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फर्जी​​​ सिम और बैंक खातों से चल रहा था साइबर ठगी का नेटवर्क, दिल्ली पुलिस का 17 राज्यों में बड़ा ऑपरेशन; 944 गिरफ्तार

फर्जी​​​ सिम और बैंक खातों से चल रहा था साइबर ठगी का नेटवर्क, दिल्ली पुलिस का 17 राज्यों में बड़ा ऑपरेशन; 944 गिरफ्तार

नई दिल्ली, 31 अक्टूबर 2026: साइबर ठगी करने वालों के साथ-साथ उन्हें बैंक खाते, फर्जी सिम कार्ड और कॉल सेंटर जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराने वाले नेटवर्क पर दिल्ली पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। ऑपरेशन CyHawk 6.0 के तहत 28 और 29 अक्टूबर को दो दिनों तक देशभर में छापेमारी की गई। इस दौरान 944 लोगों को गिरफ्तार किया गया, जबकि 788 लोगों के खिलाफ निवारक कार्रवाई की गई। इसके अलावा 2,081 लोगों को नोटिस जारी किए गए।

दिल्ली पुलिस की 283 टीमों ने 17 राज्यों और 5 केंद्र शासित प्रदेशों में कार्रवाई की। अभियान में दिल्ली के सभी 15 पुलिस जिलों, क्राइम ब्रांच की साइबर यूनिट और इंटेलिजेंस फ्यूजन एंड स्ट्रैटेजिक ऑपरेशंस (IFSO) यूनिट ने हिस्सा लिया। पुलिस ने इस दौरान 4,979 संदिग्धों को पूछताछ और सत्यापन के लिए हिरासत में लिया या राउंड अप किया।

4,002 साइबर ठगी की शिकायतों पर कार्रवाई

पुलिस के मुताबिक, इस अभियान के दौरान 596 नई FIR दर्ज की गईं। इसके अलावा पहले से दर्ज 432 मामलों में भी कार्रवाई की गई और चार अन्य निवारक कानूनी कार्यवाहियां की गईं। इस तरह कुल 1,032 मामलों में कार्रवाई हुई।

जांच के दायरे में नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) पर दर्ज 4,002 शिकायतें आईं। इनमें 727 शिकायतें दिल्ली से और 3,275 शिकायतें दूसरे राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से जुड़ी थीं। इन शिकायतों में कथित तौर पर करीब 479.14 करोड़ रुपये की ठगी की रकम शामिल थी। यह रकम शिकायतों से जुड़ी कथित धोखाधड़ी की राशि है, पुलिस की बरामदगी नहीं।

बैंक मैनेजर और एजेंटों पर भी कार्रवाई

साइबर ठगी में म्यूल बैंक खातों का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होता है। ऐसे खातों के जरिए ठगी से मिली रकम को अलग-अलग बैंक खातों में भेजा जाता है, ताकि असली आरोपियों तक पहुंचना मुश्किल हो जाए। कई लोग कमीशन के लालच में अपने खाते साइबर अपराधियों को उपलब्ध करा देते हैं।

दिल्ली पुलिस की जांच में बैंकिंग व्यवस्था से जुड़े कुछ लोगों की कथित भूमिका भी सामने आई। एक बैंक मैनेजर और चार बैंक एजेंटों को म्यूल बैंक खाते खुलवाने और साइबर ठगी में मदद करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इन खातों के जरिए कितनी रकम का लेन-देन हुआ और इस नेटवर्क में अन्य कौन-कौन लोग शामिल थे।

फर्जी सिम कार्ड और अवैध कॉल सेंटर भी निशाने पर

पुलिस ने इस अभियान में केवल ऑनलाइन ठगी करने वालों को ही नहीं, बल्कि उनके लिए जरूरी संसाधन उपलब्ध कराने वाले लोगों को भी निशाने पर लिया। इनमें फर्जी दस्तावेजों पर सिम कार्ड जारी कराने वाले, कमीशन लेकर बैंक खाते उपलब्ध कराने वाले, पॉइंट ऑफ सेल (POS) एजेंट, सिम बॉक्स संचालक और अवैध कॉल सेंटर चलाने वाले लोग शामिल थे।

जांच के दौरान द्वारका, दक्षिण-पश्चिम और पूर्वी दिल्ली में चल रहे अवैध कॉल सेंटरों पर भी कार्रवाई की गई। पूर्वी जिले में एक ऐसा कॉल सेंटर पकड़ा गया, जिसे कथित तौर पर चलती गाड़ी से संचालित किया जा रहा था, ताकि उसकी लोकेशन का पता लगाना मुश्किल हो।

पुलिस ने फर्जी मोबाइल ऐप, निवेश के नाम पर ठगी करने वाले लिंक और फिशिंग मैसेज के जरिए लोगों को निशाना बनाने वाले नेटवर्क के खिलाफ भी कार्रवाई की। इसके अलावा सिम बॉक्स और टेलीग्राम चैनलों के जरिए क्रिप्टोकरेंसी, ई-सिम और बैंक खातों से जुड़े संदिग्ध कारोबार की जांच की गई।

