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CJI सूर्यकांत पर टिप्पणी कर बुरी फंसी केरल कांग्रेस, बिना शर्त मांगी माफी; सोशल मीडिया की अपनी गलती भी मानी

CJI सूर्यकांत पर टिप्पणी कर बुरी फंसी केरल कांग्रेस, बिना शर्त मांगी माफी; सोशल मीडिया की अपनी गलती भी मानी

तिरुवनंतपुरम, केरल: भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत को लेकर सोशल मीडिया पर की गई विवादित टिप्पणी के मामले में केरल प्रदेश कांग्रेस कमेटी (KPCC) ने बिना शर्त माफी मांगी है। पार्टी ने स्वीकार किया कि उसके आधिकारिक एक्स अकाउंट से प्रकाशित पोस्ट की भाषा अनुचित थी और इसे पार्टी नेतृत्व की जानकारी या मंजूरी के बिना साझा किया गया था।

केरल कांग्रेस के अध्यक्ष सनी जोसेफ ने सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के संयुक्त सचिव और अधिवक्ता मीनेश दुबे की ओर से भेजे गए कानूनी नोटिस के जवाब में यह माफी दी। पार्टी ने स्पष्ट किया कि विवादित पोस्ट में इस्तेमाल की गई भाषा कांग्रेस की आधिकारिक नीति या रुख को नहीं दर्शाती। साथ ही, उसने अपने सोशल मीडिया अकाउंट के संचालन और पोस्ट को मंजूरी देने की व्यवस्था में संभावित कमियों को भी स्वीकार किया है।

आखिर किस पोस्ट पर शुरू हुआ विवाद?

जानकारी के मुताबिक, 12 अक्टूबर को केरल कांग्रेस के आधिकारिक एक्स अकाउंट से मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत को संबोधित करते हुए एक पोस्ट साझा की गई थी। इसमें उनसे इस्तीफा देने की मांग की गई थी। पोस्ट में कहा गया था कि यदि कानून-व्यवस्था उनके अधिकार क्षेत्र का विषय नहीं है, तो उन्हें पद छोड़ देना चाहिए। साथ ही, उनकी जगह किसी अन्य व्यक्ति को जिम्मेदारी देने की बात भी कही गई थी।

पोस्ट सामने आने के बाद विवाद बढ़ गया। बाद में इसे हटा दिया गया और पार्टी ने इसके लिए जिम्मेदार व्यक्ति विजय थोट्टाथिल को उनके पद से हटा दिया। पार्टी की ओर से उन्हें सार्वजनिक रूप से माफी मांगने के लिए भी कहा गया।

कानूनी नोटिस के जवाब में कांग्रेस ने क्या कहा?

केरल कांग्रेस अध्यक्ष सनी जोसेफ ने अपने जवाब में कहा कि विवादित पोस्ट पार्टी नेतृत्व की जानकारी, पूर्व अनुमति या सहमति के बिना प्रकाशित हुई थी। उन्होंने पोस्ट की भाषा को अनुचित बताते हुए मुख्य न्यायाधीश के संवैधानिक पद के प्रति प्रदर्शित अनादर के लिए बिना शर्त माफी मांगी।

पार्टी ने यह भी स्पष्ट किया कि किसी आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट से पोस्ट प्रकाशित होने का अर्थ यह नहीं है कि उसमें लिखी गई हर बात पार्टी नेतृत्व की स्वीकृत राय है। कांग्रेस ने न्यायपालिका की स्वतंत्रता, संविधान और मुख्य न्यायाधीश के पद की गरिमा के प्रति अपना सम्मान दोहराया।

सोशल मीडिया की निगरानी में अपनी गलती मानी

इस पूरे विवाद में केरल कांग्रेस ने केवल माफी ही नहीं मांगी, बल्कि अपने डिजिटल संचार तंत्र की समीक्षा की जरूरत भी स्वीकार की। पार्टी के अनुसार, आधिकारिक अकाउंट तक पहुंच रखने वाले लोगों, पोस्ट प्रकाशित करने के अधिकार और सामग्री को मंजूरी देने की प्रक्रिया की जांच की जाएगी।

पार्टी ने माना कि किसी बाहरी पेशेवर एजेंसी से सोशल मीडिया संचालन की सेवाएं लेने के बावजूद अंतिम निगरानी की जिम्मेदारी संगठन की ही रहती है। इसलिए यह देखना जरूरी है कि पोस्ट तैयार करने, उसकी समीक्षा करने और उसे प्रकाशित करने के दौरान कहां चूक हुई।

KPCC ने कहा कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए आंतरिक प्रक्रियाओं को बेहतर बनाया जाएगा। मामले से संबंधित इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड, अकाउंट एक्सेस लॉग, मंजूरी से जुड़े दस्तावेज और आंतरिक संवाद सुरक्षित रखने की बात भी कही गई है।

न्यायपालिका की आलोचना और अपमानजनक भाषा में क्या अंतर बताया?

केरल कांग्रेस ने अपने जवाब में कहा कि न्यायिक फैसलों से असहमति जताना और न्यायपालिका के संवैधानिक पद की गरिमा को ठेस पहुंचाने वाली भाषा का इस्तेमाल करना अलग-अलग बातें हैं। राजनीतिक विचारों में मतभेद होने का मतलब यह नहीं कि किसी पद के प्रति अनुचित टिप्पणी को सही ठहराया जा सकता है।

सनी जोसेफ ने विवादित पोस्ट को व्यक्तिगत रूप से निर्देशित करने, मंजूरी देने या उसका समर्थन करने से इनकार किया। पार्टी ने यह भी कहा कि किसी व्यक्ति या नेता पर पोस्ट को अधिकृत करने का आरोप बिना पर्याप्त साक्ष्य के नहीं लगाया जाना चाहिए।

कांग्रेस ने यह भी कहा कि उसकी सफाई और माफी को उसी आधिकारिक सोशल मीडिया मंच पर साझा किया जाएगा, जहां पहले विवादित पोस्ट प्रकाशित हुई थी, ताकि लोगों तक पार्टी का पक्ष भी पहुंच सके।

सत्य रिपोर्ट डिस्क्लेमर: यह खबर उपलब्ध मीडिया रिपोर्ट और पार्टी के कथित कानूनी जवाब में दी गई जानकारी के आधार पर तैयार की गई है। मामले से जुड़े मूल कानूनी दस्तावेजों और आधिकारिक बयानों को अंतिम पुष्टि के लिए देखा जाना चाहिए।

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