
सर्दियों में अमरूद खूब पसंद किया जाता है। यह स्वादिष्ट होने के साथ फाइबर, विटामिन सी और एंटीऑक्सीडेंट्स का भी अच्छा स्रोत है। लेकिन डायबिटीज से पीड़ित लोगों के मन में अक्सर सवाल रहता है कि मीठा अमरूद खाने से ब्लड शुगर बढ़ सकती है या नहीं।
विशेषज्ञों के अनुसार, डायबिटीज होने पर अमरूद को पूरी तरह छोड़ना जरूरी नहीं है। इसकी मात्रा, खाने का तरीका और शरीर की ब्लड शुगर प्रतिक्रिया पर ध्यान देना महत्वपूर्ण है। वहीं, अमरूद के पत्तों से बनी चाय को भी शुगर नियंत्रित करने का प्रमाणित इलाज नहीं समझना चाहिए।
1. अमरूद के पत्तों को शुगर कंट्रोल का इलाज न समझें
अमरूद की पत्तियों में पॉलीफेनॉल्स और क्वेरसेटिन जैसे पौधों से मिलने वाले यौगिक पाए जाते हैं। कुछ शुरुआती शोधों में अमरूद के पत्तों से बने अर्क या चाय के भोजन के बाद ब्लड शुगर पर संभावित प्रभावों का अध्ययन किया गया है।
हालांकि, इससे यह साबित नहीं होता कि घर पर बनाई गई अमरूद के पत्तों की चाय हर व्यक्ति में शुगर को एक निश्चित प्रतिशत तक कम कर देगी। इसकी मात्रा, असर और लंबे समय तक इस्तेमाल की सुरक्षा को लेकर अभी और प्रमाणों की जरूरत है।
क्या ध्यान रखें?
- अमरूद के पत्तों की चाय को डायबिटीज की दवाओं या इंसुलिन का विकल्प न बनाएं।
- यदि आप शुगर कम करने वाली दवाएं लेते हैं, तो नियमित रूप से ऐसी चाय पीने से पहले डॉक्टर से सलाह लें।
- पत्तियों के अर्क या हर्बल सप्लीमेंट को बिना चिकित्सकीय सलाह के इस्तेमाल न करें।
2. क्या पका हुआ अमरूद छिलके सहित नहीं खाना चाहिए?
डायबिटीज के मरीजों को अक्सर सलाह दी जाती है कि वे फलों में मौजूद प्राकृतिक शुगर पर ध्यान दें। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि पके हुए अमरूद का छिलका हर हाल में उतार देना चाहिए।
अमरूद के छिलके में भी फाइबर और दूसरे उपयोगी पौधों के यौगिक पाए जाते हैं। केवल छिलके में शुगर ज्यादा होने के दावे के आधार पर सभी डायबिटीज मरीजों को इसे उतारकर खाने की सलाह देना उचित नहीं है। फल की किस्म, पकने की अवस्था और कुल मात्रा भी महत्वपूर्ण हैं।
बेहतर तरीका: अमरूद को अच्छी तरह धोकर खाएं। यदि छिलका खाने से पेट में परेशानी होती है या डॉक्टर ने कोई विशेष सलाह दी है, तो उसके अनुसार बदलाव करें।
डायबिटीज में अमरूद खाने के 5 जरूरी नियम
1. मात्रा पर ध्यान दें
एक बार में लगभग 100 ग्राम अमरूद से शुरुआत की जा सकती है। यह सभी लोगों के लिए तय मात्रा नहीं है। आपकी दवा, भोजन और ब्लड शुगर के स्तर के अनुसार सही मात्रा अलग हो सकती है।
2. जूस के बजाय साबुत फल चुनें
साबुत अमरूद में फाइबर बना रहता है, जबकि जूस बनाने पर फाइबर कम हो सकता है और अधिक मात्रा में फल पीना आसान हो जाता है। इसलिए साबुत फल खाना आमतौर पर बेहतर विकल्प है।
3. बहुत ज्यादा मात्रा में एक साथ न खाएं
अमरूद पौष्टिक है, लेकिन किसी भी फल की बहुत अधिक मात्रा एक बार में खाने से कुल कार्बोहाइड्रेट का सेवन बढ़ सकता है। अपनी डाइट में फल की मात्रा संतुलित रखें।
4. ब्लड शुगर की प्रतिक्रिया पर नजर रखें
हर व्यक्ति का शरीर भोजन पर अलग प्रतिक्रिया दे सकता है। यदि आपको ग्लूकोज मॉनिटर करने की सलाह दी गई है, तो अपने सामान्य भोजन के साथ अमरूद खाने पर शुगर में होने वाले बदलाव को समझें।
5. संतुलित डाइट का हिस्सा बनाएं
अमरूद के साथ दिनभर के भोजन में सब्जियां, दालें, साबुत अनाज और पर्याप्त प्रोटीन शामिल करें। केवल एक फल या घरेलू नुस्खे के भरोसे डायबिटीज नियंत्रित करने की कोशिश न करें।
क्या डायबिटीज में अमरूद पूरी तरह सुरक्षित है?
अधिकांश लोगों के लिए अमरूद संतुलित डाइट का हिस्सा हो सकता है। लेकिन यदि आपकी ब्लड शुगर लगातार बहुत अधिक रहती है, किडनी की बीमारी है या डॉक्टर ने कार्बोहाइड्रेट की विशेष सीमा तय की है, तो अपनी जरूरत के अनुसार आहार की योजना बनाएं।
डिस्क्लेमर: यह लेख सामान्य पोषण संबंधी जानकारी के लिए है। अमरूद या अमरूद के पत्तों की चाय डायबिटीज का इलाज नहीं है। दवाएं या इंसुलिन बंद न करें और अपनी डाइट में बड़े बदलाव करने से पहले डॉक्टर या पंजीकृत डाइटीशियन से सलाह लें।



