भारत और रूस की दोस्ती किसी से छिपी नहीं है. दोनों अपने बाइलेटरल ट्रेड को बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं. दोनों देशों ने साल 2030 तक अपने ट्रेड को 100 बिलियन डॉलर तक बढ़ाने का टारगेट रखा है. साथ बाइलेटरल निवेश को भी 50 बिलियन डॉलर तक बढ़ाने का विचार कर रहे हैं. जब से रूस और यूक्रेन वॉर शुरू हुआ है और पश्चिमी देशों ने मास्को पर प्रतिबंध लगाए हैं, तब से भारत और रूस के बीच कारोबार में काफी बढ़ोतरी हुई है. खासकर कच्चे तेल का इंपोर्ट काफी बढ़ा है. आइए आपको भी बताते हैं कि आखिर इस मामने में लेटेस्ट अपडेट किस तरह का सामने आया है.

100 बिलियन डॉलर का कारोबार
भारतीय राजदूत विनय कुमार ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने अपनीअपनी सरकारों को द्विपक्षीय सहयोग को और बढ़ाने का निर्देश दिया है. उन्होंने आगे बताया कि भारत और रूस का लक्ष्य 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ाकर 100 अरब डॉलर करना है. रूसी समाचार एजेंसी तास को दिए एक साक्षात्कार में भारतीय राजदूत कुमार ने कहा कि दोनों नेताओं ने 1213 सितंबर को नयी दिल्ली में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से इतर द्विपक्षीय संबंधों पर चर्चा की.
50 अरब डॉलर का निवेश
उन्होंने शनिवार को प्रकाशित इस साक्षात्कार में तास से कहा कि दोनों नेताओं ने संबंधित मंत्रालयों और एजेंसियों को व्यापार और वाणिज्य सहित सहयोग को और विकसित करने का निर्देश दिया है. कुमार ने कहा कि भारत और रूस 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 100 अरब डॉलर और द्विपक्षीय निवेश को 50 अरब डॉलर तक बढ़ाने की दिशा में काम कर रहे हैं.
ल कामगारों की आपूर्ति करना
श्रम सहयोग पर उन्होंने कहा कि भारत का लक्ष्य रूस की जरूरतों के अनुसार वहां कुशल कामगारों की आपूर्ति करना है. उन्होंने कहा कि विदेशी कामगारों के लिए रूस के कोटे में भारतीयों की हिस्सेदारी लगभग 25 से 30 प्रतिशत है. कुमार ने उल्लेख किया कि लगभग 1.5 अरब की आबादी वाला भारत, कुशल कर्मियों के लिए एक वैश्विक केंद्र बनने के लिए तैयार है. उन्होंने कहा कि भारत के कार्यबल की औसत आयु 29 वर्ष है, और कामगार आबादी का लगभग 69 प्रतिशत हिस्सा हैं.


