अडानी ग्रुप विदेश में अपना कारोबार बढ़ाने के लिए एक और बड़ी कंपनी को खरीदने की संभावना तलाश रहा है. ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, गौतम अडानी का ग्रुप नीदरलैंड की ऊर्जा भंडारण कंपनी VTTI में हिस्सेदारी खरीदने पर विचार कर रहा है. इस संभावित सौदे में कंपनी का मूल्य करीब 3 अरब यूरो यानी लगभग 30,000 करोड़ रुपए बैठती है. हालांकि, अभी बातचीत शुरुआती चरण में है और सौदा होने की कोई गारंटी नहीं है.

अडानी VTTI को क्यों खरीदना चाहता है?
दुनिया के कई हिस्सों में एनर्जी सप्लाई में रुकावट होने और तेल कारोबार में अनिश्चितता बढ़ने से ईंधन रखने वाले टर्मिनलों की अहमियत बढ़ गई है. ऐसे में अडानी ग्रुप की दिलचस्पी इस कारोबार में बढ़ी है. VTTI का काम सिर्फ तेल को एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाना नहीं है. कंपनी कच्चा तेल, पेट्रोल, डीजल, विमान ईंधन, रसोई गैस और कई तरह के रसायनों को अपने टर्मिनलों में जमा करती है. जरूरत पड़ने पर इन उत्पादों को मिलाने, संभालने और आगे भेजने की सुविधा भी देती है.
जब किसी देश में ईंधन की आपूर्ति बाधित होती है या जहाजों की आवाजाही में परेशानी आती है, तब इन भंडारण केंद्रों की भूमिका बढ़ जाती है. कारोबारियों को ईंधन सुरक्षित रखने, कीमतों के हिसाब से सही समय पर बेचने और दूसरे बाजारों तक पहुंचाने में मदद मिलती है. इससे अडानी को ऊर्जा कारोबार की सप्लाई चेन के ज्यादा हिस्सों में अपनी मौजूदगी बढ़ाने का मौका मिल सकता है.
16 देशों में फैला है VTTI का कारोबार
नीदरलैंड के रॉटरडैम में मुख्यालय वाली VTTI दुनिया के 16 देशों में काम करती है. कंपनी की कुल भंडारण क्षमता 91 लाख घन मीटर है, जो करीब 5.7 करोड़ बैरल के बराबर है. कंपनी के टर्मिनल यूरोप, मध्य पूर्व, एशिया, अफ्रीका और अमेरिका के प्रमुख ऊर्जा कारोबार केंद्रों से जुड़े हैं. संयुक्त अरब अमीरात के फुजैराह में इसका बड़ा टर्मिनल है. यहां करीब 19.43 लाख घन मीटर भंडारण क्षमता, 66 टैंक और 11 जहाजों के लिए जेटी हैं. यह जगह तेल कारोबार के प्रमुख केंद्रों में से एक है और खाड़ी देशों से एशियाई बाजारों तक ऊर्जा पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है. एम्स्टर्डम में भी कंपनी का बड़ा केंद्र है, जहां पेट्रोल और डीजल के भंडारण के साथ ईंधन के मिश्रण से जुड़ा काम होता है.
अडानी के बंदरगाह कारोबार को क्या फायदा होगा?
अडानी ग्रुप की कंपनी अडानी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक जोन भारत और विदेशों में बंदरगाहों का संचालन करती है. इसका मौजूदा कारोबार जहाजों से माल उतारने, चढ़ाने और उसे आगे पहुंचाने पर केंद्रित है. अगर अडानी VTTI को खरीद लेता है, तो उसे ऊर्जा उत्पादों के भंडारण और प्रबंधन से जुड़ा कारोबार भी मिल सकता है. इससे समूह बंदरगाह पर माल उतारने से लेकर उसे सुरक्षित रखने और अंतिम खरीदार तक पहुंचाने जैसी सेवाएं एक साथ दे सकेगा. इस तरह अडानी की कमाई केवल बंदरगाहों पर आनेजाने वाले माल तक सीमित नहीं रहेगी. हालांकि, इससे वास्तविक लाभ कितना होगा, यह VTTI की कमाई, लागत और सौदे की कीमत पर निर्भर करेगा.
VTTI में किसकी कितनी हिस्सेदारी है?
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, VTTI में ऑस्ट्रेलिया की निवेश कंपनी IFM Investors और ऊर्जा कारोबार करने वाली Vitol की करीब 4545 प्रतिशत हिस्सेदारी है. बाकी 10 प्रतिशत हिस्सेदारी अबू धाबी की सरकारी तेल कंपनी ADNOC के पास है. रिपोर्ट के अनुसार, ADNOC अपनी पूरी हिस्सेदारी बेचने पर विचार कर रही है. वहीं, IFM Investors और Vitol भी अपनी हिस्सेदारी का कुछ हिस्सा बेच सकती हैं. इससे अडानी को कंपनी में बड़ी हिस्सेदारी खरीदने का अवसर मिल सकता है. हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि अडानी कितनी हिस्सेदारी खरीदेगा या सौदा किस कीमत पर होगा.



