
नानजिंग, चीन: कॉलेज में आमतौर पर छात्रों को परीक्षा, प्रेजेंटेशन और प्रोजेक्ट जैसे असाइनमेंट दिए जाते हैं, लेकिन चीन की एक यूनिवर्सिटी में विद्यार्थियों को ऐसा काम करना पड़ता है, जिसे सुनकर कई लोग हैरान रह जाएंगे। यहां छात्रों को अनजान लोगों के फोन नंबर मिलाकर उनसे बातचीत करनी होती है। इसका मकसद किसी को परेशान करना नहीं, बल्कि युवाओं की झिझक दूर करना, आत्मविश्वास बढ़ाना और उन्हें दूसरों की बात ध्यान से सुनना सिखाना है।
चीन की नानजिंग यूनिवर्सिटी में इस अनोखे असाइनमेंट के दौरान छात्रों को फोन पर बातचीत शुरू करनी होती है, सवाल पूछने होते हैं और सामने वाले को अपनी बात रखने का मौका देना होता है। सुनने में यह काम भले ही आसान लगे, लेकिन कई विद्यार्थियों के लिए किसी अनजान व्यक्ति से पहली बार बात करना बड़ी चुनौती बन जाता है। ऊपर से ऑनलाइन ठगी के बढ़ते डर ने भी इस काम को मुश्किल कर दिया है।
2015 में शुरू हुआ था बातचीत सिखाने का कोर्स
साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, नानजिंग यूनिवर्सिटी में पूर्व टीवी प्रोड्यूसर और डायरेक्टर शू काई ने साल 2015 में ‘ओरल एक्सप्रेशन’ नाम से यह कोर्स शुरू किया था। इसमें छात्रों को अपनी बात स्पष्ट तरीके से रखने, दूसरों को ध्यान से सुनने और बातचीत के दौरान सहज रहने की ट्रेनिंग दी जाती है।
इस कोर्स में केवल किताबी जानकारी पर जोर नहीं दिया जाता, बल्कि विद्यार्थियों को वास्तविक परिस्थितियों में बातचीत करने का अभ्यास भी कराया जाता है। अजनबियों को फोन करने का असाइनमेंट इसी ट्रेनिंग का हिस्सा है। छात्रों को ऐसे व्यक्ति से संपर्क करना होता है, जिससे उनकी पहले कोई जान-पहचान न हो।
30 से ज्यादा कॉल किए, तब जाकर हुई बातचीत
इस असाइनमेंट की मुश्किल का अंदाजा छात्र होंग यिमिंग के अनुभव से लगाया जा सकता है। रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने किसी अनजान व्यक्ति से बातचीत करने के लिए 30 से ज्यादा कॉल किए, लेकिन केवल पांच लोगों ने फोन उठाया। इनमें से तीन लोगों ने कॉल उठाते ही काट दिया, जबकि एक व्यक्ति को शक हुआ कि कहीं फोन करने वाला ठग तो नहीं है।
आखिरकार एक व्यक्ति बातचीत के लिए तैयार हुआ। वह आईटी सेक्टर में काम करता था। दोनों के बीच करियर, नानजिंग में खाली समय बिताने और उसकी दो बिल्लियों जैसे विषयों पर चर्चा हुई। जिस काम को शुरू करना छात्र के लिए मुश्किल था, वही अनुभव आगे चलकर एक दिलचस्प बातचीत में बदल गया।
सोशल मीडिया से भी तलाशने पड़े बातचीत करने वाले लोग
कॉननी नाम से ऑनलाइन पहचान रखने वाली एक छात्रा को भी इस असाइनमेंट में परेशानी हुई। शुरुआत में उसने सोशल मीडिया के जरिए ऐसे लोगों को खोजने की कोशिश की, जो फोन पर उससे बात करने के लिए तैयार हों। बाद में उसने नानजिंग में अनजान नंबर मिलाने का फैसला किया।
हालांकि, कुछ लोगों को उसकी कॉल पर संदेह हुआ। उन्हें लगा कि कहीं यह कोई ठगी करने की कोशिश तो नहीं है। आखिरकार उसे एक ऐसा व्यक्ति मिला, जिसने बातचीत के लिए सहमति दे दी।
इन अनुभवों से पता चलता है कि आज किसी अनजान व्यक्ति से संपर्क करना केवल झिझक का मामला नहीं रह गया है। फोन पर होने वाली धोखाधड़ी और अनचाही कॉल के कारण लोग अज्ञात नंबरों से दूरी बनाकर रखते हैं।
स्कैम के डर से फोन उठाने से बचते हैं लोग
आज बहुत से लोग अनजान नंबर देखकर कॉल उठाने से बचते हैं। किसी को निजी जानकारी चोरी होने का डर रहता है, तो कोई फर्जी कॉल और आर्थिक धोखाधड़ी से बचना चाहता है। ऐसे माहौल में छात्रों के लिए बातचीत करने को तैयार व्यक्ति ढूंढना आसान नहीं है।
