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​माइक्रोसॉफ्ट, मर्सिडीज-बेंज और स्काईडांस में कर्मचारियों को नौकरी छोड़ने का ऑफर, जानें क्या है वजह

दुनिया की बड़ी कंपनियां इन दिनों खर्च कम करने और अपने काम करने के तरीके में बदलाव करने पर ध्यान दे रही हैं. इसी बीच माइक्रोसॉफ्ट, मर्सिडीजबेंज और स्काईडांस जैसी कंपनियों ने कर्मचारियों को बायआउट यानी अपनी इच्छा से नौकरी छोड़ने का ऑप्शन दिया है. इसके बदले कर्मचारियों को आर्थिक मदद दी जाएगी. इस व्यवस्था को वॉलंटरी एग्जिट ऑफर योजना कहा जाता है. इसका मकसद कर्मचारियों की संख्या कम करना है, ताकि कंपनियों को हर कर्मचारी को जबरन नौकरी से निकालने की जरूरत न पड़े.

​माइक्रोसॉफ्ट, मर्सिडीज-बेंज और स्काईडांस में कर्मचारियों को नौकरी छोड़ने का ऑफर, जानें क्या है वजह

माइक्रोसॉफ्ट ने किन कर्मचारियों को दिया ऑफर?

टेक्नोलॉजी कंपनी माइक्रोसॉफ्ट ने अमेरिका, कनाडा, भारत और ब्रिटेन में कुछ कर्मचारियों को बायआउट ऑप्शन दिया है. यह ऑफर कंपनी के लेवल 70 और उससे नीचे के कर्मचारियों के लिए है. माइक्रोसॉफ्ट एक तरफ अपने कर्मचारियों की संख्या और काम करने के तरीके में बदलाव कर रही है, तो दूसरी तरफ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़ी तकनीक पर बड़ा निवेश कर रही है. कंपनी को भविष्य की जरूरतों के हिसाब से कर्मचारियों और संसाधनों का इस्तेमाल करना है. ऐसे में बायआउट स्कीम खर्च कम करने का एक तरीका बन सकती है.

मर्सिडीजबेंज भी घटाना चाहती है खर्च

कार बनाने वाली कंपनी मर्सिडीजबेंज ने भी जर्मनी में अपने कुछ कर्मचारियों को बायआउट का ऑप्शन दिया है. यह ऑफर उन कर्मचारियों के लिए है जो सीधे कार बनाने के काम से नहीं जुड़े हैं, बल्कि दूसरे काम करते हैं. कंपनी की यह स्कीम दिसंबर से शुरू होने की उम्मीद है. हाल में मर्सिडीजबेंज को चीन जैसे बाजारों में मुश्किलों सामना करना पड़ रहा है. बढ़ता कॉम्पटीशन, ग्राहकों की बदलती पसंद और मुनाफे पर दबाव के कारण कंपनी अपने खर्च कम करना चाहती है.

स्काईडांस में ऑफिस आने की शर्त बनी वजह

मीडिया और मनोरंजन सेक्टर की कंपनी स्काईडांस ने कर्मचारियों को एक अलग वजह से बायआउट का ऑप्शन दिया है. यहां मामला खर्च कम करने के साथसाथ ऑफिस में काम करने की पॉलिसी से भी जुड़ा है. कंपनी ने उन कर्मचारियों को नौकरी छोड़ने का ऑफर दिया है, जो सप्ताह में 5 दिन ऑफिस आकर काम नहीं करना चाहते. इसके तहत कर्मचारियों को कंपनी में काम किए गए हर साल के बदले दो सप्ताह के वेतन के बराबर मुआवजा दिया जाएगा. कर्मचारियों को इस एकमुश्त ऑफर पर फैसला लेने के लिए 8 नवंबर 2026 तक का समय दिया गया है.

पनियां छंटनी के बजाय यह तरीका क्यों अपना रही हैं?

इन तीनों कंपनियों के उदाहरण बताते हैं कि बायआउट स्कीम का इस्तेमाल अलगअलग जरूरतों के लिए किया जा रहा है. टेक्नोलॉजी कंपनियां नए क्षेत्रों में निवेश करने के लिए कर्मचारियों की संख्या घटा सकती हैं. वाहन कंपनियां खर्च कम करने के लिए ऐसा कर सकती हैं, जबकि मीडिया कंपनियां काम करने के नियमों में बदलाव के दौरान यह विकल्प दे सकती हैं. इस व्यवस्था में कर्मचारियों को नौकरी छोड़ने या कंपनी में बने रहने का फैसला खुद करने का मौका मिलता है. वहीं, कंपनियों को कर्मचारियों की संख्या कम करने और खर्च कम करने में मदद मिल सकती है. हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि कंपनियां आगे छंटनी नहीं करेंगी. अगर पर्याप्त कर्मचारी नौकरी छोड़ने के लिए तैयार नहीं होते या कंपनी की जरूरतें पूरी नहीं होतीं, तो जबरन छंटनी का विकल्प भी अपनाया जा सकता है.

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