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शादी​​​​​​ के सिर्फ एक महीने बाद उजड़ गई बहू की जिंदगी, 17 साल तक सास ने नहीं छोड़ा साथ; अब जो बदलाव आया, उसने सबको भावुक कर दिया

शादी​​​​​​ के सिर्फ एक महीने बाद उजड़ गई बहू की जिंदगी, 17 साल तक सास ने नहीं छोड़ा साथ; अब जो बदलाव आया, उसने सबको भावुक कर दिया

शानदोंग, चीन: शादी के बाद नई जिंदगी शुरू हुए अभी एक महीना ही बीता था कि एक सड़क हादसे ने महिला की पूरी दुनिया बदल दी। दिमाग में गंभीर चोट लगने के बाद वह लंबे समय तक ऐसी हालत में रही कि रोजमर्रा के कामों के लिए भी दूसरों पर निर्भर हो गई। लेकिन इस मुश्किल दौर में उसकी 51 साल की सास ने जो जिम्मेदारी उठाई, उसे 17 साल बाद भी निभा रही हैं। अब बहू कुछ बोलने, चलने और अपने लिए साधारण खाना बनाने की कोशिश कर पा रही है। परिवार के लिए यह बदलाव वर्षों की मेहनत और उम्मीद के बाद मिली बड़ी खुशी है।

चीन के शानदोंग प्रांत के छिंगयुन काउंटी से सामने आई यह कहानी शू नाम की महिला और उसकी सास शुआन फेंगयिंग की है। साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ष 2009 में शादी के करीब एक महीने बाद शू को एक ट्रक ने टक्कर मार दी थी। हादसे में उसके दिमाग को गंभीर चोट पहुंची और उसकी हालत बेहद नाजुक हो गई।

बहू की जिंदगी बदली तो सास ने संभाली पूरी जिम्मेदारी

हादसे के बाद शू को लगातार देखभाल की जरूरत थी। परिवार के सामने सवाल था कि उसकी रोजमर्रा की जरूरतों का ध्यान कौन रखेगा। ऐसे समय में उसकी सास शुआन फेंगयिंग ने बहू की देखभाल की जिम्मेदारी अपने ऊपर ले ली।

उस समय शुआन की उम्र करीब 51 साल थी। अब वह 68 साल की हो चुकी हैं, लेकिन बहू की सेवा का सिलसिला जारी है। शुआन के लिए शू सिर्फ उनके बेटे की पत्नी नहीं, बल्कि बेटी जैसी है। उनका मानना है कि जब वह परिवार का हिस्सा बनकर घर आई है, तो मुश्किल समय में उसे अकेला कैसे छोड़ा जा सकता है।

एक-एक चम्मच खाना खिलाने में लग जाता था एक घंटा

शू की देखभाल करना आसान नहीं था। उसकी हालत ऐसी थी कि उसे खाना खिलाने और रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करने में काफी समय लगता था। शुआन उसे धीरे-धीरे एक-एक चम्मच खाना खिलाती थीं। कई बार एक बार का भोजन पूरा कराने में करीब एक घंटा लग जाता था।

लंबे समय तक बिस्तर पर रहने के कारण शरीर पर घाव होने का खतरा भी रहता है। इससे बचाने के लिए शुआन दिन में कई बार बहू की स्थिति बदलती थीं। वह उसकी साफ-सफाई का ध्यान रखतीं और हाथ-पैरों की मालिश भी करती थीं।

यह देखभाल किसी एक दिन या कुछ महीनों तक सीमित नहीं रही। शुआन ने सालों तक इसी तरह बहू की जरूरतों को प्राथमिकता दी और उसकी हालत में सुधार की उम्मीद बनाए रखी।

बहू से लगातार करती रहीं बातें, सुनाती थीं गाने

शुआन ने शू की देखभाल केवल शारीरिक जरूरतों तक सीमित नहीं रखी। वह उससे बातें करती थीं, परिवार की खबरें सुनाती थीं और उसे पसंद आने वाले गाने भी चलाती थीं। कई बार वह उसका नाम लेकर पुकारतीं, ताकि वह किसी तरह प्रतिक्रिया दे सके।

