India

​Israel Election: टेक्नोलॉजी के हब इजराइल में वोटों की गिनती मैन्युअली क्यों होती है?

Israel Election: टेक्नोलॉजी के हब कहे जाने वाले इजराइल में संसदीय चुनाव के लिए मतदान हो गया है. वोटों की गिनती जारी है. नतीजे 4 नवंबर को आएंगे. इस बीच एग्जिट पोल के नतीजे चौंका रहे हैं. पोल के नतीजों में किसी को भी बहुमत नहीं मिला है. द टाइम्स ऑफ इजराइल की रिपोर्ट के मुताबिक, बेंजामिन नेतन्याहू के गठबंधन को 59 और विपक्षी गुट को 46 सीटें मिलती दिख रही हैं. इजराइली संसद में 120 सीटें हैं, लेकिन सरकार बनाने के लिए 61 सीटें मिलना अनिवार्य हैं.

​Israel Election: टेक्नोलॉजी के हब इजराइल में वोटों की गिनती मैन्युअली क्यों होती है?

एग्जिट पोल के बाद अब सबकी नजरें नतीजों पर अटकी हैं. दिलचस्प बात है कि टेक्नोलॉजी का हब कहे जाने वाले इजराइल में वोटों की काउंटिंग मैनुअली क्यों होती है और कैसे होती है यहां मतगणना?

क्यों मैनुअली होती है मतगणना?

साइबर टेक्नोलॉजी के लिए मशहूर इजराइल में मतदान में के लिए न तो न EVM है और न ही ऑनलाइन वोटिंग. यहां गिनती भी मशीन से नहीं होती. टाइम्स ऑफ इजराइल के मुताबिक, इस बार 12,000 से ज्यादा मतदान केंद्र बने. 18,000 मतपेटियां थीं और लगभग 1 लाख कर्मचारी तैनात किए गए. वोटिंग बैलेट पेपर से हुई. हर चुनाव की तरह इस बार भी यह बात मुद्दा बनी कि इजराइल में चुनाव मैनुअली क्यों होते हैं. कई ओपिनियंस में यह कहा गया है कि हाईटेक देश में हाथ से वोट गिनना शर्मनाक है.

इजराइल में मतगणना की प्रक्रिया मैन्युअल है. फोटो: Getty Images

दरअसल, इसकी वजह तकनीक की कमी नहीं, बल्कि साइबर हमले का डर है. Ynet की रिपोर्ट के अनुसार वोटिंग सिर्फ कागज के मतपत्र से इसलिए कराई जाती है ताकि चुनाव प्रक्रिया पर साइबर हमले की गुंजाइश कम से कम रहे. सेंट्रल इलेक्शन कमेटी के कार्यवाहक महानिदेशक डीन लिवने के मुताबिक इस सिस्टम में कई परतें हैं. कागजी मतपत्र, हस्ताक्षर किए गए प्रोटोकॉल, तस्वीरें, कई स्तर की जांच, न्यायिक निगरानी और एक ऑफलाइन केंद्रीय सिस्टम. उन्होंने यह भी बताया कि इजराइल में हर वोटर सिर्फ एक सूची को वोट देता है, इसलिए कागजी तरीका यहां खास तौर पर कारगर बैठता है.

सेंट्रल इलेक्शन कमेटी की पूर्व महानिदेशक ओर्ली अदास ने इसके पीछे तर्क दिया है. उनका कहना है कि चुनाव में कम से कम तकनीक का इस्तेमाल ही उसकी ताकत है. उन्होंने फ्रांस, ब्रिटेन, कनाडा और जर्मनी जैसे देशों का हवाला दिया जो कागजी मतपत्र और हाथ से गिनती करते हैं. भारत में EVM के साथ कागजी पर्ची की व्यवस्था है, जबकि ब्राजील पूरी तरह इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग करता है. CEC फिलहाल वोट डालने की बजाय चुनावी प्रशासन का हिस्सा कम्प्यूटराइज्ड करने पर काम कर रही है.

वोटो की मैन्युअल मतगणना की वजह तकनीक की कमी नहीं, बल्कि साइबर हमले का डर है.

इजराइल में कैसे होती है मतगणना?