रिपोर्ट के अनुसार, कुछ विद्यार्थियों ने अपने दोस्तों या परिवार के सदस्यों से अनजान व्यक्ति की तरह बात करने में मदद ली, जबकि कुछ ने सोशल मीडिया पर लोगों की तलाश की। बताया गया कि कुछ छात्रों ने असाइनमेंट पूरा करने के बाद भी इस कोर्स को जारी रखने की इच्छा जताई, वहीं कुछ के लिए इसकी कठिनाई परेशानी का कारण बनी।
प्रोफेसर चाहते हैं कि छात्र दूसरों की मदद की कद्र करें
इस कोर्स के पीछे प्रोफेसर शू काई का उद्देश्य केवल विद्यार्थियों का आत्मविश्वास बढ़ाना नहीं है। वह चाहते हैं कि छात्र यह भी समझें कि किसी अनजान व्यक्ति से बातचीत करना और उससे समय मांगना हमेशा आसान नहीं होता।
जब कोई व्यक्ति अपना समय निकालकर किसी छात्र से बात करता है, तो उसकी मदद की कद्र करना जरूरी है। अच्छी बातचीत का मतलब केवल लगातार अपनी बात कहते रहना नहीं, बल्कि सामने वाले को सुनना, उसके सवालों को समझना और उसकी सहजता का ध्यान रखना भी है।
शू काई का मानना है कि समाज में विनम्र रहने और कम बोलने को अक्सर महत्व दिया जाता है। हालांकि, कई बार इसी सोच के कारण लोग अपनी बात खुलकर रखने से हिचकिचाने लगते हैं। उनका कोर्स छात्रों को इस झिझक से बाहर निकलने का अवसर देता है।
क्या युवा सच में इंट्रोवर्ट हैं या उन्हें अभ्यास का मौका नहीं मिलता?
कई युवा खुद को इंट्रोवर्ट बताते हैं और कुछ अपनी परेशानी को सोशल फोबिया भी कह देते हैं। हालांकि, हर व्यक्ति के लिए इसका कारण एक जैसा नहीं होता। कुछ लोगों को सामाजिक परिस्थितियों में वास्तविक परेशानी हो सकती है, जबकि कुछ को बातचीत करने का पर्याप्त अभ्यास नहीं मिल पाता।
कॉननी ने बताया कि बचपन में उसे अपनी बात कहना पसंद था, लेकिन समय के साथ उसे लगा कि ज्यादा बोलने पर लोग उसे गलत समझ सकते हैं। पढ़ाई और चीन की राष्ट्रीय कॉलेज प्रवेश परीक्षा ‘गाओकाओ’ का दबाव भी छात्रों की दिनचर्या का हिस्सा बन जाता है। ऐसे माहौल में कुछ विद्यार्थी खुलकर बोलने के बजाय चुप रहना पसंद करने लगते हैं।
इस कोर्स में छात्रों को बातचीत के साथ-साथ बॉडी लैंग्वेज पर भी ध्यान देना सिखाया जाता है, ताकि वे अलग-अलग परिस्थितियों में अपनी बात बेहतर ढंग से रख सकें।
छात्रों के बीच लोकप्रिय हुआ पढ़ाने का अलग तरीका
शू काई के पढ़ाने के तरीके को यूनिवर्सिटी में पहचान मिली है। उन्हें ‘माय फेवरेट टीचर’ और ‘टीचर ऑफ करिश्मा’ जैसे सम्मान भी मिले हैं। इस कोर्स की खासियत यह है कि छात्रों को केवल अच्छी बातचीत के नियम नहीं बताए जाते, बल्कि उन्हें खुद अभ्यास करके सीखना पड़ता है।
किसी का फोन काट देना, बातचीत से इनकार करना या सामने वाले का संदेह करना भी इस प्रक्रिया का हिस्सा बन जाता है। ऐसे अनुभव छात्रों को असहज परिस्थितियों का सामना करने और अगली बार बेहतर तैयारी करने का अवसर देते हैं।
नौकरी से लेकर रोजमर्रा की जिंदगी तक काम आएगा आत्मविश्वास
अपनी बात सही तरीके से रखना पढ़ाई के अलावा नौकरी के इंटरव्यू, टीम में काम करने और नए लोगों से मिलने जैसे कई मौकों पर उपयोगी होता है। नानजिंग यूनिवर्सिटी का यह कोर्स छात्रों को वास्तविक जीवन में बातचीत करने का अभ्यास देने की कोशिश करता है।
इसकी सीख यह है कि आत्मविश्वास केवल सलाह सुनने से नहीं, बल्कि अभ्यास और अनुभव से भी विकसित हो सकता है। हालांकि, हर व्यक्ति की सहजता और सीमाएं अलग होती हैं। अनजान लोगों से संपर्क करते समय उनकी सहमति, निजता और सुरक्षा का ध्यान रखना भी उतना ही जरूरी है।
सत्य रिपोर्ट डिस्क्लेमर: यह लेख प्रकाशित मीडिया रिपोर्ट में दी गई जानकारी के आधार पर तैयार किया गया है। कोर्स और छात्रों के अनुभवों से जुड़े विवरणों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध जानकारी के आधार पर नहीं की गई है।



