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सुपौल में सरकारी विद्यालयों के 626 प्रधान पर गिरी विभागीय गाज, शुरू हुई कार्रवाई

सुपौल: सुपौल में अब शिक्षा विभाग भी सरकारी शिक्षकों के खिलाफ कड़े रूख अपनाने लगे हैं. बार-बार स्कूल से शिक्षक गायब तो बच्चे की कम उपस्थिति की शिकायत मिलती ही रहती है. इतना ही ई-शिक्षा काेष पर शिक्षकों का हाजिरी नहीं बन पाता है. जिसको लेकर बार-बार स्पष्टीकरण भी पूछा जाता है. लेकिन व्यवस्था में सुधार नहीं हाे पाता है. इतना ही कर्तव्य में लापरवाही, उच्चाधिकारी के आदेश की भी सरकारी शिक्षकों के लिए कोई मायने नहीं रहता है. बार-बार आदेश व पत्र जारी होने के बावजूद अपने आदत से बाज नहीं आ रहे हैं.

इसी कड़ी में दिसंबर व जनवरी माह में ई-शिक्षा कोष पोर्टल पर एमडीएम से संबंधित रिपोर्ट दर्ज नहीं करना जिले के 626 विद्यालयों के प्रधान को महंगा पड़ गया. विभाग ने मामले को गंभीरता से लेते हुए उस दिन की परिवर्तन मूल्य की लगभग 11 लाख 30 हजार 657 रुपये की कटौती कर ली है. साथ ही संबंधित प्रधानाध्यापक से स्पष्टीकरण की भी मांग की है. इसमें दिसंबर माह में 375 विद्यालय की करीब 9 लाख तथा जनवरी माह में 251 विद्यालय की 2 लाख 30 हजार 675 रुपये की राशि शामिल है. दरअसल एमडीएम संचालित विद्यालय प्रधान को एमडीएम से संबंधित रिपोर्ट प्रतिदिन शाम 4 बजे तक देनी है. इन विद्यालयों के प्रधान ने इसकी रिपोर्ट ई शिक्षा कोष पर नहीं दी. परिणामस्वरूप एमडीएम डीपीओ आलोक शेखर आनंद ने उस दिन की परिवर्तन राशि की कटौती की है.

इस संबंध में डीपीओ एमडीएम ने बताया कि प्रतिदिन मध्याह्न भोजन योजना से लाभान्वित बच्चों की संख्या ई-शिक्षा कोष पोर्टल पर अनिवार्य रूप से आनलाईन दर्ज करना है. इसको लेकर जिले के स्कूलों के एचएम को योजना से लाभान्वित बच्चों की संख्या ई शिक्षा कोष पोर्टल के माध्यम से आनलाइन दर्ज करने हेतु विभाग के द्वारा बराबर आवश्यक निदेश लगातार दिये जा रहे हैं. उसके बावजूद जिले के शत-प्रतिशत स्कूलों द्वारा नियमित रूप से मध्याह्न भोजन योजना से लाभान्वित बच्चों की संख्या को ई शिक्षा कोष पोर्टल पर अपलोड नहीं किया जा रहा है.

डीपीओ ने बताया कि ऐसे प्रधान से स्पष्टीकरण की भी मांग की गई है. बताया कि जिन प्रधान द्वारा एमडीएम से संबंधित पंजी विभाग को नहीं समर्पित किया गया है फिलहाल ऐसे विद्यालयों के योजना मद के लिमिट की राशि भी स्थगित रखी गई है.

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