
टेक्नोलॉजी डेस्क: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI को अक्सर इंसानों की तरह सवालों के जवाब देने और तर्क करने वाली तकनीक के रूप में देखा जाता है। लेकिन अगर अलग-अलग कंपनियों के AI मॉडल्स से इंसानों की सबसे विवादित आदत के बारे में पूछा जाए, तो वे क्या कहेंगे? एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि 14 AI मॉडल्स से यह सवाल पूछने पर ज्यादातर के जवाब का सार एक जैसा निकला। उनके मुताबिक, इंसान कई बार सच्चाई से ज्यादा अपने समूह की मान्यताओं को महत्व देते हैं।
AI मॉडल्स से आखिर पूछा क्या गया था?
रिपोर्ट के अनुसार, AI एनालिटिक्स फर्म ModelCompare ने 10 कंपनियों के 14 बड़े लैंग्वेज मॉडल्स पर एक परीक्षण किया। सभी से अंग्रेजी में एक ही सवाल पूछा गया, जिसका आशय था—इंसानों के बारे में आपकी सबसे विवादित राय क्या है? अपनी स्पष्ट राय बताइए, दूसरे लोगों की राय का सर्वेक्षण नहीं।
बताया गया कि प्रत्येक मॉडल से यह सवाल तीन बार पूछा गया। कुल 35 जवाबों में से 29 का सार कथित तौर पर इस विचार से मेल खाता था कि इंसान कई बार निष्पक्ष सच की तुलना में अपने समूह के साथ खड़े रहने को प्राथमिकता देते हैं।
हालांकि, ये आंकड़े संबंधित फर्म की रिपोर्ट के दावे हैं। केवल इस आधार पर यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि दुनिया के सभी AI मॉडल इंसानों को एक ही नजरिए से देखते हैं।
इंसानों की किस आदत की ओर किया इशारा?
रिपोर्ट में सामने आए जवाबों का मुख्य विचार यह था कि लोग खुद को तर्कशील मानते हैं, लेकिन कई बार उनकी सोच पर परिवार, समाज, राजनीतिक विचारधारा या अपने समूह के प्रति लगाव का प्रभाव पड़ता है।
उदाहरण के तौर पर, जब किसी व्यक्ति की मान्यताओं और तथ्यों के बीच टकराव होता है, तो वह कभी-कभी तथ्यों को स्वीकार करने के बजाय अपनी पुरानी धारणा का समर्थन करने वाले तर्क खोजने लगता है। मनोविज्ञान में इस तरह के व्यवहार को समझने के लिए समूह-पक्षपात और अपनी मान्यताओं के समर्थन में प्रमाण तलाशने जैसी अवधारणाओं का अध्ययन किया जाता है।
रिपोर्ट का दावा है कि कई AI मॉडल्स के जवाबों में इसी तरह का विचार दिखाई दिया। वहीं, एक मॉडल ने इसके उलट इंसानों को अपेक्षा से अधिक ईमानदार बताया।
क्या AI सच में इंसानों को बेहतर समझने लगा है?
यही इस रिपोर्ट का सबसे दिलचस्प पहलू है। अलग-अलग कंपनियों के मॉडल्स के जवाबों में समानता देखकर सवाल उठता है कि क्या AI इंसानी व्यवहार को बेहतर समझ सकता है।
लेकिन यहां एक महत्वपूर्ण अंतर समझना जरूरी है। AI मॉडल का किसी विषय पर प्रभावशाली जवाब देना इस बात का प्रमाण नहीं है कि उसके पास इंसानों जैसी चेतना, निजी अनुभव या स्वतंत्र राय है।
लैंग्वेज मॉडल अपने प्रशिक्षण के दौरान सीखे गए भाषाई पैटर्न और दिए गए निर्देशों के आधार पर जवाब तैयार करते हैं। प्रशिक्षण डेटा, मॉडल की बनावट, सवाल पूछने का तरीका और मानवीय फीडबैक उनके उत्तरों को प्रभावित कर सकते हैं।
क्या सभी AI का एक जैसा जवाब देना कोई बड़ा संकेत है?
जरूरी नहीं। यदि कई मॉडल्स एक जैसे विचार व्यक्त करते हैं, तो इसके पीछे साझा प्रशिक्षण सामग्री, इंटरनेट पर प्रचलित विचार या सवाल की बनावट जैसे कारण हो सकते हैं। यह भी संभव है कि एक ही तरह के निर्देश अलग-अलग मॉडल्स को मिलते-जुलते जवाब देने की ओर ले जाएं।
इस दावे को बेहतर ढंग से परखने के लिए स्वतंत्र शोध, परीक्षण की पूरी प्रक्रिया, सभी जवाबों और मूल्यांकन के मानकों की जानकारी जरूरी होगी। साथ ही, यह भी देखना होगा कि सवाल को अलग-अलग तरीके से पूछने पर नतीजे कितने बदलते हैं।
फिलहाल, यह रिपोर्ट इंसानी व्यवहार और AI की क्षमताओं को लेकर दिलचस्प चर्चा जरूर पैदा करती है। लेकिन इसे AI की स्वतंत्र सोच या इंसानों के बारे में किसी अंतिम वैज्ञानिक निष्कर्ष के रूप में देखना सही नहीं होगा।
Satya Report डिस्क्लेमर: यह लेख उपलब्ध रिपोर्ट में किए गए दावों और AI के काम करने के सामान्य सिद्धांतों पर आधारित है। ModelCompare के परीक्षण के आंकड़ों और निष्कर्षों की स्वतंत्र पुष्टि यहां नहीं की गई है।



