इजराइल की केन्द्रीय चुनाव समिति ने खुफिया एजेंसी शिन बेट को चुनाव में विदेशी फंडिंग की जांच के आदेश दिए हैं. आरोप है कि कतर, तुर्किए जैसे देशों ने अरब दलों की मदद पैसों से की है, जिससे देश में उनका प्रभाव बढ़ सके. शुरुआती रुझानों के बाद ही कार्यवाहक पीएम नेतन्याहू ने अरब दलों पर वोट चोरी का आरोप लगाया था. शिन बेन को एक हफ्ते में जांच रिपोर्ट पेश करना है.आइए इसी बहाने जानते हैं कि इजरायल की खुफिया एजेंसियां शिन बेट, मोसाद, अमान कैसे एकदूसरे से अलग हैं?

इजराइल के केंद्रीय चुनाव समिति के अध्यक्ष जस्टिस नोआम सोहलबर्ग ने चुनाव में कथित विदेशी फंडिंग और संभावित दखल की जांच के लिए शिन बेट से कहा है. मीडिया रिपोर्टों में कतर और तुर्किये का नाम संभावित स्रोतों के रूप में आया है.कतर और तुर्किये ने चुनाव में दखल देने के आरोपों से इनकार किया है. शिन बेट ने कहा है कि उसकी जांच जारी है और उसका दायरा सीमित है. एजेंसी ने यह भी चेतावनी दी कि जांच को अरब नागरिकों या उनके वैध मतदान पर संदेह जताने के लिए इस्तेमाल नहीं किया जाएगा. केंद्रीय चुनाव समिति ने भी कहा कि चुनाव में व्यापक गड़बड़ी के दावों की पुष्टि उसके पास नहीं है. जांच इसीलिए जरूरी है, जिससे स्थिति स्पष्ट हो सके.
खुफिया एजेंसी शिन बेट क्या करती है?
शिन बेट को इजराइल की आंतरिक सुरक्षा सेवा कहा जाता है. इसका काम देश के भीतर सुरक्षा खतरों पर नजर रखना है. इसमें आतंकवादी हमलों की रोकथाम, जासूसी का मुकाबला, संवेदनशील सरकारी और सुरक्षा संस्थानों की रक्षा तथा देश के भीतर सक्रिय खतरे से जुड़ी जानकारी जुटाना शामिल हो सकता है. चुनाव में कथित विदेशी प्रभाव की जांच भी इसी कारण उसके दायरे से जुड़ती है. अगर किसी बाहरी ताकत ने देश के भीतर धन या किसी दूसरे माध्यम से चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश की हो, तो उससे जुड़ी सुरक्षा जानकारी की पड़ताल शिन बेट कर सकता है. उसकी भूमिका जांच और सुरक्षा से जुड़ी जानकारी जुटाने की है.
शिन बेट इजराइल की आंतरिक सुरक्षा पर नजर रखती है, यह चुनावों में हुई फंडिंग की जांच करेगी. फोटो: Getty Images
मोसाद की भूमिका क्या है?
मोसाद इजराइल की विदेशों में काम करने वाली खुफिया एजेंसी है. इसका मुख्य ध्यान दूसरे देशों से जुड़ी जानकारी जुटाने और इजराइल के राष्ट्रीय हितों को प्रभावित कर सकने वाले बाहरी खतरों पर रहता है. दूसरे शब्दों में, मोसाद का कार्यक्षेत्र मुख्य रूप से देश की सीमाओं के बाहर है. मोसाद विदेशों में राजनीतिक, सैन्य और सुरक्षा से जुड़े घटनाक्रमों का आकलन करता है. ऐसी जानकारी इजराइल की सरकार को विदेश नीति और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े फैसले लेने में मदद देती है. लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि देश से बाहर होने वाली हर घटना मोसाद के अधिकार क्षेत्र में ही आती है.
