
पटना, बिहार: देश में कई ऐसे मंदिर हैं, जिनकी पहचान सिर्फ धार्मिक आस्था से नहीं, बल्कि उनसे जुड़ी रहस्यमयी लोककथाओं से भी है। बिहार के पटना जिले के बिहटा के पास स्थित मां वन देवी मंदिर भी ऐसा ही एक स्थान है। स्थानीय मान्यताओं के मुताबिक, करीब 350 से 400 साल पुराने इस मंदिर के आसपास कभी घना जंगल हुआ करता था। यहां सूर्यास्त के बाद रुकने या जंगल में जाने से लोग परहेज करते हैं। दिलचस्प बात यह है कि मान्यता के अनुसार, मंदिर के पुजारी भी शाम की पूजा के बाद वहां नहीं ठहरते।
इस मंदिर से जुड़ी लोककथा उस समय और चर्चा में आ गई, जब सिद्धार्थ मल्होत्रा और तमन्ना भाटिया की फिल्म ‘द व्वान: फोर्स ऑफ द फॉरेस्ट’ इससे प्रेरित कहानी के साथ सामने आई। फिल्म के निर्माताओं ने भी स्वीकार किया है कि बिहार के इस मंदिर और उससे जुड़ी स्थानीय मान्यताओं ने कहानी को आकार देने में अहम भूमिका निभाई।
कहां स्थित है मां वन देवी का मंदिर?
मां वन देवी का मंदिर बिहार के पटना जिले के बिहटा क्षेत्र में स्थित है। यह पटना शहर से करीब 35 किलोमीटर दूर अमहरा, राघोपुर और कंचनपुर गांवों के आसपास बताया जाता है। स्थानीय लोगों की आस्था में इस मंदिर का विशेष स्थान है।
मंदिर में देवी की पूजा पारंपरिक बड़ी प्रतिमा के बजाय पवित्र पिंड के रूप में की जाती है। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, पहले यह पूरा इलाका घने जंगलों से घिरा हुआ था। इसी वजह से देवी को वन की रक्षक के रूप में भी पूजा जाता है।
मंदिर की उम्र करीब 350 से 400 साल बताई जाती है। हालांकि, इसकी स्थापना की सटीक तारीख साबित करने वाला कोई पुख्ता पुरातात्विक प्रमाण सामने नहीं है। इसलिए इसकी प्राचीनता से जुड़ी जानकारी को स्थानीय परंपरा और मौखिक इतिहास के रूप में समझना चाहिए।
कौन थे विद्यानंद मिश्रा, जिनसे जुड़ी है मंदिर की स्थापना की कहानी?
मां वन देवी मंदिर की सबसे चर्चित लोककथा राघोपुर गांव के रहने वाले विद्यानंद मिश्रा से जुड़ी है। कहा जाता है कि विद्यानंद मिश्रा मां विंध्यवासिनी के परम भक्त थे। वह बिहार से मिर्जापुर स्थित विंध्याचल धाम जाकर नियमित रूप से माता के दर्शन और पूजा किया करते थे।
समय बीतने के साथ उनकी उम्र बढ़ने लगी और लंबी दूरी तय करके विंध्याचल जाना उनके लिए मुश्किल हो गया। लेकिन माता के प्रति उनकी श्रद्धा पहले जैसी ही बनी रही।
स्थानीय मान्यता के अनुसार, एक दिन मां विंध्यवासिनी ने उन्हें सपने में दर्शन दिए और अपने पवित्र पिंड का एक हिस्सा उनके गांव के पास स्थापित करने का निर्देश दिया। इसके बाद विद्यानंद मिश्रा ने माता के आदेश का पालन करते हुए अमहरा, राघोपुर और कंचनपुर गांवों की सीमा के पास पवित्र पिंड की स्थापना की।
कहा जाता है कि उस समय यह स्थान घने जंगल के बीच था। धीरे-धीरे यहां मां वन देवी का मंदिर विकसित हुआ और आसपास के गांवों के लोगों की आस्था का प्रमुख केंद्र बन गया। यह पूरी कहानी स्थानीय लोकपरंपरा पर आधारित है, जिसका स्वतंत्र ऐतिहासिक प्रमाण उपलब्ध नहीं है।
सूर्यास्त के बाद क्यों नहीं रुकता कोई?
