
ब्लड प्रेशर की समस्या अब केवल बुजुर्गों तक सीमित नहीं है। 18 साल की उम्र में पढ़ाई का दबाव, नींद की कमी, बदलती जीवनशैली, खानपान की गलत आदतें और शारीरिक गतिविधि की कमी दिल की सेहत को प्रभावित कर सकती हैं। इसलिए युवाओं के लिए भी समय-समय पर ब्लड प्रेशर की जांच करना जरूरी है।
अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन (AHA) के अनुसार, वयस्कों में ब्लड प्रेशर को अलग-अलग श्रेणियों में बांटा जाता है। 18 साल की उम्र में भी सामान्य वयस्क BP श्रेणियां उपयोगी होती हैं। हालांकि, किसी एक रीडिंग के आधार पर हाई या लो BP का निदान नहीं किया जाना चाहिए।
18 साल की उम्र में नॉर्मल, लो और हाई BP कितना होना चाहिए?
ब्लड प्रेशर को दो संख्याओं में मापा जाता है। ऊपर का नंबर सिस्टोलिक BP कहलाता है, जो दिल के धड़कने पर धमनियों में दबाव बताता है। नीचे का नंबर डायस्टोलिक BP है, जो दिल की दो धड़कनों के बीच दबाव दर्शाता है।
AHA के अनुसार वयस्कों में ब्लड प्रेशर की रेंज
| ब्लड प्रेशर की श्रेणी | रीडिंग (mmHg) |
|---|---|
| सामान्य BP | 120/80 से कम |
| बढ़ा हुआ BP | ऊपर का 120–129 और नीचे का 80 से कम |
| स्टेज-1 हाई BP | ऊपर का 130–139 या नीचे का 80–89 |
| स्टेज-2 हाई BP | ऊपर का 140 या अधिक, या नीचे का 90 या अधिक |
| गंभीर रूप से बढ़ा BP | ऊपर का 180 से अधिक और/या नीचे का 120 से अधिक |
लो BP की रेंज: आमतौर पर 90/60 mmHg से कम रीडिंग को निम्न रक्तचाप माना जाता है। हालांकि, कुछ लोगों का BP स्वाभाविक रूप से कम रहता है और उन्हें कोई परेशानी नहीं होती। चक्कर आना, कमजोरी, धुंधला दिखाई देना या बेहोशी जैसे लक्षण हों तो डॉक्टर से सलाह लें।
ध्यान रखें कि ऊपर या नीचे के नंबर में से कोई एक भी अधिक हो, तो BP की श्रेणी उसी के अनुसार तय हो सकती है। लगातार बढ़ी हुई रीडिंग आने पर चिकित्सकीय जांच जरूरी है।
18 साल की उम्र में हाई BP क्यों बढ़ सकता है?
युवावस्था में भी कई कारणों से ब्लड प्रेशर बढ़ सकता है। इनमें शामिल हैं:
- नमक और अत्यधिक प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों का ज्यादा सेवन
- नियमित व्यायाम या शारीरिक गतिविधि की कमी
- बढ़ता वजन
- पर्याप्त नींद न लेना
- लंबे समय तक तनाव में रहना
- तंबाकू का सेवन और शराब पीना
- किडनी या हार्मोन से जुड़ी कुछ स्वास्थ्य समस्याएं
लंबे समय तक अनियंत्रित हाई BP रहने से हृदय, रक्त वाहिकाओं और किडनी को नुकसान पहुंचने का खतरा बढ़ सकता है।
घर पर BP सही तरीके से कैसे मापें?
गलत तरीके से BP मापने पर रीडिंग वास्तविक स्तर से अधिक या कम आ सकती है। सही परिणाम के लिए इन बातों का ध्यान रखें:
1. जांच से पहले आराम करें: BP मापने से कम से कम 30 मिनट पहले चाय-कॉफी, धूम्रपान और व्यायाम से बचें। मापने से पहले लगभग पांच मिनट शांत बैठें।
2. सही मुद्रा में बैठें: पीठ को सहारा दें, दोनों पैर जमीन पर सपाट रखें और पैर क्रॉस न करें। हाथ को मेज पर इस तरह रखें कि कफ दिल के स्तर पर हो।
3. सही मॉनिटर चुनें: सही आकार वाले कफ के साथ प्रमाणित डिजिटल अपर-आर्म BP मॉनिटर का इस्तेमाल करें।
4. एक से ज्यादा रीडिंग लें: लगभग एक मिनट के अंतर पर दो रीडिंग लें और उन्हें नोट करें। कई दिनों की रीडिंग डॉक्टर को BP का सही आकलन करने में मदद कर सकती है।
BP कितना होने पर डॉक्टर के पास जाएं?
यदि BP बार-बार 130/80 mmHg या उससे अधिक आ रहा है, तो डॉक्टर से सलाह लें। यदि रीडिंग लगातार 90/60 mmHg से कम है और साथ में चक्कर, कमजोरी या अन्य लक्षण हैं, तो भी चिकित्सकीय जांच कराएं।
यदि BP 180/120 mmHg से अधिक आए, तो कम से कम एक मिनट बाद दोबारा मापें। रीडिंग इतनी ही बनी रहे तो तत्काल चिकित्सा सहायता लें। सीने में दर्द, सांस लेने में परेशानी, अचानक कमजोरी या सुन्नपन, नजर में बदलाव अथवा बोलने में कठिनाई हो तो आपातकालीन चिकित्सा सहायता लें।
दिल को स्वस्थ रखने के लिए अपनाएं ये आदतें
- रोजाना अपनी क्षमता के अनुसार शारीरिक गतिविधि करें।
- फल, सब्जियां, दालें और साबुत अनाज संतुलित मात्रा में खाएं।
- नमक और अत्यधिक प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों का सेवन सीमित रखें।
- पर्याप्त और नियमित नींद लें।
- तंबाकू से दूर रहें और तनाव को संभालने के लिए आराम या ध्यान का अभ्यास करें।
- डॉक्टर की सलाह के अनुसार समय-समय पर BP की जांच कराएं।
निष्कर्ष: 18 साल की उम्र में भी ब्लड प्रेशर पर ध्यान देना जरूरी है। सामान्य वयस्क श्रेणियों के अनुसार 120/80 mmHg से कम BP सामान्य माना जाता है, लेकिन सही आकलन के लिए मापने का तरीका, बार-बार आने वाली रीडिंग और व्यक्ति की स्वास्थ्य स्थिति को ध्यान में रखना चाहिए।
स्वास्थ्य संबंधी सूचना: यह लेख सामान्य स्वास्थ्य जागरूकता के लिए है, चिकित्सा सलाह का विकल्प नहीं। BP की एक रीडिंग से स्वयं निदान न करें। लगातार असामान्य रीडिंग या गंभीर लक्षण होने पर डॉक्टर से संपर्क करें।
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