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धनतेरस​​​ 2026 कब है? जानें पूजा का शुभ मुहूर्त और इस दिन क्या खरीदना माना जाता है शुभ

धनतेरस​​​ 2026 कब है? जानें पूजा का शुभ मुहूर्त और इस दिन क्या खरीदना माना जाता है शुभ

दीपावली के पांच दिवसीय पर्व की शुरुआत धनतेरस से होती है। हिंदू पंचांग के अनुसार, कार्तिक महीने के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को धनतेरस मनाया जाता है। इस दिन भगवान धन्वंतरि, मां लक्ष्मी और भगवान कुबेर की पूजा का विशेष महत्व माना जाता है। साथ ही सोना-चांदी, बर्तन और दूसरी उपयोगी चीजें खरीदने की परंपरा भी है।

धार्मिक मान्यता है कि धनतेरस पर शुभ समय में खरीदारी और पूजा करने से घर में सुख-समृद्धि और खुशहाली आती है। आइए जानते हैं साल 2026 में धनतेरस किस दिन मनाया जाएगा, पूजा का शुभ समय क्या रहेगा और इस दिन किन चीजों की खरीदारी शुभ मानी जाती है।

धनतेरस 2026 कब मनाया जाएगा?

पंचांग के अनुसार, वर्ष 2026 में कार्तिक कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि 6 नवंबर को सुबह 10 बजकर 31 मिनट पर शुरू होगी और 7 नवंबर को सुबह 10 बजकर 47 मिनट पर समाप्त होगी।

उदया तिथि और प्रदोष काल की मान्यताओं को ध्यान में रखते हुए धनतेरस का पर्व 6 नवंबर 2026, शुक्रवार को मनाया जाएगा।

धनतेरस 2026 पूजा का शुभ मुहूर्त

दी गई पंचांग गणना के अनुसार, धनतेरस पर शाम के समय पूजा का शुभ मुहूर्त इस प्रकार है:

  • पूजा का समय: शाम 6:02 बजे से 7:57 बजे तक
  • अवधि: लगभग 1 घंटा 56 मिनट
  • अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:36 बजे से दोपहर 12:24 बजे तक

धनतेरस पर प्रदोष काल में मां लक्ष्मी और भगवान कुबेर की पूजा का विशेष महत्व माना जाता है। पूजा का समय स्थानीय सूर्योदय, सूर्यास्त और पंचांग के अनुसार थोड़ा अलग हो सकता है।

धनतेरस पर बन रहे हैं ये शुभ संयोग

पंचांग की दी गई गणना के अनुसार, 5 नवंबर की रात 3:56 बजे से हस्त नक्षत्र शुरू होकर 6 नवंबर की रात 4:44 बजे तक रहेगा। वहीं विष्कुंभ योग 5 नवंबर की रात 5:10 बजे से शुरू होकर 6 नवंबर की रात 4:10 बजे तक बताया गया है।

धार्मिक मान्यताओं में शुभ नक्षत्र और योग के दौरान पूजा-पाठ तथा खरीदारी को विशेष महत्व दिया जाता है।

धनतेरस पर क्या खरीदना माना जाता है शुभ?

धनतेरस के दिन खरीदारी करना सदियों पुरानी परंपरा है। इस दिन कई तरह की चीजें खरीदना शुभ माना जाता है।

1. सोना और चांदी: धनतेरस पर सोने-चांदी के आभूषण या सिक्के खरीदने की परंपरा है। इन्हें धन और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है।

2. बर्तन: इस दिन पीतल, तांबे और चांदी के बर्तन खरीदना शुभ माना जाता है। लोग अपनी क्षमता के अनुसार स्टील या दूसरे धातुओं के बर्तन भी खरीदते हैं।

3. झाड़ू: धार्मिक मान्यता के अनुसार, धनतेरस पर झाड़ू खरीदना शुभ होता है। इसे घर की साफ-सफाई और दरिद्रता दूर करने के प्रतीक के रूप में देखा जाता है।

4. धनिया के बीज: धनतेरस पर साबुत धनिया खरीदने और मां लक्ष्मी की पूजा में अर्पित करने की परंपरा भी है। इसे समृद्धि का प्रतीक माना जाता है।

5. वाहन और संपत्ति: इस दिन लोग अपनी जरूरत और बजट के अनुसार वाहन, जमीन या मकान खरीदने की योजना भी बनाते हैं।

6. पूजा सामग्री: धनतेरस पर दीपक, लक्ष्मी-गणेश की मूर्तियां, कलश और अन्य पूजा सामग्री खरीदना भी शुभ माना जाता है।

ध्यान रखें कि इन चीजों की खरीदारी धार्मिक परंपरा और व्यक्तिगत मान्यता पर आधारित है। शुभता के लिए महंगी वस्तु खरीदना जरूरी नहीं है।

धनतेरस पर क्यों की जाती है भगवान धन्वंतरि की पूजा?

धनतेरस को भगवान धन्वंतरि के प्राकट्य दिवस के रूप में भी मनाया जाता है। पौराणिक मान्यता के अनुसार, समुद्र मंथन के दौरान भगवान धन्वंतरि अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे। उन्हें आयुर्वेद और आरोग्य का देवता माना जाता है।

इसी वजह से इस दिन भगवान धन्वंतरि की पूजा करके परिवार के अच्छे स्वास्थ्य और लंबी आयु की कामना की जाती है। धनतेरस पर मां लक्ष्मी और भगवान कुबेर की पूजा भी की जाती है। मां लक्ष्मी को धन और वैभव की देवी, जबकि कुबेर को धन का अधिपति माना जाता है।

धनतेरस का पर्व केवल खरीदारी तक सीमित नहीं है। यह स्वास्थ्य, समृद्धि, स्वच्छता और परिवार की खुशहाली के लिए प्रार्थना करने का अवसर भी माना जाता है।

डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई तिथियां और मुहूर्त उपलब्ध पंचांग गणना पर आधारित हैं। स्थानीय पंचांग और भौगोलिक स्थिति के अनुसार समय में अंतर हो सकता है। धार्मिक मान्यताओं को वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित तथ्य नहीं माना जाना चाहिए। पूजा से पहले अपने क्षेत्र के पंचांग से समय की पुष्टि कर लें।

— Satya Report

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