इजराइल में वोटर पार्टी को वोट देता है, उम्मीदवार को नहीं. केंद्र पर वोटर अपनी पहचान दिखाता है और उसे एक लिफाफा मिलता है. मतदाता को मतपत्र पर कुछ लिखना या निशान नहीं लगाना होता. वह अपनी पसंदीदा पार्टी के अक्षरों वाली छपी हुई पर्ची चुनकर लिफाफे में डालता है और लिफाफा मतपेटी में डाल देता है. गिनती के समय अधिकारी इन्हीं पर्चियों पर छपे चिह्न देखते हैं.

हर मतदान केंद्र की एक समिति होती है. टाइम्स ऑफ इजराइल के अनुसार इसमें CEC द्वारा नियुक्त सचिव, तीन पार्टीसमर्थित पर्यवेक्षक और एक सरकारी खर्च पर नियुक्त निरीक्षक होते हैं, जबकि बाहर पुलिस अधिकारी तैनात रहता है. वोटिंग बंद होने के बाद यही समिति मतपत्र गिनती है.

प्रक्रिया धीमी लेकिन पारदर्शी है. मतगणना कर्मचारी हर मतपत्र खोलते हैं, अलगअलग टैली रखते हैं, और फिर हर पर्ची को पार्टी के हिसाब से एक लंबी कतार में जोड़ दिया जाता है. CEC के प्रवक्ता गियोरा पोर्डेस ने पिछले चुनाव में बताया था कि समिति सदस्यों को मतपत्र दो बार गिनने होते हैं, फिर प्रोटोकॉल नाम के फॉर्म पर पेन से हर पार्टी के वोट और कुल मतदान लिखा जाता है, और दोनों का जोड़ मेल खाना जरूरी है.

बैलेट स्लिप में पार्टी का कोड और नाम लिखा होता है, इससे मतदान होता है. फोटो: Getty Images

कौन से वोट रद्द होते हैं?

अगर लिफाफे में कुछ लिखा हो, पर्ची मुड़ीतुड़ी या फटी हो, CEC की पर्ची से अलग हो, या एक लिफाफे में एक से ज्यादा पर्ची निकले तो वोट रद्द हो जाता है. 19वीं नेसेट के चुनाव में करीब 1 फीसदी, यानी 40,904 वोट रद्द हुए थे.

सबसे बाद में गिने जाते हैं ‘डबल एनवेलप’ वोट

सैनिक, राजनयिक, अस्पताल में भर्ती लोग और कैदी जैसे कुछ वोटर तय केंद्र के बजाय विशेष केंद्रों पर वोट देते हैं. इन वोटों के लिए डबल लिफाफा होता है. CEC पहले जांचती है कि किसी ने दो बार वोट तो नहीं डाला, फिर बाहरी लिफाफे अलग करके अंदर के लिफाफे गिने जाते हैं, ताकि गोपनीयता बनी रहे. ये वोट नेसेट में बाकी सबके बाद गिने जाते हैं, इसलिए कई बार रुझान में थोड़ा बदलाव आखिर में दिखता है. इजराइल में ऑब्सेंटी बैलेट की व्यवस्था भी नहीं है. मतदाता को देश में मौजूद रहना होता है, सिर्फ डिप्लोमेट्स को छूट है.

एग्जिट पोल में बेंजामिन नेतन्याहू के गुट को सबसे ज्यादा सीटें दी गई हैं. फोटो क्रेडिट PTI.

कम्प्यूटर का नम्बर कहां आता है?

पूरी प्रक्रिया के अंतिम दौर में कंप्यूटर का नम्बर आता है. केंद्र पर गिनती के बाद प्रोटोकॉल और सीलबंद मतपेटी देश के गिनती केंद्रों पर भेजी जाती है. वहां दस्तावेजों में गड़बड़ी जांची जाती है और नतीजे CEC के कंप्यूटर सिस्टम में दर्ज किए जाते हैं, जो इंटरनेट से जुड़ा नहीं होता. इसके बाद दोबारा जांच होती है. सॉफ्टवेयर किसी गड़बड़ी को पकड़े तो मामला केंद्र पर मौजूद जिला न्यायालय के जज के पास जाता है, जो उस पर फैसला करते हैं. नतीजे CEC जारी करती है. फिलहाल इस साल चुनाव के आधिकारिक नतीजे 4 नवंबर को जारी होंगे.

contact.satyareport@gmail.com

Leave a Reply