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​Share Market Tax: क्या शेयर बाजार में खत्म होगा डबल टैक्स का बोझ? LTCG और STT नियमों की समीक्षा में जुटी सरकार

Share Market Tax: भारतीय शेयर बाजार से विदेशी निवेशक लगातार अपना पैसा निकाल रहे हैं. इस माहौल के बीच केंद्र सरकार ने बाजार के टैक्स नियमों को लेकर एक बड़ा कदम उठाया है. मामले की जानकारी रखने वाले लोगों के मुताबिक, सरकार ने लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स टैक्स और सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स को लेकर निवेशकों, मार्केट से जुड़े लोगों और टैक्स एक्सपर्ट्स से उनकी राय मांगी है. इस कवायद का मकसद निवेशकों की चिंताओं को समझना और उनके सुझाव जानना है.

​Share Market Tax: क्या शेयर बाजार में खत्म होगा डबल टैक्स का बोझ?  LTCG और STT नियमों की समीक्षा में जुटी सरकार

ये कदम वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के 13 अक्टूबर के उस बयान के बाद सामने आया है, जो उन्होंने दिल्ली के एक कार्यक्रम में दिया था. वित्त मंत्री ने इस मुद्दे पर कहा था कि इस पर काफी बहस चल रही है. उन्होंने साफ किया था कि हम बजट के बेहद करीब हैं और इसकी तैयारियां शुरू हो चुकी हैं. इसलिए अभी ये कहना सही नहीं होगा कि किस बात पर विचार किया जाएगा या किस पर नहीं. वित्त मंत्री ने ये भी माना था कि देश और विदेश के निवेशकों के साथ बातचीत में ये मुद्दा उनके सामने भी उठ चुका है. उनके इस बयान के बाद शेयर बाजार में तेजी भी देखने को मिली थी.

बाजार से घटता विदेशी निवेश

सितंबर 2024 के अपने उच्चतम स्तर से भारतीय शेयर बाजार की मार्केट वैल्यू में 924 अरब डॉलर की भारी गिरावट आ चुकी है. एक तरफ विदेशों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़े शेयरों में भारी उछाल है, तो दूसरी तरफ भारतीय इक्विटी बाजार से विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक बड़ा पैसा निकाल रहे हैं. इसी वजह से बाजार को सहारा देने और विदेशी पूंजी को वापस लाने के लिए इन टैक्सों में ढील देने की मांग तेज हो गई है.

इसी साल जून में सरकार ने सरकारी सिक्योरिटीज से मिलने वाले ब्याज पर FPI को LTCG और विदहोल्डिंग टैक्स से छूट दी थी. इस फैसले के बाद इक्विटी मार्केट के लिए भी ऐसी ही राहत की उम्मीद बढ़ गई है.

डबल टैक्स से परेशान हैं निवेशक

बाजार से जुड़े लोगों ने एक ही ट्रांजैक्शन पर LTCG और STT दोनों लगाए जाने का मुद्दा उठाया है. वे इसे डबल टैक्सेशन यानी दोहरा टैक्स बता रहे हैं. मौजूदा नियमों के मुताबिक, 12 महीने से ज्यादा समय तक शेयर रखने पर घरेलू और विदेशी दोनों निवेशकों को 12.5% LTCG टैक्स देना पड़ता है. सेस और सरचार्ज मिलाकर ये करीब 15% बैठता है. इसके अलावा, शेयर खरीदने और बेचने वाले दोनों पर 0.1% का STT लगता है. साथ ही खरीदार को 0.015% की स्टांप ड्यूटी भी देनी होती है.

KPMG के सीनियर एडवाइजर सुधीर कपाड़िया का कहना है कि आज के अस्थिर वैश्विक माहौल में भारत को अमेरिका, ब्रिटेन, सिंगापुर, हांगकांग, दक्षिण कोरिया और ताइवान जैसे देशों से मुकाबला करना है. ये सभी देश अपने यहां ट्रेड होने वाली सिक्योरिटीज पर विदेशी निवेशकों से कैपिटल गेन्स टैक्स नहीं वसूलते हैं. भारत एक अपवाद है जहां एक ही सौदे पर दोनों टैक्स लगते हैं. कपाड़िया ने सुझाव दिया कि विदेशी निवेशकों पर से कैपिटल गेन्स टैक्स हटाकर STT को थोड़ा बढ़ा दिया जाए. इससे सरकार के राजस्व पर असर नहीं पड़ेगा और हाईफ्रीक्वेंसी ट्रेडिंग पर भी लगाम लगेगी.

सरकारी खजाने पर पड़ेगा असर

सरकार के लिए टैक्स में छूट देने का फैसला लेना आसान नहीं होगा. कोई भी कदम उठाने से पहले सरकारी खजाने पर पड़ने वाले असर को देखना होगा. पश्चिम एशिया के संघर्ष की वजह से खाद सब्सिडी का बिल बढ़ गया है. इसके अलावा बड़े सामाजिक कार्यक्रमों के लिए भी फंड की जरूरत है. वहीं, कुछ विपक्षी आवाजों ने ये मुद्दा भी उठाया है कि ये टैक्स हटाने से राज्यों के साथ बांटे जाने वाले टैक्स के हिस्से में बड़ी कमी आ जाएगी.

सरकारी आंकड़ों पर नजर डालें तो वित्त वर्ष 2025 में कुल LTCG कलेक्शन 1.29 लाख करोड़ रुपये रहा. ये उससे पिछले साल के 72,249 करोड़ रुपये के मुकाबले लगभग दोगुना है. वहीं, वित्त वर्ष 2026 में STT कलेक्शन 57,522 करोड़ रुपये रहा. 1 अप्रैल से 14 अक्टूबर के बीच STT कलेक्शन 52% बढ़कर 46,840 करोड़ रुपये पर पहुंच गया है.

बजट 2027 से क्या हैं उम्मीदें

EY इंडिया के टैक्स लीडर समीर गुप्ता का कहना है कि वैश्विक स्तर पर किसी भी बड़े बाजार में विदेशी निवेशकों को कैपिटल गेन्स टैक्स नहीं देना पड़ता, जबकि भारत में दोहरी मार है. उन्होंने कहा कि टाइगर ग्लोबल मामले के फैसले के बाद विदेशी निवेशकों को टैक्स को लेकर स्पष्टता देना भी बेहद जरूरी है. बता दें कि जनवरी में सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया था कि फ्लिपकार्ट में अपनी हिस्सेदारी वॉलमार्ट को बेचने से टाइगर ग्लोबल को जो 1.6 अरब डॉलर का फायदा हुआ, उस पर भारत में टैक्स लगेगा. कोर्ट ने भारतमॉरीशस समझौते के तहत छूट के दावे को खारिज कर दिया था.

प्राइस वॉटरहाउस एंड कंपनी के पार्टनर प्रतीक जैन के मुताबिक, वैश्विक स्तर पर ऊंची ब्याज दरों और करेंसी के उतारचढ़ाव के बीच 1 फरवरी को पेश होने वाला बजट 2027 टैक्स नियमों को सुधारने का एक अच्छा मौका है. जैन ने याद दिलाया कि STT को LTCG के विकल्प के तौर पर लाया गया था, न कि एक अतिरिक्त टैक्स के रूप में. उन्होंने सुझाव दिया कि लंबे समय तक निवेश रखने पर जीरो LTCG रेट होना चाहिए, या फिर कैपिटल गेन्स टैक्स में STT को एडजस्ट करने की छूट मिलनी चाहिए. इससे लंबे समय तक पैसा लगाने वाले निवेशकों को बढ़ावा मिलेगा.

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