जाया गया, जहां उसकी हत्या कर दी गई।
हत्या के बाद आरोपियों ने कथित तौर पर मीनाक्षी के मोबाइल फोन से उसके परिवार को संदेश भेजकर 15 लाख रुपये की फिरौती मांगी। परिवार इतनी बड़ी रकम की व्यवस्था नहीं कर सका। इस बीच मीनाक्षी का पता नहीं चलने पर पुलिस ने उसकी तलाश और मामले की जांच शुरू कर दी।
मोबाइल फोन और बैंक से जुड़े सुरागों ने बढ़ाई जांच
जांच के दौरान मोबाइल फोन, सिम कार्ड, कॉल रिकॉर्ड और फोन की लोकेशन से पुलिस को अहम सुराग मिले। रिपोर्टों के अनुसार, मीनाक्षी के डेबिट कार्ड से पैसे निकालने की कोशिश भी जांच में महत्वपूर्ण साबित हुई।
16 अप्रैल 2012 को इलाहाबाद में एक सेप्टिक टैंक से मीनाक्षी का शव बरामद किया गया। शव की हालत ने मामले की गंभीरता और बढ़ा दी। पुलिस की जांच आगे बढ़ने पर अमित जायसवाल और प्रीति सुरीन की भूमिका सामने आई और दोनों को गिरफ्तार किया गया।
अदालत ने दोनों आरोपियों को सुनाई उम्रकैद
इस मामले में अभियोजन पक्ष ने आरोपियों के लिए मृत्युदंड की मांग की थी। हालांकि, मई 2018 में मुंबई की सत्र अदालत ने अमित जायसवाल और प्रीति सुरीन को हत्या और फिरौती के लिए अपहरण सहित संबंधित अपराधों में दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई।
मीनाक्षी थापा का मामला इस बात की गंभीर याद दिलाता है कि काम और करियर के सिलसिले में बने नए परिचय कभी-कभी खतरनाक परिस्थितियों में बदल सकते हैं। एक अभिनेत्री बनने का सपना लेकर घर से निकली युवती की जिंदगी इस साजिश में खत्म हो गई, जबकि उसके परिवार को लंबे समय तक अपनी बेटी के बारे में जवाब तलाशने पड़े।
सत्या रिपोर्ट डिस्क्लेमर: यह खबर उपलब्ध मीडिया रिपोर्टों और मामले से जुड़ी प्रकाशित जानकारी के आधार पर तैयार की गई है। घटनाक्रम का विवरण रिपोर्टों के अनुसार प्रस्तुत किया गया है।



