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योगी के 1.27 करोड़ हिंदू वोट गायब होने के दावे पर भड़के अखिलेश, बोले- रामलीला मैदान में आकर बताएं सच्चाई

योगी के 1.27 करोड़ हिंदू वोट गायब होने के दावे पर भड़के अखिलेश, बोले- रामलीला मैदान में आकर बताएं सच्चाई

लखनऊ, उत्तर प्रदेश: उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले मतदाता सूची को लेकर सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के 1.27 करोड़ हिंदू मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से गायब होने के दावे पर समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने पूछा कि मुख्यमंत्री को यह आंकड़ा कहां से मिला और इसके पीछे क्या आधार है।

दरअसल, शुक्रवार को लखनऊ में आयोजित भाजपा प्रदेश कार्यसमिति की बैठक को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को बेहद महत्वपूर्ण बताया था। उन्होंने दावा किया कि एसआईआर से पहले मतदाता सूची के विश्लेषण में 1.27 करोड़ हिंदू मतदाताओं के नाम विधानसभा की वोटर लिस्ट में नहीं मिले हैं।

योगी ने कहा कि प्रदेश में मतदाताओं के नाम जुड़वाने के लिए व्यापक अभियान चलाने की जरूरत है। उनके मुताबिक, जनसंख्या के आंकड़ों के हिसाब से प्रदेश में 16 करोड़ से अधिक मतदाता होने चाहिए, जबकि वर्तमान मतदाता सूची में करीब 13 करोड़ नाम दर्ज हैं। उन्होंने यह भी कहा कि मतदाताओं के नाम छूटने से 28 नगरीय और 66 अन्य विधानसभा सीटों पर चुनौती पैदा हो सकती है।

मुख्यमंत्री ने भाजपा कार्यकर्ताओं से कमल साथी ऐप के माध्यम से पात्र मतदाताओं के नाम जुड़वाने के लिए अभियान चलाने की अपील की।

अखिलेश यादव ने पूछा- मुख्यमंत्री को आंकड़ा किसने दिया?

दिल्ली में इंडिया ब्लॉक की रैली में पहुंचे अखिलेश यादव ने मुख्यमंत्री के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि अब खुद उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री मान रहे हैं कि 1.27 करोड़ वोट कम हो गए हैं। उन्होंने सवाल किया कि मुख्यमंत्री को इसकी जानकारी कब मिली और वह यह दावा किस आधार पर कर रहे हैं।

अखिलेश ने कहा कि मुख्यमंत्री को यह बात एमएलसी चुनाव में हार के बाद याद आई है। उन्होंने भाजपा के डबल इंजन सरकार के नारे पर तंज कसते हुए उसे डबल जीरो बताया और चुनाव में हार स्वीकार नहीं करने का आरोप लगाया।

अखिलेश बोले- उनको भी रामलीला मैदान आना चाहिए

सपा प्रमुख ने कहा कि 1.27 करोड़ मतदाताओं के नाम गायब होने का आंकड़ा कोई सामान्य जानकारी नहीं है। मुख्यमंत्री को बताना चाहिए कि यह डेटा उन्हें किसने दिया और इसके पीछे क्या तथ्य हैं।

अखिलेश यादव ने आगे कहा कि यदि मुख्यमंत्री खुद इतने बड़े पैमाने पर वोट कम होने की बात कह रहे हैं, तो उन्हें भी रामलीला मैदान आना चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार लाखों लाभार्थियों के नाम मतदाता सूची में नहीं होने की बात भी कर रही है। ऐसे लोगों को भी अन्याय और कथित झूठे वादों के खिलाफ आंदोलन में शामिल होना चाहिए।

वोटर लिस्ट को लेकर बढ़ी राजनीतिक बहस

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और अखिलेश यादव के इन बयानों के बाद उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। एक तरफ भाजपा मतदाता सूची में छूटे पात्र लोगों के नाम जुड़वाने के लिए अभियान चलाने की बात कर रही है, वहीं समाजवादी पार्टी मुख्यमंत्री के दावों का आधार सार्वजनिक करने की मांग उठा रही है।

Satya Report Disclaimer: यह खबर उपलब्ध मीडिया रिपोर्टों और संबंधित नेताओं के सार्वजनिक बयानों पर आधारित है। मतदाता सूची से जुड़े आंकड़ों और दावों की आधिकारिक दस्तावेजों से पुष्टि की जानी चाहिए।

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