17 राज्यों और 5 केंद्र शासित प्रदेशों तक पहुंची पुलिस

ऑपरेशन के दौरान दिल्ली पुलिस की 283 टीमें दूसरे राज्यों में भेजी गई थीं। पुलिस ने झारखंड के धनबाद में जामताड़ा से जुड़े क्रेडिट कार्ड ठगी गिरोह, छत्तीसगढ़ के दुर्ग-भिलाई में मैट्रिमोनियल फ्रॉड नेटवर्क और कानपुर तथा ग्रेटर नोएडा में म्यूल बैंक खातों की सप्लाई करने वाले लोगों के खिलाफ कार्रवाई की।

इसके अलावा मुंबई, लखनऊ, राजस्थान और पंजाब में भी बैंक खातों की व्यवस्था करने वाले संदिग्ध लोगों की तलाश की गई। पुलिस का कहना है कि साइबर अपराधी अक्सर एक राज्य में बैठकर दूसरे राज्यों के लोगों को निशाना बनाते हैं। ऐसे में अलग-अलग राज्यों में फैले नेटवर्क को पकड़ने के लिए संयुक्त कार्रवाई जरूरी थी।

37 लाख रुपये से ज्यादा नकदी और बड़ी संख्या में डिजिटल उपकरण जब्त

छापेमारी के दौरान पुलिस ने 1,037 मोबाइल फोन, 1,301 सिम कार्ड, 106 लैपटॉप और कंप्यूटर, 397 एटीएम कार्ड, 244 से अधिक बैंक किट और पासबुक तथा 325 आधार कार्ड जब्त किए। इसके अलावा छह सिम बॉक्स, 11 कारें और 10 दोपहिया वाहन भी बरामद किए गए।

पुलिस ने करीब 37.67 लाख रुपये नकद जब्त किए। इसके साथ ही सोना और क्रिप्टोकरेंसी के रूप में रखी गई संपत्ति भी जांच के दायरे में आई। अब जब्त किए गए उपकरणों और दस्तावेजों की जांच कर साइबर ठगी से जुड़े अन्य लोगों और पैसों के लेन-देन का पता लगाया जा रहा है।

NCRP और तकनीकी डेटा से तैयार हुई कार्रवाई की रणनीति

CyHawk 6.0 की तैयारी के लिए पुलिस ने नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर दर्ज शिकायतों का विश्लेषण किया। इसके साथ ही गृह मंत्रालय के तहत काम करने वाले इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (I4C), समन्वय और प्रतिबिंब पोर्टल से मिले इनपुट का इस्तेमाल किया गया।

इनकी मदद से संदिग्ध बैंक खातों, मोबाइल नंबरों और साइबर ठगी के हॉटस्पॉट की पहचान की गई। पुलिस ने बैंकिंग डेटा और तकनीकी जानकारी के आधार पर ऐसे नेटवर्क तक पहुंचने की कोशिश की, जो ठगी की रकम को एक खाते से दूसरे खाते में भेजने और उसे नकदी या क्रिप्टोकरेंसी के जरिए निकालने में मदद करते थे।

दिल्ली पुलिस के मुताबिक, जून में हुए CyHawk 5.0 अभियान की तुलना में इस बार नई FIR की संख्या में करीब 24 प्रतिशत और जांच के दायरे में आई शिकायतों में करीब 46 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। दिल्ली के बाहर से दर्ज शिकायतों पर कार्रवाई भी लगभग 57 प्रतिशत बढ़ी।

CyHawk 6.0 की कार्रवाई एक नजर में

  • गिरफ्तार आरोपी: 944
  • निवारक कार्रवाई के तहत बाउंड डाउन: 788
  • नोटिस जारी: 2,081 लोगों को
  • सत्यापन के लिए हिरासत में लिए गए या राउंड अप संदिग्ध: 4,979
  • नई FIR: 596
  • पुराने मामलों में कार्रवाई: 432
  • कुल मामलों में कार्रवाई: 1,032
  • साइबर ठगी की शिकायतें: 4,002
  • शिकायतों से जुड़ी कथित ठगी की रकम: करीब 479.14 करोड़ रुपये
  • पुलिस टीमें: 283
  • कार्रवाई वाले राज्य: 17
  • केंद्र शासित प्रदेश: 5

दिल्ली पुलिस का कहना है कि ऑपरेशन के दौरान मिले दस्तावेजों, बैंक खातों और डिजिटल उपकरणों की जांच अभी जारी है। आगे की कार्रवाई का उद्देश्य साइबर ठगी के पूरे नेटवर्क, उसके मददगारों और पैसों के लेन-देन की कड़ियों तक पहुंचना है।

— Satya Report

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