
आसमान में ऊंचाई पर गोल-गोल चक्कर लगाते गिद्ध को आपने कई बार देखा होगा। आमतौर पर लोग इसे मरे हुए जानवरों का मांस खाने वाला पक्षी समझते हैं, लेकिन प्रकृति में इसकी भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। गिद्ध पर्यावरण के प्राकृतिक सफाईकर्मी कहलाते हैं, क्योंकि ये मरे हुए जानवरों के शवों को खाकर आसपास गंदगी जमा होने से रोकते हैं।
आपको जानकर हैरानी होगी कि गिद्धों की कुछ प्रजातियां इतनी ऊंचाई तक उड़ सकती हैं, जहां सामान्य यात्री विमान उड़ते हैं। इनकी पाचन क्षमता भी असाधारण होती है। ये ऐसे सड़े-गले मांस को भी पचा सकते हैं, जिसमें कई खतरनाक रोगाणु मौजूद हो सकते हैं।
लेकिन एक समय भारत में बड़ी संख्या में पाए जाने वाले गिद्ध आज गंभीर संकट का सामना कर रहे हैं। पशुओं के इलाज में इस्तेमाल होने वाली एक दवा ने इनकी आबादी को भारी नुकसान पहुंचाया है। आइए जानते हैं गिद्धों से जुड़े 15 ऐसे रोचक तथ्य, जो इस पक्षी की खासियत और पर्यावरण में इसकी अहमियत को समझने में मदद करेंगे।
गिद्ध के बारे में 15 हैरान करने वाले रोचक तथ्य
1. 37 हजार फीट की ऊंचाई तक उड़ सकता है गिद्ध
दुनिया में गिद्धों की एक प्रजाति ऐसी है, जो अपनी असाधारण उड़ान के लिए जानी जाती है। इसका नाम रुपेल्स ग्रिफॉन गिद्ध (Rüppell’s Griffon Vulture) है। वर्ष 1973 में इस प्रजाति का एक पक्षी लगभग 37,000 फीट की ऊंचाई पर विमान से टकराने की घटना के कारण दर्ज किया गया था। यह ऊंचाई सामान्य यात्री विमानों की उड़ान के आसपास होती है।
2. दुनिया में गिद्धों की लगभग 23 प्रजातियां पाई जाती हैं
दुनियाभर में गिद्धों की लगभग 23 जीवित प्रजातियां मानी जाती हैं। इन्हें मुख्य रूप से दो समूहों में बांटा जाता है। पहला ओल्ड वर्ल्ड वल्चर, जो एशिया, यूरोप और अफ्रीका में पाए जाते हैं। दूसरा न्यू वर्ल्ड वल्चर, जो उत्तर और दक्षिण अमेरिका में पाए जाते हैं।
3. गिद्ध का पेट बेहद शक्तिशाली होता है
गिद्धों की पाचन प्रणाली दूसरे कई जानवरों और पक्षियों से काफी अलग होती है। इनके पेट में मौजूद अम्ल बहुत शक्तिशाली होता है, जो सड़े-गले मांस को पचाने में मदद करता है। इसकी वजह से कई ऐसे रोगाणुओं का सामना करने में भी इन्हें मदद मिलती है, जो दूसरे जानवरों के लिए खतरनाक हो सकते हैं।
4. गिद्ध के सिर पर बाल या पंख बहुत कम होते हैं
क्या आपने कभी गौर किया है कि गिद्ध के सिर और गर्दन पर दूसरे पक्षियों की तरह घने पंख नहीं होते? इसकी एक खास वजह है। गिद्ध जब किसी मृत जानवर का मांस खाते हैं, तो अक्सर उन्हें उसके शरीर के अंदर तक अपना सिर डालना पड़ता है। सिर पर कम पंख होने से गंदगी और मांस के अवशेषों को साफ करना आसान हो जाता है।
5. कुछ गिद्ध अपने पैरों पर पेशाब करते हैं
गिद्धों की कुछ प्रजातियां अपने पैरों पर मल-मूत्र त्याग करती हैं। इस व्यवहार को यूरोहाइड्रोसिस (Urohidrosis) कहा जाता है। माना जाता है कि इससे गर्म वातावरण में शरीर को ठंडा रखने में मदद मिलती है। हालांकि, इसे पैरों को कीटाणुओं से बचाने का मुख्य तरीका मानना सही नहीं है।
6. लैपेट-फेस्ड गिद्ध अफ्रीका का विशाल पक्षी है
लैपेट-फेस्ड वल्चर (Lappet-faced Vulture) अफ्रीका में पाया जाने वाला एक विशाल गिद्ध है। इसका सिर बड़ा और चोंच बेहद मजबूत होती है। यह दूसरे गिद्धों की तुलना में मोटी खाल और कठिन ऊतकों को भी फाड़ने में सक्षम होता है। इसके पंखों का फैलाव लगभग 2.5 से 2.9 मीटर तक हो सकता है।
