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कॉरपोरेट​​​ नौकरी छोड़ लद्दाख के गांव में बसाई नई दुनिया, कुछ दिनों के लिए गई थीं घूमने लेकिन अब लौटने का मन नहीं; शुरू किया होमस्टे

कॉरपोरेट​​​ नौकरी छोड़ लद्दाख के गांव में बसाई नई दुनिया, कुछ दिनों के लिए गई थीं घूमने लेकिन अब लौटने का मन नहीं; शुरू किया होमस्टे

स्टोक गांव, लद्दाख: शहर की भागदौड़, ऑफिस का दबाव और रोजमर्रा की एक जैसी जिंदगी से दूर पहाड़ों के बीच सुकून तलाशने निकलीं प्रेरणा दलाल की जिंदगी ही बदल गई। लद्दाख घूमने पहुंचीं प्रेरणा को स्टोक गांव की सादगी और वहां के लोगों से ऐसा लगाव हुआ कि कुछ दिनों के लिए शुरू हुई उनकी यात्रा लंबी होती चली गई। अब उनकी कहानी सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बनी हुई है।

35 साल की उम्र में कॉरपोरेट नौकरी छोड़कर डिजिटल कंटेंट क्रिएटर बनीं प्रेरणा जिंदगी को एक नए अंदाज में जीना चाहती थीं। इसी तलाश में वह लद्दाख पहुंचीं। यहां लेह से करीब 15 किलोमीटर दूर स्थित स्टोक गांव ने उनका दिल जीत लिया। पहाड़ों से घिरे इस गांव का शांत माहौल और स्थानीय लोगों का अपनापन उन्हें इतना पसंद आया कि यहां बिताए कुछ दिन उनकी जिंदगी का खास अनुभव बन गए।

दो महीने लद्दाख में रहीं, 14 दिन स्टोक गांव में बिताए

प्रेरणा ने इंस्टाग्राम पर साझा किए गए अपने अनुभव में बताया कि वह करीब दो महीने तक लद्दाख में रहीं। इस दौरान उन्होंने 14 दिन स्टोक गांव में बिताए। कांगरी पहाड़ों के बीच बसे इस गांव की जिंदगी शहरों से बिल्कुल अलग है। यहां न तो शहर जैसी भागदौड़ है और न ही हर समय काम की जल्दी।

धीरे-धीरे प्रेरणा गांव के माहौल में घुलने-मिलने लगीं। उन्हें आसपास के रास्तों की जानकारी होने लगी और यह भी पता चल गया कि राशन की सबसे नजदीकी दुकान कहां है। उन्होंने लद्दाख के स्थानीय अंदाज में मोमोज बनाना भी सीखा।

गांव पहुंचकर पता चला, यहां है लद्दाख के आखिरी राजा का घर

प्रेरणा ने बताया कि जब वह पहली बार स्टोक पहुंचीं, तब उन्हें इस गांव के ऐतिहासिक महत्व की जानकारी नहीं थी। उन्हें यह भी पता नहीं था कि यहां लद्दाख के आखिरी राजा का घर मौजूद है। गांव में समय बिताने के बाद उन्हें इसकी खासियत और आसपास की कई जगहों के बारे में पता चला।

उनके लिए यह अनुभव किसी सामान्य पर्यटन यात्रा से अलग था। वह सिर्फ मशहूर जगहों को देखने तक सीमित नहीं रहीं, बल्कि गांव की रोजमर्रा की जिंदगी को करीब से समझने लगीं।

होमस्टे में चाय की चुस्कियों के बीच बनीं खास यादें

प्रेरणा के मुताबिक, स्टोक की सबसे यादगार बातें सिर्फ पहाड़ों और खूबसूरत नजारों से जुड़ी नहीं हैं। होमस्टे के मेजबान के साथ बैठकर चाय पीना और बातचीत करना भी उनके लिए बेहद खास रहा।

धीरे-धीरे अनजान चेहरे परिचित बन गए और गांव के रास्ते अपने से लगने लगे। प्रेरणा ने इस अनुभव को स्लो ट्रैवल यानी किसी जगह पर ज्यादा समय बिताकर वहां के लोगों, संस्कृति और जीवनशैली को समझने का तरीका बताया।

‘अब यह जगह घर जैसी लगती है’

प्रेरणा जब स्टोक पहुंची थीं तो उनका इरादा कुछ दिन रुककर गांव और आसपास की जगहों को देखने का था। लेकिन यहां के लोगों से बढ़ते जुड़ाव ने उनकी यात्रा को यादगार बना दिया। उन्होंने बताया कि यहां से जाते समय वह अपने साथ कई कहानियां, परिचित चेहरे और ढेर सारी यादें लेकर जा रही हैं।

उनकी कहानी के साथ होमस्टे शुरू करने का जिक्र भी सामने आया है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में होमस्टे की शुरुआत और उसके संचालन से जुड़ी विस्तृत जानकारी नहीं दी गई है।

सोशल मीडिया पर लोगों को पसंद आया स्लो ट्रैवल का विचार

प्रेरणा की कहानी पर सोशल मीडिया यूजर्स ने भी अपनी प्रतिक्रियाएं दीं। कई लोगों का कहना है कि यात्रा का असली आनंद सिर्फ कम समय में ज्यादा जगहें देखने में नहीं, बल्कि किसी एक जगह पर ठहरकर वहां की संस्कृति और लोगों को समझने में है।

कुछ यूजर्स ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि उन्होंने भी हिमाचल और लद्दाख के छोटे गांवों में लंबे समय तक रहकर वहां की जिंदगी को करीब से जाना है। लोगों के मुताबिक, स्थानीय खानपान, संस्कृति और रोजमर्रा की गतिविधियों से जुड़ना किसी भी यात्रा को ज्यादा यादगार बना देता है।

प्रेरणा दलाल की कहानी यही बताती है कि कभी-कभी किसी जगह की खूबसूरती से ज्यादा वहां मिलने वाले लोग दिल में जगह बना लेते हैं। जिस गांव में वह कुछ दिनों के लिए पहुंची थीं, वही अब उनके लिए घर जैसा एहसास देने लगा।

 

 

 

Satya Report Disclaimer: यह लेख उपलब्ध मीडिया रिपोर्ट और प्रेरणा दलाल द्वारा सोशल मीडिया पर साझा किए गए अनुभवों पर आधारित है। उनकी वर्तमान योजनाओं और होमस्टे से जुड़ी विस्तृत जानकारी की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध विवरण में नहीं है।

contact.satyareport@gmail.com

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