जब किसी गंभीर चोट के बाद मरीज की प्रतिक्रिया सीमित हो जाती है, तो उसके परिवार के लिए हर छोटा बदलाव मायने रखता है। शुआन भी बहू की छोटी-छोटी प्रतिक्रियाओं को उम्मीद की तरह देखती रहीं। उनका प्रयास था कि शू के साथ बातचीत और अभ्यास का सिलसिला बना रहे।

धीरे-धीरे आने लगा सुधार

रिपोर्ट के मुताबिक, लंबे समय के बाद शू की हालत में कुछ सुधार दिखाई देने लगा। वह पहले की तुलना में अधिक जागरूक होने लगी, हालांकि दिमाग में लगी चोट का असर अब भी बना हुआ है।

रिपोर्ट में उसकी समझने और सोचने की क्षमता को करीब चार साल के बच्चे के स्तर के समान बताया गया है। इसका अर्थ है कि सुधार के बावजूद उसे कई कामों में मदद की जरूरत पड़ती है। शुआन उसकी पुनर्वास प्रक्रिया में भी साथ देती रहीं और उसे चलने-फिरने का अभ्यास कराने में मदद करती थीं।

अब कुछ बोल सकती है और अपने लिए खाना भी बना लेती है

शुआन की वर्षों की देखभाल के बाद शू अब कुछ शब्द बोल सकती है। वह अपने लिए साधारण खाना बनाने की कोशिश भी कर पा रही है। परिवार के लिए ये छोटे बदलाव नहीं, बल्कि लंबे संघर्ष के बीच मिली बड़ी खुशियां हैं।

शुआन के लिए बहू का अपने लिए खाना बना पाना खास मायने रखता है। वह चाहती हैं कि शू धीरे-धीरे कुछ काम खुद करने में सक्षम हो जाए, ताकि भविष्य में भी उसकी जिंदगी थोड़ी आसान रह सके।

हालांकि, शू को अभी भी देखभाल और सहायता की जरूरत है। उसकी सेहत में सुधार की गति और भविष्य में वह कितनी स्वतंत्रता हासिल कर पाएगी, इसे लेकर निश्चित तौर पर कुछ कहना संभव नहीं है।

सास को अपने बाद भी बहू की चिंता

शुआन अब 68 साल की हैं। इतने लंबे समय तक किसी गंभीर रूप से बीमार व्यक्ति की देखभाल करना शारीरिक और मानसिक रूप से चुनौतीपूर्ण हो सकता है। इसके बावजूद उनकी चिंता सिर्फ वर्तमान तक सीमित नहीं है। वह यह भी सोचती हैं कि उनके न रहने पर शू की देखभाल कौन करेगा।

रिपोर्ट के अनुसार, शुआन ने अपने बेटे से कहा है कि उनके बाद भी वह अपनी पत्नी का ध्यान रखे। वह चाहती हैं कि शू को भविष्य में अकेला न छोड़ दिया जाए और उसकी जरूरतों का ध्यान रखा जाता रहे।

यह चिंता बताती है कि शुआन के लिए बहू की देखभाल केवल रोजमर्रा की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि उसके पूरे भविष्य से जुड़ा सवाल है।

17 साल से कायम है उम्मीद का रिश्ता

शादी के कुछ ही समय बाद हुए हादसे ने शू की जिंदगी को पूरी तरह बदल दिया था। लेकिन शुआन फेंगयिंग ने कठिन परिस्थितियों में भी उसका साथ नहीं छोड़ा। लगातार देखभाल, धैर्य और पुनर्वास के प्रयासों के बीच शू अब कुछ काम खुद करने की दिशा में आगे बढ़ रही है।

यह कहानी एक ऐसे रिश्ते की है, जिसमें सास ने बहू को अपनी बेटी की तरह अपनाया और वर्षों तक उसकी देखभाल करती रहीं। शुआन की सबसे बड़ी उम्मीद यही है कि शू की हालत में आगे भी सुधार हो और वह पहले से ज्यादा आत्मनिर्भर बन सके।

डिस्क्लेमर: यह रिपोर्ट उपलब्ध मीडिया जानकारी पर आधारित है। गंभीर दिमागी चोट के बाद रिकवरी हर व्यक्ति में अलग हो सकती है। किसी मरीज की देखभाल और पुनर्वास के लिए चिकित्सकीय सलाह जरूरी है।

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