
गाईघाटा, उत्तर 24 परगना, पश्चिम बंगाल: पश्चिम बंगाल में नाबालिग छात्रा से दुष्कर्म और हत्या के मामले में गिरफ्तार आरोपी की पुलिस की गोली लगने से मौत हो गई। पुलिस का दावा है कि अपराध से जुड़े घटनाक्रम की जांच के दौरान आरोपी ने एक सब-इंस्पेक्टर की सर्विस रिवॉल्वर छीनकर गोली चलाई थी। इसके बाद पुलिस ने जवाबी फायरिंग की, जिसमें आरोपी प्रह्लाद दास मारा गया। घटना के बाद राज्य में पुलिस की कार्रवाई की तुलना उत्तर प्रदेश की पुलिस शैली से की जाने लगी है।
पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने पुलिस की कार्रवाई का बचाव करते हुए कहा कि कानून हाथ में लेने वालों के खिलाफ पुलिस मूकदर्शक बनकर नहीं रह सकती। उन्होंने महिलाओं की सुरक्षा और नशीले पदार्थों के खिलाफ कार्रवाई के मामलों में पुलिस को जरूरी कदम उठाने की स्वतंत्रता देने की बात भी कही।
क्या हुआ था घटना वाली रात?
यह मामला उत्तर 24 परगना जिले के गाईघाटा का है। रिपोर्ट के अनुसार, 24 अक्टूबर की रात 11वीं कक्षा में पढ़ने वाली 17 वर्षीय छात्रा अपने घर के पास आयोजित एक संगीत कार्यक्रम के बाद लापता हो गई थी। अगले दिन सुबह उसका शव एक रिश्तेदार के घर के पीछे मिला।
शुरुआती जांच के दौरान छात्रा के शरीर पर कई चोटों के निशान पाए गए थे। उसके सिर और चेहरे पर भी चोटें थीं। पुलिस को दुष्कर्म और हत्या की आशंका हुई। परिवार की शिकायत के आधार पर प्रह्लाद दास को गिरफ्तार किया गया और मामले की जांच शुरू की गई।
घटना ने इलाके में चिंता और आक्रोश का माहौल पैदा कर दिया। पुलिस आरोपी से पूछताछ कर रही थी और मामले से जुड़े घटनाक्रम की जांच के लिए उसे घटनास्थल पर ले जाया गया था।
पुलिस ने एनकाउंटर को लेकर क्या दावा किया?
पुलिस के मुताबिक, सोमवार रात घटनास्थल से लौटते समय आरोपी ने गाड़ी से उतरकर शौच जाने की इच्छा जताई। वाहन रुकने के बाद उसने कथित तौर पर एक सब-इंस्पेक्टर की सर्विस रिवॉल्वर छीन ली और पुलिसकर्मियों पर गोली चला दी।
पुलिस का कहना है कि आरोपी ने तीन राउंड फायरिंग की। इसके बाद पुलिसकर्मियों ने जवाबी कार्रवाई करते हुए चार राउंड गोलियां चलाईं, जिनमें आरोपी को गोली लगी। उसे गंभीर चोटें आईं और उसकी मौत हो गई। इस घटनाक्रम में एक सब-इंस्पेक्टर को मामूली चोट लगने और पुलिस वाहन के क्षतिग्रस्त होने की भी जानकारी दी गई है।
पुलिस ने गोलीबारी को आत्मरक्षा में की गई कार्रवाई बताया है। हालांकि, घटना के सभी पहलुओं और पुलिस के दावे की स्वतंत्र पुष्टि के लिए जांच से जुड़ी आधिकारिक जानकारी महत्वपूर्ण होगी।
शुभेंदु अधिकारी ने पुलिस का किया बचाव
मंगलवार शाम पुलिस मुख्यालय में वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक के बाद शुभेंदु अधिकारी ने कार्रवाई का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि पुलिस एनकाउंटर के कारणों के बारे में पहले ही जानकारी दे चुकी है और जब कोई कानून अपने हाथ में लेता है, तब पुलिस चुपचाप तमाशा नहीं देख सकती।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार महिलाओं की सुरक्षा और नशीले पदार्थों की समस्या से निपटने को प्राथमिकता दे रही है। इन मामलों में पुलिस को आवश्यक कार्रवाई करने की स्वतंत्रता दी गई है। उन्होंने यह भी कहा कि वह अपने कर्तव्यों का पालन करने वाली पुलिस के साथ खड़े रहेंगे और राज्य में कानून का शासन स्थापित करना चाहते हैं।
उनके बयान के बाद यह मामला केवल अपराध तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पुलिस की कार्यशैली और कानून-व्यवस्था को लेकर राजनीतिक चर्चा का विषय भी बन गया।
पहले भी सामने आया था ऐसा मामला
रिपोर्ट में दक्षिण 24 परगना जिले के बारुईपुर में जुलाई में हुई एक अन्य घटना का भी उल्लेख है। उस मामले में बच्चों के साथ दुष्कर्म और हत्या के आरोपी प्रभास मंडल को अपराध से जुड़े घटनाक्रम की जांच के दौरान गोली लगी थी। पुलिस के अनुसार, उसने भी एक सब-इंस्पेक्टर की बंदूक छीनकर गोली चलाने की कोशिश की थी।
उस समय भी पुलिस की कार्रवाई चर्चा में रही थी। अब गाईघाटा की घटना के बाद राज्य में एक बार फिर पुलिस की जवाबी फायरिंग और अपराधियों से निपटने के तरीके पर बहस शुरू हो गई है।
पीड़िता के परिवार ने क्या कहा?
पीड़िता के माता-पिता ने आरोपी की मौत के बाद कहा कि उनकी बेटी अब वापस नहीं लौट सकती, लेकिन आरोपी की मौत से उन्हें कुछ राहत महसूस हुई है। परिवार ने अपनी बेटी को खोने का दर्द व्यक्त करते हुए कहा कि वे उसे कभी वापस नहीं पा सकेंगे।
इस मामले में दुष्कर्म और हत्या के आरोपों की जांच तथा पुलिस की कार्रवाई से जुड़े तथ्यों का आधिकारिक रिकॉर्ड महत्वपूर्ण रहेगा। आरोपी की मौत के बाद अब घटना से जुड़े शेष सवालों और पुलिस की कार्रवाई की परिस्थितियों को स्पष्ट करने के लिए उपलब्ध जांच रिपोर्टों पर नजर रहेगी।
सत्य रिपोर्ट डिस्क्लेमर: यह खबर उपलब्ध मीडिया रिपोर्ट और पुलिस के बयानों के आधार पर तैयार की गई है। एनकाउंटर से जुड़ी परिस्थितियों के बारे में पुलिस के दावों को स्वतंत्र जांच और आधिकारिक दस्तावेजों के आधार पर परखा जाना चाहिए।