7. बियर्डेड गिद्ध हड्डियां खाना पसंद करता है
बियर्डेड वल्चर (Bearded Vulture) दुनिया के सबसे अनोखे गिद्धों में से एक है। इसे लैमरगायर (Lammergeier) भी कहा जाता है। इसकी खासियत यह है कि इसके भोजन का बड़ा हिस्सा हड्डियों से बनता है। यह हड्डियों को ऊंचाई से चट्टानों पर गिराता है, ताकि वे छोटे टुकड़ों में टूट जाएं और इन्हें आसानी से खाया जा सके।
8. मादा गिद्ध एक बार में एक या दो अंडे देती है
गिद्ध आमतौर पर ऊंचे पेड़ों, चट्टानों या दुर्गम स्थानों पर अपना घोंसला बनाते हैं। मादा गिद्ध की प्रजाति के अनुसार एक या दो अंडे दे सकती है। नर और मादा दोनों मिलकर अंडों की देखभाल करते हैं और बच्चों को भोजन उपलब्ध कराने में मदद करते हैं।
9. एंडियन कोंडोर दुनिया के सबसे बड़े उड़ने वाले पक्षियों में शामिल है
दक्षिण अमेरिका में पाया जाने वाला एंडियन कोंडोर (Andean Condor) दुनिया के सबसे बड़े उड़ने वाले पक्षियों में गिना जाता है। इसके पंखों का फैलाव लगभग 3 मीटर या उससे अधिक हो सकता है। इसका विशाल शरीर और चौड़े पंख इसे हवा में लंबे समय तक उड़ने में मदद करते हैं।
10. भारत में गिद्धों की कई प्रजातियां पाई जाती हैं
भारत में सफेद पीठ वाले गिद्ध (White-rumped Vulture), भारतीय गिद्ध (Indian Vulture), लंबी चोंच वाले गिद्ध (Long-billed Vulture), पतली चोंच वाले गिद्ध (Slender-billed Vulture) और हिमालयी गिद्ध सहित कई प्रजातियां पाई जाती हैं। इनमें से कुछ प्रजातियां गंभीर रूप से संकटग्रस्त हैं।
11. गिद्ध की नजर बहुत तेज होती है
गिद्धों की देखने की क्षमता बेहद शानदार होती है। ये आसमान में काफी ऊंचाई पर उड़ते हुए भी जमीन पर मौजूद भोजन को देख सकते हैं। इनकी तेज नजर इन्हें दूर से मृत जानवरों के शव खोजने में मदद करती है।
12. भोजन की तलाश में सैकड़ों किलोमीटर तक उड़ सकते हैं
गिद्धों को भोजन की तलाश में काफी लंबी दूरी तय करनी पड़ सकती है। ये गर्म हवा की उठती धाराओं का इस्तेमाल करके बिना लगातार पंख फड़फड़ाए काफी देर तक आसमान में उड़ सकते हैं। इससे इनकी ऊर्जा बचती है और ये बड़े क्षेत्र में भोजन तलाश पाते हैं।
13. कुछ गिद्धों में सूंघने की क्षमता भी बेहद खास होती है
अमेरिका में पाए जाने वाले टर्की वल्चर (Turkey Vulture) की सूंघने की क्षमता काफी विकसित होती है। यह हवा में मौजूद सड़े हुए मांस की गंध पहचानकर भोजन तक पहुंच सकता है। इसके विपरीत एशिया और अफ्रीका के कई गिद्ध मुख्य रूप से अपनी तेज नजर पर निर्भर रहते हैं।
14. गिद्ध कई दशकों तक जीवित रह सकते हैं
गिद्धों का जीवनकाल उनकी प्रजाति और रहने की परिस्थितियों पर निर्भर करता है। कई प्रजातियां जंगलों में लगभग 15 से 30 साल तक जीवित रह सकती हैं। सुरक्षित वातावरण और उचित देखभाल में कुछ गिद्ध इससे भी अधिक उम्र तक जीवित रहते हैं।
15. गिद्धों को बचाने के लिए भारत में चलाए जा रहे हैं विशेष अभियान
भारत में गिद्धों की आबादी में भारी गिरावट के बाद इनके संरक्षण के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं। हरियाणा के पिंजौर में जटायु संरक्षण प्रजनन केंद्र (Jatayu Conservation Breeding Centre) स्थापित किया गया है। यहां संकटग्रस्त गिद्धों के प्रजनन और संरक्षण पर काम किया जाता है। इसके अलावा देश के अलग-अलग हिस्सों में गिद्धों के सुरक्षित आवास और संरक्षण क्षेत्रों को विकसित करने के प्रयास किए जा रहे हैं।
भारत में अचानक क्यों कम हो गए गिद्ध?
