
सौरभ दास ने कहा कि आंदोलन की आगे की रणनीति का फैसला सभी लोग मिलकर करेंगे। यह केवल सीजेपी का आंदोलन नहीं है, बल्कि इसमें कई दूसरे लोग भी शामिल हैं। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को इस्तीफा देना होगा।
कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेता सौरभ दास ने दावा किया कि उनका व्हाट्सऐप अकाउंट रोक दिया गया है। वह व्हाट्सऐप पर किसी को मैसेज नहीं भेज पा रहे हैं। दास ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर व्हाट्सऐप को टैग करते हुए लिखा, ‘मेरा व्हाट्सऐप अकाउंट प्रतिबंधित कर दिया गया है और मैं कोई नया संदेश नहीं भेज पा रहा हूं। व्हाट्सऐप, आखिर क्या हो रहा है?’ सौरभ दास का यह बयान ऐसे समय आया है, जब सीजेपी के नेता चुनाव आयोग की ओर से मतदाता सूची के SIR के खिलाफ अपना आंदोलन जारी रखने की बात कह रहे हैं। दास ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग भी दोहराई है।
सीजेपी नेता सौरव दास और अशुतोष रांका शुक्रवार को दिल्ली के मंदिर मार्ग थाने में विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट के सामने पेश हुए। दोनों नेता अपने खिलाफ दर्ज अलग-अलग मामलों के सिलसिले में पेश हुए थे। पेशी के बाद रांका ने कहा कि आंदोलन जारी रहेगा और वे उस मंच के जिम्मेदार हैं, जो देश के लोगों ने उन्हें दिया है। उन्होंने कहा कि वे अपनी ओर से पूरी कोशिश कर रहे हैं। जेल में रहने के दौरान भी आंदोलन जारी रहा। इस दौरान उन्हें खुद के बारे में और सरकार के काम करने के तरीके के बारे में काफी कुछ जानने को मिला है। आगे जरूरत के हिसाब से वे अपनी रणनीति में बदलाव करेंगे।
सौरभ दास ने कहा कि आंदोलन की आगे की रणनीति का फैसला सभी लोग मिलकर करेंगे। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह केवल सीजेपी का आंदोलन नहीं है, बल्कि इसमें कई दूसरे लोग भी शामिल हैं। दास ने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को इस्तीफा देना होगा। सीजेपी एसआईआर प्रक्रिया का विरोध कर रही है और इसी मांग को लेकर लगातार प्रदर्शन कर रही है। संगठन का आरोप है कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण को लेकर उठाए जा रहे कदमों पर सवाल हैं। हालांकि, SIR के खिलाफ आंदोलन के दौरान सीजेपी नेताओं की पुलिस कार्रवाई और कानूनी मामलों ने भी ध्यान खींचा है।
बीते 13 अक्टूबर को रांका, दास और दूसरे कार्यकर्ताओं ने भारी बैरिकेडिंग वाले जंतर-मंतर इलाके में प्रवेश किया था। वहां तिरंगा फहराने के बाद उन्हें हिरासत में ले लिया गया था। इसके बाद संगठन ने अपना विरोध जारी रखा और कनॉट प्लेस में तिरंगा मार्च निकालने का आह्वान भी किया। रांका और दास को 14 अक्टूबर को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया था। बाद में उनकी हिरासत बढ़ाई गई, लेकिन 21 अक्टूबर को विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट ने दोनों को रिहा करने का आदेश दिया।



