बंगाल की खाड़ी से उठे चक्रवात अर्नब का असर नजर आ रहा है. कई राज्यों में भारी बारिश का रेड अलर्ट जारी किया गया है. भारतीय मौसम विभाग के मंगलवार दोपहर के बुलेटिन के मुताबिक, यह तूफान पिछले छह घंटों में 25 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से पश्चिमउत्तरपश्चिम दिशा में आगे बढ़ा है. 28 अक्टूबर की सुबह आंध्र प्रदेश के तट से टकराने की आशंका है. हवा की रफ्तार 115 से 125 किलोमीटर प्रति घंटा रह सकती है. अर्नब तूफान को यह नाम बांग्लादेश ने दिया है.

बांग्ला भाषा में अर्नब का अर्थ ‘महासागर’ है. कुछ रिपोर्ट्स में इसका अर्थ ‘समुद्र’ भी बताया गया है. नाम का किसी व्यक्ति विशेष से कोई संबंध नहीं है.
अर्नब नाम कैसे रखा गया?
उत्तर हिंद महासागर में उठने वाले चक्रवातों के नाम कोई एक देश तय नहीं करता. इसके लिए क्षेत्र के 13 देशों का एक पैनल है, जिसमें भारत, बांग्लादेश, पाकिस्तान, श्रीलंका, म्यांमार, थाईलैंड, ओमान, कतर, सऊदी अरब, यूएई और यमन जैसे देश शामिल हैं. हर देश ने भविष्य के चक्रवातों के लिए 1313 नाम दिए हैं.
पुरानी सूची खत्म होने के बाद नई सूची बनी. 2004 की सूची में आखिरी नाम ‘अम्फान’ था, जो थाईलैंड ने दिया था, और उसके बाद IMD ने नई सूची जारी की. इसी नई सूची में बांग्लादेश के सुझाए नाम निसर्ग, बिपरजॉय और अर्नब शामिल हैं. WMO की सूची में बांग्लादेश के कॉलम में अर्नब, बिपरजॉय के बाद आता है. इनमें से निसर्ग और बिपरजॉय पहले के तूफानों को दिए जा चुके हैं.
तमिलनाडु के थूथुकुडी में चक्रवात की चेतावनी के बाद सोमवार को मछली पकड़ने वाली नावें एक मछली पकड़ने वाले बंदरगाह पर लंगर डाले खड़ी रहीं. फोटो: PTI
नाम चुनने के नियम क्या हैं?
चक्रवात का नाम चुनने के पीछे भी कुछ शर्तें हैं. नाम राजनीति, राजनीतिक हस्तियों, धार्मिक मान्यताओं, संस्कृतियों और जेंडर के मामले में तटस्थ होना चाहिए. नाम छोटा और आसानी से समझ में आने वाला होना चाहिए. नाम से कोई भी समुदाय आहत न हो. तूफानों का नाम रखने का मकसद सीधा है कि एक ही समय में कई तूफान सक्रिय हों तो लोग और एजेंसियां उनको लेकर चेतावनी को समझ सकें.
आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम में तूफान के तट से टकराने से पहले बारिश हुई. फोटो:PTI
हर सिस्टम को नाम नहीं मिलता
नाम तभी दिया जाता है जब सिस्टम चक्रवाती तूफान की तीव्रता तक पहुंच जाए. सितंबर में इसी वजह से भ्रम फैला था. तब बंगाल की खाड़ी का सिस्टम डीप डिप्रेशन की स्थिति में ही रहा, इसलिए उसे ‘चक्रवात अर्नब’ कहना तकनीकी रूप से सही नहीं था. इस बार का सिस्टम चक्रवाती तूफान की श्रेणी पार कर चुका है.