एक समय भारत में गिद्धों की संख्या करोड़ों में थी, लेकिन 1990 के दशक से इनकी आबादी में तेजी से गिरावट शुरू हो गई। इसके पीछे सबसे बड़ा कारण पशुओं के इलाज में इस्तेमाल होने वाली डाइक्लोफेनाक (Diclofenac) नामक दर्द निवारक दवा को माना गया।
जब किसी पशु को यह दवा दी जाती थी और उसकी मृत्यु के बाद गिद्ध उसका शव खाते थे, तो दवा के अवशेष उनके शरीर में पहुंच जाते थे। इससे गिद्धों की किडनी को गंभीर नुकसान होता था और कई पक्षियों की मौत हो जाती थी।
इस संकट को देखते हुए भारत में वर्ष 2006 में पशु चिकित्सा के लिए डाइक्लोफेनाक के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगाया गया। इसके बावजूद गिद्धों के सामने भोजन की कमी, जहरीले पदार्थों और प्राकृतिक आवास के नुकसान जैसी चुनौतियां बनी हुई हैं।
गिद्ध पर्यावरण के लिए इतने जरूरी क्यों हैं?
गिद्धों को प्रकृति का सफाईकर्मी कहा जाता है। ये मरे हुए जानवरों के शवों को तेजी से खाकर पर्यावरण में सड़न और गंदगी जमा होने से रोकते हैं।
अगर किसी इलाके में गिद्धों की संख्या कम हो जाती है, तो वहां मृत जानवरों के शव लंबे समय तक पड़े रह सकते हैं। इससे आवारा कुत्तों और दूसरे जानवरों की संख्या बढ़ने तथा बीमारियों के फैलने का खतरा पैदा हो सकता है।
इसलिए गिद्धों का संरक्षण केवल एक पक्षी को बचाने का मामला नहीं है, बल्कि पूरे पारिस्थितिकी तंत्र को संतुलित रखने के लिए भी जरूरी है।
गिद्धों से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां
- अंग्रेजी नाम: Vulture
- वैज्ञानिक वर्ग: Accipitriformes और Cathartiformes समूह
- प्रमुख विशेषता: मृत जानवरों का मांस खाना
- प्रजातियां: दुनिया में लगभग 23
- सबसे ऊंची उड़ान का रिकॉर्ड: रुपेल्स ग्रिफॉन गिद्ध
- सबसे बड़े उड़ने वाले पक्षियों में शामिल: एंडियन कोंडोर
- विशेष भोजन: बियर्डेड गिद्ध हड्डियां भी खाता है
- भारत में प्रमुख खतरा: डाइक्लोफेनाक दवा के अवशेष
- संरक्षण का प्रमुख केंद्र: जटायु संरक्षण प्रजनन केंद्र, पिंजौर
निष्कर्ष
गिद्ध भले ही देखने में आम पक्षियों से अलग और कुछ लोगों को डरावने लगते हों, लेकिन प्रकृति में इनका योगदान बेहद महत्वपूर्ण है। ये मृत जानवरों के शवों को साफ करके पर्यावरण को स्वस्थ रखने में मदद करते हैं।
भारत में इनकी आबादी में आई भारी गिरावट एक गंभीर चिंता का विषय है। अगर समय रहते इनके संरक्षण के लिए प्रयास नहीं किए गए, तो आने वाली पीढ़ियां इस अनोखे पक्षी को केवल तस्वीरों में ही देख पाएंगी।
सत्य रिपोर्ट डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई जानकारी उपलब्ध वैज्ञानिक अध्ययनों और वन्यजीव संबंधी जानकारियों पर आधारित है। गिद्धों की प्रजातियों, संख्या और संरक्षण की स्थिति से जुड़े आंकड़ों में समय के साथ बदलाव संभव है।