अलगअलग एजेंसियों के काम में सहयोग और साझा जिम्मेदारी भी हो सकती है. शिन बेट और मोसाद के बीच सबसे आसान अंतर उनके काम की जगह से समझा जा सकता है. शिन बेट का जोर देश के भीतर की सुरक्षा पर है. मोसाद का ध्यान विदेशों में खुफिया जानकारी और बाहरी खतरों पर रहता है. कुछ मामलों में दोनों का काम एकदूसरे से जुड़ भी सकता है.
मोसाद इजराइल की विदेशों में काम करने वाली खुफिया एजेंसी है.
अमान क्या है?
अमान इजराइल की सैन्य खुफिया सेवा है. यह इजराइल डिफेंस फोर्सेज यानी सेना की खुफिया शाखा है. इसका प्रमुख काम सैन्य दृष्टि से अहम जानकारी जुटाना और उसका विश्लेषण करना है. अमान पड़ोसी देशों की सेनाओं, सैन्य गतिविधियों, हथियारों और युद्ध से जुड़े संभावित खतरों का आकलन कर सकता है. यह सेना के कमांडरों और सरकार को ऐसे विश्लेषण उपलब्ध कराता है, जिनसे सैन्य योजना और सुरक्षा संबंधी फैसलों में मदद मिलती है. अमान की भूमिका खास तौर पर सैन्य मामलों पर केंद्रित होती है.
क्या है तीनों एजेंसियों में सरल अंतर?
- शिन बेट: आंतरिक सुरक्षा और घरेलू खतरों से जुड़ी खुफिया जानकारी जुटाना और एक्शन लेना
- मोसाद: विदेशों में अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी जानकारियों पर नजर रखना
- अमान: सेना से जुड़ी खुफिया जानकारी और सैन्य खतरों का विश्लेषण
इसका मतलब यह नहीं है कि ये एजेंसियां आपस में संवाद नहीं करती. बिल्कुल करती हैं. आपसी सहयोग, सूचनाओं का आदानप्रदान इनकी जिम्मेदारियों का नियमित हिस्सा है. जब भी देश की सुरक्षा से जुड़ा मसला होगा, तीनों सूचनाओं को न केवल साझा करेंगे, बल्कि सरकार के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम भी करेंगे.
चुनावी फंडिंग की जांच का राजनीतिक महत्व
इजराइल में 120 सदस्यों वाली संसद को नेसेट कहा जाता है. सरकार बनाने के लिए आम तौर पर 61 सांसदों का समर्थन जरूरी होता है. जब किसी चुनाव के बाद गठबंधन बहुमत से दूर हों, तब छोटे दलों और दूसरी पार्टियों का समर्थन अहम हो सकता है. ऐसी स्थिति में चुनावी गड़बड़ी के आरोप राजनीतिक बहस को और तेज कर सकते हैं. इसलिए जांच की निष्पक्षता महत्वपूर्ण है. किसी दल का आरोप अपनेआप सबूत नहीं बन जाता. इसी तरह, जांच शुरू होने का अर्थ यह नहीं है कि आरोप साबित हो गए हैं. यह पता लगाना जरूरी है कि धन कहां से आया, उसका इस्तेमाल किस उद्देश्य से हुआ और क्या उससे वोट या सीटों के नतीजे प्रभावित हुए.
शिन बेट, मोसाद और अमान तीनों खुफिया जानकारी से जुड़ी एजेंसियां हैं, लेकिन उनके काम का केंद्र अलग है. शिन बेट देश के भीतर की सुरक्षा देखता है. मोसाद का मुख्य ध्यान विदेशों पर रहता है. अमान सैन्य खुफिया जानकारी और सेना से जुड़े खतरों का विश्लेषण करता है. इजराइल के चुनाव में कथित विदेशी फंडिंग की जांच शिन बेट को सौंपे जाने से एजेंसी चर्चा में आई है. लेकिन जांच पूरी होने और भरोसेमंद साक्ष्य सामने आने से पहले किसी पक्ष को दोषी ठहराना जल्दबाजी होगी. लोकतंत्र की विश्वसनीयता के लिए जरूरी है कि आरोपों की जांच निष्पक्ष हो और वैध रूप से मतदान करने वाले नागरिकों को बिना सबूत संदेह के घेरे में न रखा जाए.



