सार्वजनिक क्षेत्र के इंडियन ओवरसीज बैंक ने चालू वित्त वर्ष 202627 की दूसरी तिमाही में शानदार प्रदर्शन किया है. जुलाई से सितंबर 2026 के दौरान बैंक का एकीकृत शुद्ध लाभ सालाना आधार पर 55.9% बढ़कर 1,962.67 करोड़ रुपए हो गया. पिछले वित्त वर्ष 202526 की इसी तिमाही में बैंक ने 1,258.82 करोड़ रुपए का मुनाफा कमाया था. बैंक के मुनाफे में बढ़ोतरी की मुख्य वजह ब्याज से होने वाली कमाई में वृद्धि और खराब कर्ज में सुधार है.

ब्याज से होने वाली कमाई में बढ़ोतरी
बैंक की शुद्ध ब्याज आय में भी अच्छी बढ़ोतरी दर्ज की गई. दूसरी तिमाही में यह 26.41% बढ़कर 3,867 करोड़ रुपए हो गई, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह 3,059 करोड़ रुपए थी. शुद्ध ब्याज आय का मतलब बैंक को कर्ज पर मिलने वाले ब्याज और जमा पर दिए जाने वाले ब्याज के बीच का अंतर है.
बैंक का घरेलू शुद्ध ब्याज मार्जिन भी बढ़ा है. 30 सितंबर 2026 को यह 3.49% रहा, जबकि जून 2026 में 3.48% और सितंबर 2025 में 3.35% था. इसके अलावा, बैंक के कुल कर्ज में सालाना आधार पर 24.35% की बढ़ोतरी हुई.
गैरब्याज आय में आई गिरावट
हालांकि, बैंक की गैरब्याज आय में कमी आई. दूसरी तिमाही में यह 10.11% घटकर 1,227 करोड़ रुपए रह गई, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह 1,365 करोड़ रुपए थी.
बैंक के प्रबंध निदेशक और सीईओ अजय कुमार श्रीवास्तव के मुताबिक, इसकी मुख्य वजह प्राथमिकता क्षेत्र ऋण प्रमाणपत्रों से होने वाली आय का नहीं मिलना है. पहली तिमाही में बैंक को इससे करीब 900 करोड़ रुपए का कमीशन मिला था, लेकिन दूसरी तिमाही में ऐसी कोई आय नहीं हुई.
जमा राशि बढ़ी, खराब कर्ज में सुधार
सितंबर तिमाही में बैंक की कुल जमा राशि 20.16% बढ़कर 4.07 लाख करोड़ रुपए हो गई. एक साल पहले यह 3.39 लाख करोड़ रुपए थी. चालू और बचत खातों में 20.73% की बढ़ोतरी ने भी जमा राशि बढ़ाने में मदद की.
एकल आधार पर बैंक का शुद्ध लाभ 56% बढ़कर 1,912 करोड़ रुपए रहा. वहीं, बैंक की ब्याज आय बढ़कर 9,201 करोड़ रुपए हो गई, जो पिछले साल 7,849 करोड़ रुपए थी.
बैंक की संपत्ति की गुणवत्ता में भी सुधार हुआ. सितंबर 2026 में सकल NPA अनुपात घटकर 1.19% पर आ गया, जो जून 2026 में 1.33% और सितंबर 2025 में 1.83% था. इससे पता चलता है कि बैंक के खराब कर्ज का स्तर पहले के मुकाबले कम हुआ है.