मां वन देवी मंदिर से जुड़ी सबसे रहस्यमयी मान्यता सूर्यास्त के बाद मंदिर और आसपास के जंगल में प्रवेश को लेकर है। स्थानीय लोगों का विश्वास है कि मां वन देवी जंगल, वहां रहने वाले पशु-पक्षियों और आसपास के क्षेत्र की रक्षा करती हैं।
लोककथाओं के मुताबिक, रात के समय देवी जंगल में विचरण करती हैं। इसी वजह से लोगों को सूर्यास्त के बाद मंदिर परिसर और जंगल में जाने से मना किया जाता है। मान्यता है कि इस परंपरा का उल्लंघन करना किसी अनहोनी को न्योता देने जैसा हो सकता है।
बताया जाता है कि शाम की पूजा के बाद पुजारी भी मंदिर परिसर छोड़ देते हैं और रात में वहां नहीं रुकते। हालांकि, इन मान्यताओं से जुड़ी किसी अलौकिक घटना का वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। यह परंपरा स्थानीय आस्था और पीढ़ियों से चली आ रही लोककथाओं का हिस्सा है।
सिद्धार्थ मल्होत्रा और तमन्ना भाटिया की फिल्म से जुड़ा है मंदिर का कनेक्शन
मां वन देवी मंदिर की कहानी अब बिहार के आसपास के इलाकों तक सीमित नहीं रही। सिद्धार्थ मल्होत्रा और तमन्ना भाटिया अभिनीत फिल्म ‘द व्वान: फोर्स ऑफ द फॉरेस्ट’ ने इस मंदिर को देशभर में चर्चा का विषय बना दिया।
फिल्म के लेखक अरुणाभ कुमार ने बताया था कि उन्हें इस मंदिर की कहानी अपनी मां से सुनने को मिली थी। इसके बाद उन्होंने मंदिर का दौरा किया और वहां के पुजारियों तथा स्थानीय लोगों से बातचीत की। मंदिर से जुड़ी मान्यताओं और जंगल की लोककथाओं ने उन्हें काफी प्रभावित किया।
फिल्म का निर्देशन दीपक कुमार मिश्रा ने किया है, जिन्हें ‘पंचायत’ जैसी लोकप्रिय सीरीज के लिए जाना जाता है। फिल्म में सिद्धार्थ मल्होत्रा और तमन्ना भाटिया के साथ सुनील ग्रोवर, मनीष पॉल, श्वेता तिवारी और अनूप सोनी भी नजर आए हैं। इसकी कहानी में बिहार की लोक-संस्कृति और छठ पर्व को भी जगह दी गई है।
आस्था, लोककथा और रहस्य का अनोखा संगम
मां वन देवी मंदिर की कहानी यह दिखाती है कि भारत के छोटे गांवों और कस्बों में आज भी ऐसी कई लोकपरंपराएं मौजूद हैं, जिनके बारे में देश के दूसरे हिस्सों के लोग बहुत कम जानते हैं। विद्यानंद मिश्रा से जुड़ी स्थापना की कथा, सूर्यास्त के बाद जंगल में नहीं जाने की परंपरा और वन देवी को रक्षक मानने की आस्था ने इस मंदिर को खास पहचान दी है।
हालांकि, मंदिर की उम्र और इससे जुड़ी घटनाओं के बारे में उपलब्ध जानकारी मुख्य रूप से स्थानीय मान्यताओं और मौखिक कथाओं पर आधारित है। इसके बावजूद बिहार की इस अनोखी धार्मिक परंपरा ने अब सिनेमा के जरिए देशभर के लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचा है।
— Satya Report



